“डीएम ऑफिस पहुँचे ज्ञापनधारी, लेकिन रिपोर्टर को दिखे विज्ञापनधारी” !

गोरखपुर : चर्च पर धर्मान्तरण का आरोप लगाकर हो हल्ला काटने वाले जैसे ही ज्ञापन देने डीएम कार्यालय पहुँचे, वैसे ही एक धुरंधर पत्रकार ने उन्हें घेर लिया । मुँह से सटाकर माइक रखी, और पूछ डाला..कि क्या आज आप यहाँ “विज्ञापन” देने आए हैं ? ध्यान से देखिए क्योंकि पत्रकारिता का नया कोर्स शुरू हो चुका है.. इसलिए अब सोचिए कि “ज्ञापन और विज्ञापन के बीच अंतर कैसे मिटाएँ ?”

प्रैक्टिकल क्लास :- गोरखपुर डीएम ऑफिस के बाहर, माइक हाथ में लेकर !

“पत्रकार साहब ! ज्ञापन देने वालों से पूछ रहे हैं – “क्या आप विज्ञापन देने आए हैं ?”

वाह ! वाह पत्रकार साहब,आपने तो डीएम दफ़्तर को भी PR एजेंसी बना डाला ।

कल को शायद कोई बोलेगा—“भाई साहब, आप प्रदर्शन करने आए हैं या प्रमोशन करने ?”

ठीक वैसे ही, जैसे कुछ दिन पहले गोरखपुर के धांसू पत्रकार गुप्ता जी कैमरे के सामने “लो लैंड” की जगह लो..”ल” बोल दिए थे !

पत्रकारिता के बावनबीरों ने आजकल पत्रकारिता में गजब ढा रखा है । खूब मनोरंजन हो रहा है । वैसे भी पुराने समय मे राजा महाराजा लोग अपने मनोरंजन के लिए जिसे रखते थे …वो लोग नाच गाकर, हँसाकर राजाओं का मनोरंजन किया करते थे । शायद इसीलिए ऐसे लोगों को भांड कहा जाता था ! अब आजकल नाच गाकर और हँसाकर कर लोटपोट करने वाला यह काम, मीडिया कर रहा है ।

By systemkasach

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का खुद का चेहरा कितना विद्रूप और घिनौना है..ये आप इस पेज पर देख और समझ सकते हैं । एक ऐसा पेज, जो समाज को आईना दिखाने वाले "लोकतंत्र के चौथे स्तंभ" को ही आइना दिखाता है । दूसरों की फर्जी ख़बर छापने वाले यहाँ खुद ख़बर बन जाते हैं ।

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