“ठोक देंगे कट्टा कपार में..आईये न हमरा बिहार में”! पारस अस्पताल मतलब “मौत की गारंटी”

लेखक: व्यवस्था पीड़ित नागरिक

बिहार में हुई कल एक लोकतांत्रिक गोलीबारी में छह हथियारबंद बदमाशों ने कानून व्यवस्था का पोस्टमार्टम करते हुए, पारस हॉस्पिटल के ICU में भर्ती गैंगस्टर चंदन मिश्रा को गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया । जाते समय बदमाशों ने अपने हाथों से विक्टरी साइन भी बनाया । बिहार की राजधानी पटना में स्थित पारस अस्पताल अब महज़ एक अस्पताल नहीं रहा, बल्कि यह अस्पताल अब आधुनिक भारत की कानून व्यवस्था का आईसीयू बन चुका है । यहाँ हत्या नहीं हुई है, बल्कि लोकतंत्र का “एमआरआई” हुआ है !

इस हत्याकांड में मारा गया व्यक्ति भले ही एक हार्डकोर अपराधी था, लेकिन इस अपराधी की हत्या के वीभत्स अपराध ने कानून का विश्वास, जनता की सुरक्षा और पुलिस की साख, तीनों को एक ही ट्रॉली पर लिटाकर गोलियों से छलनी कर दिया । बताया जा रहा है की पूरे अस्पताल में मेटल डिटेक्टर नहीं थे, गार्ड व्हाट्सएप पर रील देख रहा था और पुलिस अस्पताल से 200 मीटर दूर चाय की चुस्की ले रही थी ।

इस घटना के बाद की राजनीतिक प्रतिक्रिया कुछ इस तरह है..!

“घटना निंदनीय है, और हम जांच करेंगे”। “घटना शर्मनाक है, खौफनाक है, दर्दनाक है, विपक्ष की साजिश है, घंटा है घड़ियाल है”। “हमें इसकी जानकारी नहीं थी।” “हमने एसआईटी बना दी है ।” जनता पूछना चाहती है कि “क्या एसआईटी बनाए बिना कोई अपराधी पकड़ा नहीं जाता ? या अब अपराध रोकने के बजाय एफआईआर दर्ज करने और कमेटी बैठाने को ही सुशासन कहते हैं ?

मूकदर्शक बनी बिहार पुलिस ने घटना के बाद तीन शानदार काम किए हैं…!

👍प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
👍 सीसीटीवी फुटेज जारी किया।
👍घटना के बाद कहा – “हमें लीड मिल रही है” ।
👍 “हम देख रहे हैं… हम जाँच कर रहे हैं “।

हालात देखकर ऐसा लगता है कि आगामी चुनाव में सभी राजनैतिक पार्टियों को अपने घोषणा पत्र में “मुफ्त इलाज” की जगह “मुफ्त अंत्येष्टि योजना” को जोड़ लेना चाहिए । पारस अस्पताल का नाम बदल कर “पारस एनकाउंटर हॉल” कर देना चाहिए । बिहार पुलिस को दो नई शाखाएं डेवलप करनी चाहिए ।

🤜 सीसीटीवी दर्शक प्रकोष्ठ
🤜 पोस्ट मर्डर शोक समिति

जनता कैसे मूर्ख बनाई जाती है इसे नीचे दी गई कहानी से समझिए !

एक बैंक को लूटने के लिए लुटेरे आए । लुटेरों ने सबको चेतावनी देते हुए कहा ,” कि इस बैंक का सारा पैसा इस देश का है और आपकी जान सिर्फ आपकी है” । इसलिए कोई भी चालाकी नहीं करेगा । यह सुनकर सब के सब लोग डर के मारे चुप हो गए ।

इसे कहते हैं “माइंड चेंजिंग कॉन्सेप्ट” (Mind Changing Concept)

उसमें से एक लुटेरे ने कहा कि लूटे हुए रुपए गिन लेते हैं । तब दूसरे लुटेरे ने कहा कि मूर्ख गिनती में समय बर्बाद मत कर, कल टीवी पर न्यूज़ देख लेना पता चल जाएगा ।

इसे कहते हैं “एक्सपीरियंस” (Experience)

लुटेरे 20 लाख लूट कर भाग गए तब बैंक अधिकारी बोला की FIR करो । तो मैनेजर ने कहा कि सर 10 लाख और गायब कर देते हैं और जो हमने 50 लाख का घपला किया है, वह भी इसमें जोड़ देते हैं ।

इसे कहते हैं “ऑर्पच्यूनिटी” (Opportunity)

दूसरे दिन टीवी पर न्यूज़ आई कि बैंक में 80 लाख की लूट हुई । जब लुटेरों ने न्यूज़ देखा तो सोचा कि हमने इतना रिस्क लिया तो सिर्फ 20 लाख पाया, जबकि मैनेजर ने बैठे-बैठे 60 लाख रेल दिया ।

इसे कहते हैं “कॉरपोरेट मैनेजमेंट” (Corporate Managment)

बैंक मैनेजर के रिटायर होने और उसके मर जाने के बाद पता चलता है कि बैंक लुटेरे को बैंक लूटने का निमंत्रण देने वाला मैनेजर ही था और उसने ऐसा इसलिए किया ताकि वह अपने 40 लाख का कर्ज एक झटके में उतार सके ।

इसे कहते हैं “फूलप्रूफ प्लानिंग” (Full Proof Planning)

अब बैंक कस्टमर्स (जनता) अपने रुपयों के लिए दर दर की ठोकरें खा रही है और उसे सिर्फ आश्वाशन की घुट्टी मिल रही है ।

इसे कहते हैं ” इंडियन पॉलिटिक्स” (Indian Politics)

बिहार की पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म “गैंग्स ऑफ वासेपुर” सत्यघटना पर आधारित थी । इस फ़िल्म के किरदार रमाधीर सिंह की हत्या भी बेखौफ तरीक़े से अस्पताल में की जाती है । नीचे दिया गया वीडियो फ़िल्म “गैंग्स ऑफ वासेपुर” में चित्रित और पारस हॉस्पिटल में घटी घटना का “मैच मेकिंग” सीन है ।

By systemkasach

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