जौनपुर : अक्सर किसी न किसी व्यक्ति विशेष की तरफदारी में लामबंद होकर खड़ी हो जाने वाली यूपी पुलिस आज तक समझ ही नही पाई, कि वो किसी व्यक्ति विशेष की पुलिस नही बल्कि पूरे उत्तरप्रदेश की पुलिस है ।
थाने चौकियों की वसूलीबाजी प्रक्रिया तथा एकतरफा रवैय्या अख्तियार करने की परंपरा अक्सर पुलिस अधिकारियों की फ़जीहत का कारण बन जाती है । ऐसे ही एक ज़मीन के विवाद को लेकर नाराज़ हाईकोर्ट ने जौनपुर कप्तान 2015 बैच के IPS डाक्टर कौस्तुभ कुमार को तलब कर लिया है ।
जब मातहतों के करम खुद की और विभाग की परेशानी का सबब बन जाये तो नाराजगी स्वभाविक है । सो नाराज़ एसपी साहब ने मुगराबादशाहपुर SHO सहित कईयों को सस्पेंड कर दिया । जौनपुर जिले के थाना मुंगरा बादशाहपुर के SHO समेत कुछ सिपाहीयों को निलंबित कर दिया गया है । कार्यवाही के दायरे में आने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या लगभग चार बताई जा रही है और कायदे से होना भी यही चाहिए था ।

पत्रकार दलाली कर रहे हैं और दलाल पत्रकारिता कर रहे हैं… नेता गुंडागर्दी कर रहे हैं और गुंडे नेतागिरी कर रहे हैं.. सड़क खड्डे में धंसी हुई है और भारत चांद पर पहुंच गया हैं… संविधान को सब मानते हैं लेकिन कानून की धज्जियां सभी उड़ा रहे है… इंसान जानवर बन चुका है और जानवर और इंसान बनने की कोशिश कर रहा है… वर्तमान में लोग भूखे मर रहे हैं अपने परिवार को 2 जून की रोटी ने दे पाने के कारण आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन SHO मुंगरा बादशाहपुर जैसे लोग लक्ष्य साधे बैठे हैं कि जितना सरकार तनख्वाह देती है उससे दस गुना ज्यादा हर महीने रिश्वतखोरी से ही कमाकर रख देंगे ।
यही वजह है कि मरने के पंद्रह पंद्रह साल बाद भी हमारे नौकरशाहों के खटिया पलंग और गद्दों से लाखो करोड़ों बरामद हो रहे हैं । आठवें वेतन आयोग से भी काम नही चलेगा साहब ! थानेदार दरोगा,सिपाही की पगार और बढ़ाइए..क्योंकि जो सरकार से इन्हें मिलता है.. उतने में तो घर नही चलता…ईमान क्या घंटा चलेगा ?

