गोरखपुर : पिपराइच की घटना कोई नई बात नही है, क्योंकि पशुतस्करों के बेअंदाजी की यशगाथाएं पहले भी कई बार छपती और दिखती रही हैं । न्याय के नाम पर सड़क जाम करना..नारेबाजी करना.. धरना प्रर्दशन करना तो मूर्खता की पराकाष्ठा है, क्योंकि नेताओं, रईसों और महाबादमाशों के आगे 90 डिग्री का कोण बनाकर साष्टांग दंडवत करने वाले वेतनभोगियों से न्याय की उम्मीद ही बेमानी है ।
व्यवस्था हमे समझाती है, कि नीट के मासूम छात्र की हत्या जब तक गौतस्करों ने नहीं की थी… तब तक पुलिस को एक लाख के इनामी गौतस्कर का सुराग नहीं लग पाया था…लेकिन जैसे ही गौतस्करों ने छात्र की क्रूरतापूर्ण तरीके से हत्या की…वैसे ही पुलिस को एक लाख के इनामी गौतस्कर रहीम का बिल्कुल सटीक सुराग मिल गया.. और बगैर समय गवाएं, तत्काल पुलिस ने पट्ठे का “हाफ इंकाउंटर” कर उसे दबोच लिया । जैसे छात्र नीट एग्जाम क्रैक करते हैं, ठीक उसी तरह वैसी ही मेहनत से पुलिस ने इस केस मिस्ट्री को भी क्रैक कर डाला । पुलिस की यह तत्परता “काबिल ए तारीफ” भी है ..बस पूछना यही रह गया था, कि छात्र का मर्डर होते ही पुलिस को “महाभारत काल के संजय” की भाँति ऐसी कौन सी दिव्य दृष्टि प्राप्त हो गई जिसकी बदौलत उन्हें वो गौतस्कर अचानक से दिखाई देने लग गया.. जो घटना से पहले कभी आजतक दिखाई ही नही दिया ?
अब तक गौतस्कर पहले नही दिखाई दिया को लेकर एक जबरदस्त लॉजिक/तर्क यह भी हो सकता है कि “कानून अंधा होता है ” फिर दिखेगा कैसे ? बहरहाल, गौतस्कर पकड़े गए हैं और इस खुशी में हमारे लोकतंत्र के चौथे खंभे की लेखनी उसी तरह कुलांचे मार रही है, जैसे शैंपेन की नई नवेली बोतल को जमकर हिलाने के बाद कार्क खोलते ही मदिरा की धार हवा में कुलाचें मार उठती हैं ।
दूसरी तरफ “गोलोकवासी छात्र” के घर मे मातम पसरा है ! वहाँ अभी मातम पसरा रहने दीजिए..उन्हें डिस्टर्ब मत कीजिये… क्योंकि खुद कुदरत की नजर में ही हम मनुष्य नहीं बल्कि “टाइम ट्रैवेल” करती हुईं “चलती फिरती लाशें” हैं ! इनसे क्या दिल लगाना और इनसे क्या बात करना ? बहुत सतही, बहुत अधूरे और बहुत नादान लोगों होते हैं ये ! इन्हें रोने दीजिए…गौर मत कीजिये…ध्यान मत दीजिये.. इन्हें जाने दीजिए… इन्हें जीने दीजिए और अपने-अपने काम पर लग जाईये ! यह सोचकर कि……
जिस तरह चाहो बजाओ हमें इस सभा में…हम आदमी नहीं, बल्कि झुनझुने हैं !
एक घायल गौतस्कर के अंजाम तक पहुँच जाने की खबर भी अब आ चुकी है, इसलिए अब चर्चाओं का दौर थमने दीजिये और अनर्गल प्रलाप भी बंद कीजिये… वैसे भी “घनघोर चटक सूत्रों” का दावा है कि “लोकतंत्र की देह” पर “लाठीतंत्र” के “डेनिम ब्रांड” का पाउडर छिड़ककर पुलिस फिर से तैयार है !

