“आर्किटेक्ट” के वेश में बंटी-बबली ठग : विकास प्राधिकरण की आड़ में “वसूली का नया खेल”

गोरखपुर की गलियों और साइटों पर इन दिनों एक अजीब किस्म का “आर्किटेक्ट” घूम रहा है । कह सकते हैं कि गोरखपुर में ठग संस्कृति का नया चेहरा उभर कर सामने आया है । एक आर्किटेक्ट जो कभी हेलमेट और नकली फाइल हाथ में लेकर खुद को अधिकारी बताता है और मौके पर ही वसूली कर लेता है, तो कभी अपने खानदान को नेता-मंत्री की कोठियों से जोड़कर ठगी का नया पन्ना लिख देता है। “ठगी के अध्याय” की सत्य घटना पर आधारित यह कहानी बताती है कि “अभिषेक त्रिपाठी उर्फ निखिल नाम का यह ठग” अपने आर्किटेक्ट की डिग्री का इस्तेमाल व्यावसायिक विधा के लिए कम और ठगी के लिए जमकर कर रहा है । ध्यान रहे कि यह ठग आपकी साइट पर पहुँचकर खुद को विकास प्राधिकरण का बड़ा अधिकारी बताएगा और फिर आपसे माल लेकर “उड़न छू” हो जायेगा । खोराबार क्षेत्र ने रहने वाला अभिषेक त्रिपाठी उर्फ “निखिल” नाम का यह ठग हेलमेट, नकली फाइलें और कुछ सरकारी जैसे लहज़े के साथ ऐसा अभिनय करता है कि भोले-भाले लोग सोचते हैं सचमुच कोई निरीक्षण चल रहा है । और फिर शुरू होती है वसूली की कहानी “यह नक्शा गलत है, यह निर्माण अवैध है । लेकिन… थोड़ी रकम दे दीजिए तो मैं सब सेट कर दूँगा” । ठग अपना असली आईकार्ड दिखाता है….अपने आपको रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट बताता है…अपने खानदान को सत्ताधारी पार्टी से जुड़ा बताता है….जीडीए के दो चार अधिकारी कर्मचारी से मौके पर ही फोन से आपकी बात कराता है…अपनी सहयोगी “बबली” से नोटशीट बनाने को कहता है….और पब्लिक इतना सबकुछ देखने के बाद “झाँसे के झुण्ड” में फँसकर “झंड” हो जाती है ।

इतना ही नहीं –बल्कि यह शख्स कभी खुद को बड़े नेताओं-मंत्रियों का करीबी बताकर “ऊपर तक पहुँच” का झांसा भी देता है..तो कभी अपने मामा, चाचा, भांजा को विधायक पार्षद बताता फिरता है । लोग इस झाँसे में आ जाते हैं कि लगता है…शायद सत्ता से जुड़ाव होगा ! पर असलियत में यह सब सिर्फ ठगी एक रंगमंच है ।सबसे दुखद पहलू तब सामने आता है जब कर्ज़दार या ठगे गए लोग उसके घर का दरवाज़ा खटखटाते हैं…तो ठग वहाँ नही मिलता और ठग की माँ हाथ जोड़कर कहती है कि “बेटे की हरकतों से तंग आकर हमने उससे अपना सम्बन्ध खत्म कर लिया है । आँखों मे आँसू लिए हाथ जोड़कर कहती है कि मेरा बेटे की संगत गलत हो गयी जिस कारण वो उल्टे सीधे काम कर रहा है । कृपा करके हमें मत सताइए। अब आप इस “माँ की पीड़ा” देख द्रवित हो रहे होंगे..यदि ऐसा है तो आप….यहाँ फिर “गच्चा” खा गए ! क्योंकि माँ को ऐसा अभिनय करने की “खूँखार ट्रेनिंग” दी जा चुकी है । मोहल्ले के लोगों से जब आप इस “ठग स्टेशन” के बारे में पूछेंगे, तो ठगी के रंगमंच के सभी किरदारों के चेहरे से पर्दा ऐसा उठेगा कि आप “गश खाकर” सड़क पर औंधे मुँह गिर पड़ेंगे

लेकिन “बंटी बेटा” अब भी नए शिकार की तलाश में गलियों में घूम ही नहीं रहा बल्कि “ठगी के अध्याय” में दो कदम आगे बढ़ाते हुए आजकल एक महिला को साथ लिए घूम रहा है । इसलिए ताकि, यदि कोई लेनदार टकरा जाए.. तो महिला को ढाल बनाकर उसके सामने खड़ा कर दिया जाए ! मतलब अब तक जो “बंटी” अकेला था..अब उसके साथ “बबली” भी आ गयी है । मतलब योजना वही पुरानी है… पहले दोस्ती, फिर विश्वास, और आखिर में माल पर हाथ साफ !

कॉउन्सिल तक पहुँची शिकायत….

इस ठग के “ठगी अध्याय” की कहानी “वीडियो ऑडियो” समेत “कॉउन्सिल ऑफ आर्किटेक्चर” तक पहुँच चुकी है । इस ठग के माँ की “रुदाली भरी एक्टिंग” का वीडियो देखकर एक बार तो ऐसा लगा कि मशहूर अभिनेत्री “निरूपा राय” भी इस “रुदाली भरी एक्टिंग” के सामने फेल है ।

प्राधिकरण की साख पर सवाल…!

गोरखपुर विकास प्राधिकरण मे भी इस ठग के किस्से मशहूर हैं…. कई लोग ठगे गए हैं..ठगी की कई कहानियाँ प्राधिकरण की गलियों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं….फिर भी प्राधिकरण के कुछ अधिकारी और कर्मचारी इस “बंटी बबली” की जोड़ी को अपने कार्यालय में घंटो तक क्यों बैठाते हैं ? क्या ठगी के इस खेल में इन्हें भी कोई हिस्सा मिलता है ? या वसूली प्रक्रिया अब इन्ही ठगों के जरिये निपटाई जा रही है ?

जन-जागरूकता संदेश “सावधान रहें –

अगर “अभिषेक त्रिपाठी उर्फ निखिल” नाम का यह व्यक्ति खुद को अधिकारी, आर्किटेक्ट या नेता का करीबी बताकर आपका कोई काम कराने को कहे.. या आपकी साइट पर पहुँचकर या नक्शा बनाने के नाम पर आपसे रुपये माँगे, तो इसे पकड़कर इज्जत से बैठाएं और संबंधित विभाग सहित पुलिस को भी सूचना दें । “आर्किटेक्ट की डिग्री” की आड़ में ठगी के इस धंधे को आर्किटेक्टों को नियंत्रित करने वाली संस्था COA के सामने रखा जा चुका है…साथ ही “व्यावसायिक कदाचार” के इस प्रकरण में “विधिक एंगल” की तलाश भी की जा रही है । इसलिए यदि आप मे से भी कोई इस “बंटी बबली जोड़ी” की ठगी का शिकार बन चुका है, तो “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के ईमेल systemkasach01@gmail. com पर लिखकर हमें बताएं !

By systemkasach

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का खुद का चेहरा कितना विद्रूप और घिनौना है..ये आप इस पेज पर देख और समझ सकते हैं । एक ऐसा पेज, जो समाज को आईना दिखाने वाले "लोकतंत्र के चौथे स्तंभ" को ही आइना दिखाता है । दूसरों की फर्जी ख़बर छापने वाले यहाँ खुद ख़बर बन जाते हैं ।

Related Post