“डांग.. डर” साहब सिर्फ 300 रुपये में बाँट रहे हैं “गारंटी वाला इलाज” !

देवरिया : यदि आपकी भी कोई बीमारी ठीक नही हो रही, तो अब आपको परेशान होने की कत्तई भी जरूरत नही है । वो इसलिए कि अब इलाज भी “गारंटी कार्ड” के साथ आने लगा है । जैसे आप बाज़ार से फ्रिज, मिक्सर या मोबाइल खरीदते हैं और दुकानदार बोलता है “गारंटी है जी, कुछ हुआ तो हम देख लेंगे।” फर्क बस इतना है कि मोबाइल खराब हो जाए तो नया मिल सकता है, लेकिन यहाँ ज़िन्दगी खराब हो गई तो… “ओवर गारंटी” में सीधे परलोक पहुँचा दिए जाएँगे ।

गौरी बाजार में एक डॉक्टर साहब हैं । डॉक्टरी की डिग्रियों से नहीं बल्कि बीमारियों से उनका पूरा पैड भरा हुआ है। डिग्री तो इनकी पूछिये ही मत ! यदि दिमाग लगाकर पढ़ना शुरू कर दिया तो ए से लेकर ज़ेड तक के अक्षरों को मिलाकर ऐसी ऐसी डिग्रियाँ सामने आ जाएंगी कि आपको खुद अपनी काबिलियत पर ही संदेह पैदा ही जायेगा । और फीस ? जी हाँ, सिर्फ़ तीन सौ रुपये और वो भी “गारंटी वाले इलाज के साथ”!

असलियत यह है कि जो असली डॉक्टर हैं, वे कहते हैं—इलाज में प्रयास होता है, परिणाम भगवान के हाथ में है । लेकिन ये साहब मानो ईश्वर के चचेरे भाई हों, और “डील पक्की” कर रखी हो कि अमुक मरीज़ को दवा लगाकर हर हाल में ठीक करना है । व्यवस्था भी ऐसी है कि असली डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस पर नोटिस मिलती हैं, मेडिकल काउंसिल रोज़ गाइडलाइन बदलती है, लेकिन ये झोलाछाप महाराज धड़ल्ले से गारंटी बाँट रहे हैं । आज तक किसी ने पूछा भी नहीं कि“भाई साहब, इलाज की गारंटी है या जिंदगी से छुटकारे की ?” गज़ब तमाशा चल रहा है ! जहाँ हर वक्त इंसान अनिश्चितता और मौत के साये में जी रहा है वहीं गौरी बाजार (देवरिया) के ऐसे क्लिनिक रूपी तबेलों में तीन सौ की फीस में “गारंटी वाला इलाज” मिल रहा है ।”डांग डर” साहब इतने पुण्य का काम कर रहे हैं, फिर भी मरीज है कि – क्लिनिक की जाँच के लिए “अखंड कीर्तन” मचाये बैठा है और अब उसकी “व्यथा एक्सप्रेस” गोरखपुर तक पहुँच चुकी है ।

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By systemkasach

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