“मुतवल्ली vs ब्रायलर मुर्गा : वक्फ की जमीन पर चोंचों का महासंग्राम”

गोरखपुर : आजकल गोरखपुर में एक दरगाह के मुतवल्ली और उस मुतवल्ली के मुगोँ का “चोंच लड़व्वल एपिसोड” का शानदार प्रसारण खूब जोर शोर से चल रहा है । मुतवल्ली इतना मंझा हुआ पुराना खिलाड़ी है..कि उसके पास “गुंडाष्त्र से लेकर रेपाश्त्र” तक के सारे “अमोघ अस्त्र शस्त्र” मौजूद हैं । ड्रामेबाज तो इतना पहुँचा हुआ है कि मौसम का मिजाज देखते हुए कभी “हरियर” ओढ़ के बैठ जाता है तो कभी “नारंगी गमछा” धारण कर लेता है । इतिहास में तो हमने पढ़ा था कि, मुगल लोग बाप दादाओं का कत्ल कर गद्दी हथिया लेते थे, लेकिन इस मुतवल्ली ने तो इतिहास ही पलट कर रख दिया… और दरगाह के पिछले मुतवल्ली पर “रेपाश्त्र” का अमोघ प्रयोग करते हुए गद्दी हथिया ली । अब मुतवल्ली साहब अहसानफरामोश आदमी तो हैं नही..इसलिए उन्होंने “रेपाश्त्र” का इस्तेमाल कर पूर्व मुतवल्ली को ठिकाने लगाने वाली महिला को बतौर इनाम दरगाह परिसर में ही “मुर्ग बिरयानी” की दुकान खुलवा दी ।

“रेपाश्त्र से बर्ड फ्लू तक –दरगाह की गद्दी पर मुर्गों का दंगल”

चहुँओर चर्चा है कि गद्दी पर बैठे इस मुतवल्ली के “मुर्गों की फौज” में ठेकेदार से लेकर पत्रकार…और जमीन की दलाली करने वाले से लेकर मठाधीश और लुक्खे सरीखे खाये पिये “जंगजू टाइप के मुर्गे” मौजूद हैं । दूसरी तरफ, मुकाबले के मैदान में खड़ा “ब्रायलर मुर्गा” निहायत अकेला और लकवाग्रस्त टाइप का है……जिसके खून में शुगर मिल से लेकर फ्रस्टेशन और ब्लड प्रेशर से लेकर यूरिया क्रेटनीन की नदी हिलोरे मार रही है । बावजूद इसके “ब्रायलर मुर्गा” अब भी पूरे फार्म में है और “अब्दुल हमीद” सरीखे जांबाजी दिखाते हुए “जंगजू मुर्गों” के लिए आफत बना फिर रहा है । हालात देखकर लग रहा है जैसे “ब्रायलर मुर्गा” ठाने बैठा है कि…. शहीद हुए तो हुए… लेकिन शहीद होने से पहले अपने “बर्ड फ्लू” को मुतवल्ली की सेना में “कम्युनिटी स्प्रेड” करके मानेंगे !

“ब्रायलर मुर्गे” की बगावत अपने “जंगजूँ मुगोँ” की हालत देखते हुए पहले मुतवल्ली साहब ने अपनी “जंगली मुर्गियों” को मैदान में उतारा… लेकिन फ्रस्टेशन में बह रहे “ब्रायलर मुर्गे” का हाव भाव देखकर “जंगली मुर्गियां” भाग खड़ी हुई । अब “चोंच लड़व्वल” के मैदान में मुतवल्ली साहब ने विदेश से अपने “विदेशी नस्ल” के “चिरैथ टाइप मुर्गे” को मैदान में उतार दिया है ।

इस “विदेशी नस्ल” के मुर्गे की अभी हाल ही में दो दिन पहले मैदान में एंट्री हुई है… लेकिन पंख नोचवाने के डर से “विदेशी मुर्गा” मैदान में आमने सामने आने की बजाय विदेशी धरती से ही अपनी “बांग” दिए जा रहा है । “विदेशी मुर्गे” की यह “बांग” सोशल मीडिया पर दौड़ती हुई अब गोरखपुर के गलियारों तक आ पहुँची है । एक तरफ “विदेशी मुर्गा” “ब्रायलर मुर्गे” पर आरोपों का हथियार “मिसाइल लॉन्चर” की तरह दाग रहा है… तो दूसरी तरफ आक्रामक मूड में बैठा “ब्रायलर मुर्गा” पंख फड़फड़ाकर कर सारी मिसाइलों को हवा में ही गिरा दे रहा है । “विदेशी मुर्गा” अपनी तरफ से “ब्रायलर मुर्गे” को धमकाते हुए बार बार चेता रहा है कि मेरे पास (यह भी है.. ऐसा भी है…वैसा भी है) लेकिन अफसोस, कि “ढीठ ब्रायलर मुर्गा” अपने क्रांति की मशाल को अपने ही मूत्र में विसर्जित करने को कत्तई तैयार नही है । ताल ठोककर कह रहा है कि “है तो दिखाओ !”

“सवाल,जो इस द्वंद में तैर रहे हैं…”

सवाल अब भी वही है कि…”ब्रायलर मुर्गा” तो “वक्फ की जमीन” पर बांग दे रहा था..फिर मुतवल्ली और उसकी “मुर्ग सेना” की पेट में मरोड़ क्यों उठा ?

अगर “ब्रायलर मुर्गा” इतना ही खराब था तो “मुतवल्ली और उसकी मुर्ग सेना” उसी “ब्रायलर मुर्गे” के साथ गलबहियां करते हुए फिजाओं में अब तक “बर्ड फ्लू” क्यों फैला रहे थे ?

इस “ब्रायलर मुर्गे” से इतना डर कैसा…कि “मुतवल्ली और उसकी मुर्ग सेना” को अपनी सारी सल्तनत का जोर लगाने के साथ ही “रेपाश्त्र से लेकर गुंडाष्त्र” तक का सहारा लेना पड़ रहा है ?

क्या ये कथन सही है कि….सत्य हमेशा अकेला दिखाई देता है…और झूठ मक्कारी हमेशा “झुंड” में दिखाई पड़ती है ?

कुछ भी हो..ब्रायलर मुर्गा बड़ा ढीठ है.. नीचे देखिए कि कैसे नाच रहा है..

 

By systemkasach

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