गोरखपुर : हमारे संपादक जी बड़े भोले और मस्तमौला आदमी हैं । अपने छप्परनुमा महल में दिन भर अपने बच्चे, बकड़ी, अंडा, छेगड़ी, मुर्गी के साथ हँसते खेलते उनका समय बीत जाता है । सम्पादक जी ने मोहल्ले की समस्याओं के निदान के लिए एक ग्रुप भी बना रखा है जिस पर कोई भी समस्या आते ही वे फौरन एक्टिव हो जाते हैं, और दम तभी लेते हैं जब समस्या का समाधान हो जाये । अब हुआ यूं कि हमारे सम्पादक महोदय के जनकल्याणकारी योजनाओं और समाजसेवा से दुःखित और त्रस्त हो चुके एक वर्ग को हमारे सम्पादक महोदय के बकरी छेगड़ी की मोहब्बत और खुशियाँ देखी नही जा रही थीं । सो बकरी को ही टारगेट कर लिया और दिन दहाड़े सरेबाजार उसका अपहरण भी करा लिया ।
जब बकरी ने अपनीं हेकड़ी दिखाते हुए चोरों को बताया कि हम किसकी “छेगड़ी” हैं तो “बकरी चोरों के गैंग” का पूरा लोकतंत्र हिल गया । सीसीटीवी कैमरे ने भी बड़ी ईमानदारी से चोर को पकड़ लिया था । चेहरे से लेकर चप्पल का ब्रांड तक सब साफ नजर आ रहा था । मामला पुलिस तक पहुँचेगा की नहीं यह सोचकर बेचारी बकरी भी बेचैन थी, लेकिन पुलिस विभाग पूर्णतः शांत था क्योंकि अब न वो सरकार है…न वो आजम और न वो खुशनसीब भैंस..जो पुलिस खोजने मे दिनरात एक कर दे ! लेकिन हमारे सम्पादक जी को अपनी बकरी का सरेराह हुआ यह अपहरण कुछ इस क़दर खल गया कि यह मामला “सूर्यविहार चौकी” से होता हुआ तिवारीपुर थाने तक जा पहुँचा । शिकायत पहुँची, तो पुलिस बोली —“कि देखिए, बकरी चोरी का मामला है, कोई देश की सुरक्षा तो खतरे में है नहीं”।
पुलिस को जब सीसीटीवी दी गई तो पुलिस ने कुछ ही घंटों में चोर और बकरी दोनो को पकड़ लिया और साथ ही बकरी को सम्पादक जी के हवाले भी कर दिया । लेकिन उसके बाद वही हुआ जो हर ईमानदार सिस्टम में होता है । बकरी के अपहरण में शामिल वाहन और वाहन मालिक समेत बकरी चोर सभी पुलिस की हिरासत में थे लेकिन मामले में पुलिस ने कहा ..इंसान ही तो है गलती कर बैठा और “मामला रफा-दफा”।
अब पूरे मामले का निष्कर्ष यह निकला कि….
👉 मुकदमा दर्ज न होने की वजह से “बकरी को न्याय” नहीं मिला
👉 चोर को सुधार का मौका मिला
👉पुलिस को “स्वर्णघूस पात्र के साथ चाय बिस्किट” मिली
👉और संपादक जी को सिर्फ तसल्ली मिली — और “ वो भी जाँच की घुट्टी के साथ !”
हमारे संपादक जी भी हमसे खासे नाराज इस बात से थे, कि उनकी दो-दो बकरियाँ चोरी हो गई, और हमने एक लाइन की ख़बर भी नहीं लिखी । हमने संपादक जी को समझाया कि हमसे अभी कुछ न लिखवाइए…अगर हमने कुछ लिख दिया तो फ़िज़ाओं में जहरीली ततैय्या नाचने लगेगी ! इसलिए अब अगली बार जब कोई बकरी चोरी हो जाए तो पहले बकरी को वकील दिलाइए, और वकील के जरिये FIR करवाइए । क्योंकि इस सिस्टम में गायब हो चुके इंसाफ को ढूंढना… गायब हुई बकरी को ढूंढने से भी ज्यादा मुश्किल है ।
हमने सम्पादक महोदय को समझाया कि तमाम लोग देश का करोड़ो अरबों रुपया लेकर भाग जाते हैं लेकिन पकड़ा वही जाता है जो अपने “स्प्लेंडर” के कागज घर पर छोड़कर निकलता है ! अरे बकरी चोरी का मुकदमा नहीं दर्ज हुआ तो ठीक ही हुआ । मुकदमा हो भी जाता तो उस मुकदमे को लेकर जाते कहाँ ? अब देखिए न..कुछ दिनों पहले “फायर डिपार्टमेंट वाले एक जज के घर आग बुझाने गए थे और ससुरे पूरे देश मे लगा आये” ।
करोड़ो रूपये नगद, जिस जज के घर में धूं धूं कर जल रहे थे वो बिना काम के आज 4 महीने से ज़्यादा दिन से घर पर बैठे हुए है । लेकिन इन 4 महीनों में सरकार ने उनको 4 महीने की सैलरी (लगभग 9 लाख रुपए) (2 लाख 16 हजार के भत्ते) (सैकड़ों लीटर पेट्रोल चलने को ) रहने को (करोड़ो रूपये का सरकारी आवास) (मुफ्त अनलिमिटेड बिजली) पूरे परिवार के लिए मुफ्त चिकित्सा, सरकारी गाड़ी, ड्राइवर और सुरक्षा में तैनात 4 सिक्योरटी के जवान (शिफ्ट में 12 जवान रोज) और वो भी गाड़ी तथा सोफेस्टिगेटेड वीपन्स के साथ ! इसलिए जाने दीजिए “मुकदमा फुकदमा” ! वैसे भी “लोकतंत्र” में लोक ही झेलता है… बाकी तंत्र तो बस मजे लेता है !
नीचे वीडियो में आप “बकरी चोर गैंग का कारनामा” देख सकते हैं.. लेकिन वीडियो में सबसे खास जो देखने लायक चीज है वो है जानवरों का सेंटीमेंट्स ! बकरी के बच्चों को जैसे ही अहसास हुआ कि उनकी माँ को कोई ले जा रहा है, वैसे ही वे उसके पीछे भागे लेकिन इंसानों के कानों पर जूँ नही रेंगी !

