मुर्गों की “शहादत” और पत्रकारों की “बदहवासी” ! शहीद हुए मुर्गों का “चुड़ैलिया अटैक” शुरू !

गोरखपुर : अगर धमकी न मिलती तो आज इस विषय पर फिर खबर नहीं लिखनी पड़ती ! पत्रकारिता की गलियों से आज एक सनसनीभरी ख़बर हवा में तैरती हुई फिर से आई है कि कि आगामी प्रेस क्लब चुनाव के मद्देनजर दी गयी बीते हुए कल की पार्टी में शहीद हुए मुर्गों और अंडों की आत्मा “बेकरार भूत” बनकर जनपद की सड़कों पर “गुलाटियां” मार रही हैं । कारण यह कि उनकी शहादत की कीमत उनके आकाओं तक अभी नही पहुँची है । मुर्ग और शुतुरमुर्ग सब पेट रूपी “कब्रगाह” में कल रात ही दफन हो चुके हैं लेकिन कब्रगाह के कसाइयों तक मुर्ग और शुतुरमुर्ग के शहादत की कीमत न पहुँचने से काफी “गहमागहमी” का माहौल है और “मुर्ग आत्माएँ” बदला लेने को बेताब हैं ! मतलब, दावत के बाद माल सप्लायरों की खुन्नस पेमेंट न होने को लेकर सार्वजनिक होने लगी थी !

दूसरी तरफ कल के प्रेस क्लब चुनावी पार्टी की फोटो जब ख़बर बनकर छपी तो पत्रकारिता का भूत कुछ लोगों के सिर पर बाकायदा “धम्म” से चढ़ बैठा । रात में “मुर्गाहारी साधना” करके बेहोश पड़ गए पत्रकारिता के एक बलवंत राय (उर्फ़ घायल के अमरीश पुरी की लोकल कॉपी) को जब दोपहर में अपना दिमाग वापस मिला…तो खबर में अपनी “खानपान यात्रा” की तस्वीरें उन्हें दिख गईं । तस्वीरें दिखते ही उनके तोते, मुर्गे, बतख़… सब उड़ गए ! जो नशा रात भर दिमाग में ड्रम बजा रहा था, वो ख़बर देखते ही उतरकर सन्न हो गया । और फिर साहब, अपने कुछ ‘निर्देशक रिफ्यूजी मित्रों’ के बहकावे में आकर हमें फोन बजा बैठे

आवाज सुनकर लगा जैसे कोई “स्वर कोकिला” बोल रही हो लेकिन शब्द ऐसे निकलते हुए लड़खड़ा रहे थे… जैसे कल रात की “ढकचमार” प्रतियोगिता’ का कोई निर्विवाद विजेता रहा हों ! “सुरा” की गोद में मदहोश हुए, पेटकार साहब ने हमारी खबर पर अपनी गरमागरम नाराज़गी उड़ेलते हुए हमे धमकाया भी है…आप भी सुन लीजिए !

धमकी सुनकर हम तो भय से इतने काँप गए हैं कि कलम हाथ से गिर गई है… कंपकंपी अभी भी 4जी स्पीड में चल रही है… और हनुमान चालीसा तो कम से कम 108 बार अपडेट कर चुका हूँ ! डर लाज़िमी है भाई… अब धमकी देने वाला कोई साधारण मनुष्य तो है नहीं ! नाम है “आकर्षित शनि” ! मतलब शनिदेव की पूरी स्पॉन्सरशिप प्राप्त कर चुके हैं महानुभाव ! प्रोफाइल पर 90 FM का लोगो…. लेकिन चेहरे पर हमेशा 12 बजा रहता हैं ! पत्रकार साहब ने मोटरसाइकिल पर बैठकर ऐसी फोटो ली है जैसे कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही हो…और हेलमेट ? वो तो इनके हिसाब से “तौहीन-ए-पत्रकारिता” है । पत्रकार वही, जो हेलमेट नही लगाएंगे और पूरा गाँव शहर घूम आएंगे ! बाद में प्रशासन के साथ बैठकर सड़क पर सुरक्षा सप्ताह भी मनाएंगे…. और सड़क दुघर्टनाओं को रोकने के लिए मोमबत्ती लेकर कैंडल मार्च भी चलाएंगे ।

खैर शनिच्चर महाराज…अगली बार याद रखिएगा कि चोरी के साथ सीना–जोरी सिर्फ रियल लाइफ में नहीं, बल्कि रील लाइफ में भी बुरी लगती है । अपनी दाल रोटी कमाइए और सुकून से अपना जीवन काटिये…..हमसे “सात कोस” की दूरी सदैव बनाकर रखिये…. क्योंकि आप सिर्फ नाम के “शनिच्चर” हैं… और हम, “आप जैसों की “खुशहाली” के ! एक बार आपकी कुंडली में बैठ गए तो फिर हम खुद चाह कर भी… निकल नही पाएंगे । वैसे जब आप फोन कर रहे थे…. तब आपके वातावरण से मेरे नथुनों तक “दरगाही पत्रकारों” की बदबू पहुँच रही थी । ऐसा लगा जैसे आपके आस पास ही बैठे थे “ससुरे” ! जरा सम्भलकर… पत्रकार साहब ! कहीं ऐसा न हो कि इस बार ये “दरगाही पत्रकार” आपका कंधा इस्तेमाल कर लें…और आपका “चैन सुकून” सब एक झटके में छिन जाए !

By systemkasach

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का खुद का चेहरा कितना विद्रूप और घिनौना है..ये आप इस पेज पर देख और समझ सकते हैं । एक ऐसा पेज, जो समाज को आईना दिखाने वाले "लोकतंत्र के चौथे स्तंभ" को ही आइना दिखाता है । दूसरों की फर्जी ख़बर छापने वाले यहाँ खुद ख़बर बन जाते हैं ।

Related Post

One thought on “मुर्गों की “शहादत” और पत्रकारों की “बदहवासी” ! शहीद हुए मुर्गों का “चुड़ैलिया अटैक” शुरू !”
  1. खबर जो भी हो उससे मतलब नहीं है लेकिन शब्दों का चयन और वाक्यों में सटीक स्थान पर उसका प्रयोग वाकई में शानदार और सराहनीय है …
    जबरदस्त और बेहतरीन कलमकार को बधाई … शुभकामनाएं …💐

Comments are closed.