गोरखपुर : गोरखपुर की पत्रकारिता जगत से बड़ी और बुरी खबर यह है कि, गोरखपुर में कथित पत्रकारिता से जुड़े हुए लगभग दर्जन भर लोगों के खिलाफ डिफेमशन तथा क्रिमिनल कांस्पीरेसी के मामले में ढाई करोड़ के डिफेमेशन का केस चलेगा । इस संबंध में विधिक नोटिस हाइकोर्ट के अधिवक्ता द्वारा भेजी गई है । इस विधिक नोटिस में डिफेमेशन के अलावा सबूतों के आधार पर क्रिमिनल कांस्पीरेसी तथा फोर्जरी के मामले भी आगे चलकर स्वतः जुड़ जाएंगे । यह विधिक नोटिस सिस्टम वेबसाइट मीडिया की तरफ से भेजी गई है जिसमे कुछ कथित पत्रकारों, संपादकों समेत कुछ अन्य लोगों के नाम भी शामिल है ।
यह मामला एक फर्जी वेबसाइट के सहारे सिस्टम वेबसाइट मीडिया के कर्मी व संपादक के विरुद्ध प्रसारित किए गए एक बेसलेस तथा भ्रामक मटेरियल से जुड़ा है जिसका प्रकाशन “वक्फ़ के सौदागर ( चैप्टर 2)” के प्रसारण के 24 घंटे बाद निजी खुन्नस में किया गया था । साथ ही ऐसे प्रमाण भी सामने आए हैं जो बताते हैं कि इसका सीधा सम्बंध दरगाह की आड़ में बैठे एक पेशेवर अपराधी और उसके साथी समेत वक्फ़ जमीनों को बेचने में सहयोग करने वाले बिचौलियों से है । किसी को भी इस कार्यवाही का बुरा बिल्कुल नही मानना चाहिए, क्योंकि इस कार्यवाही के जरिये उनलोगों को मौका दिया गया है, कि जो तुमने लिखा और शेयर किया है उसकी सच्चाई को अब हाइकोर्ट में साबित करो ।
इस नोटिस की प्रतियां प्रेस क्लब अध्यक्ष को “सूचनार्थ” भेजी गई हैं क्योंकि इस प्रकरण के कुछ आरोपियों का सीधा सम्बंध “प्रेस क्लब गोरखपुर” तथा प्रेस क्लब गोरखपुर के नाम से संचालित व्हाट्सएप्प ग्रुपों से होने के प्रमाण सामने आए है । साथ ही अखबारों के रजिस्ट्रेशन के मामले में तमाम जानकारियां फर्जी दर्ज कराए जाने के प्रमाण भी हाथ लगे हैं इसलिए नोटिस की प्रति जिला सूचना अधिकारी गोरखपुर को भी “सूचनार्थ” भेजी गई है । उक्त प्रकरण में बगैर किसी साक्ष्य के डिफेम किये गए अन्य व्यक्तियों तथा संस्थानों की ओर से भी उक्त समस्त के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने की प्रबल संभावना है । अब इसी बहाने इस मामले में ऐसी कड़ियाँ भी जुड़ेंगी जो दरगाह की आड़ में किये जा रहे अवैध फंडिंग तथा अवैध क्रियाकलाप समेत कथित पत्रकारों का इतिहास, शैक्षणिक योग्यता और एकत्र आर्थिक साम्राज्य से सम्बंधित हैं ।
संदेश यह है कि ऐसी ही एक हरकत सन 2018 में अपने ताकत और दौलत में मगरूर एक प्रोफेशनल द्वारा भी की गई थी । गलती का एहसास उसे तब हुआ जब चीजें हाथ से निकल गई । इन बिचौलियों का शायद अभी तक यह भी नही पता कि सत्येंद्र के खिलाफ जाँच यहाँ से लेकर लखनऊ तक होते हुए उनके गांव ज्वार तक हर जगह हो चुकी है, लेकिन न हराम का कुछ उसके पास था और न मिला । अब जाँच की बारी तो तुम लोगों की है । अब तो देखना यही है कि सेवई के धंधे में कितना मुनाफा आता है और दरगाह पर सेवई की आड़ में और क्या क्या बेचा जाता है ?
गोरखपुर में पत्रकारिता का चोला ओढ़े अनपढ़ जाहिलों और उनका साथ देनेवालों को अब यह समझना चाहिए कि कलम और मुँह से निकला एक भी शब्द जब बेसलेस और बगैर साक्ष्य के होता है, तो आज नही तो कल कटोरा लेकर भीख मांगने वाली स्थिति आ ही जाती है । इसलिए अब थोड़ा पैसे इकट्ठा करो और एक किराये के कमरे का बंदोबस्त प्रयागराज में भी करो क्योंकि मुलाकातें अब वहीं पर अक्सर हुआ करेंगी !
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