भारत एक ऐसा देश है जहाँ लॉजिक से किसी को मतलब नही है..यहाँ सबको सिर्फ मैजिक चाहिए.. और शायद इसीलिए… यहाँ “साइंटिस्ट” से ज्यादा “बाबा” लोग फेमस हैं ।
कहतें हैं कि यदि गिद्ध आपका “लीडर” बन जाये तो “मुर्दा” खाना आपका “मुकद्दर” बन जाता है । महानायक धर्मेंद्र के सुरक्षित अस्पताल से वापिस घर पहुंच जाने के बाद से ही दुनिया की कई नामचीन हस्तियाँ भारत के टीवी चैनलों की तारीफ में क़सीदे पढ़ रहे हैं ! इन “चुहार चैनलों” ने महज 4 घंटों के भीतर ही महानायक धर्मेंद्र के “परलोक गमन” और फिर सुरक्षित घर वापसी के “अभूतपूर्व लैंडिंग पैकेज” पर काम करना शुरू कर दिया था ! मतलब कल तक जिनकी “श्रद्धांजलि” का सीधा प्रसारण हो रहा था..उन्हें अब यमराज ने “बैक टू पवेलियन” कर दिया हैं ।
भारतीय मीडिया की “शंखटपोर पत्रकारिता” को लेकर जहाँ एक तरफ अभिनेता “धर्मेंद्र” ने आईना दिखाया है.. तो दूसरी तरफ “सनी देओल” ने मीडिया को “माँ बहन” तक सुना दिया है । “जनता जनार्दन” की नाराजगी तो इस कदर है कि जनता ने तो आजतक की एंकर “अंजना ओम कश्यप” की फोटो पर माला चढ़ाकर बकायदे उनको “श्रद्धांजलि” भी दे डाली है । आज मुझे समझ मे आया कि, तेजस्वी यादव ने मीडिया के “सूत्र” को “मूत्र” क्यों कहा था ! परिस्थितियाँ बता रही हैं कि “भारतीय मीडिया” अब “भस्मासुर पत्रकारिता” के युग में प्रवेश कर चुका है । आज यहाँ हर “ब्रेकिंग न्यूज़” अपनी ही “राख’ में नहा रही है।
भारतीय मीडिया का हाल देखकर “बौराये सांड” पर बैठे “यमराज” भी कल “कंफ्यूज” हो गए थे… और “चित्रगुप्त” जी पर तो इतना भारी दबाव आन पड़ा था कि उन्हें फिर से अपना “दस्तावेज” तक खंगालना पड़ गया । हद तो तब हो गई जब यूपी का “सूचना तंत्र” भी मीडिया की “गिरहकट्टई” का शिकार हो गया… और सीएम के ट्विटर हैंडल से भी महानायक धर्मेंद्र को “श्रद्धांजलि” दे दी गयी ।
सोशल मीडिया पर वायरल देखें कुछ मजेदार मिम्स !
अब जरा गोरखपुर “प्रेस क्लब” की बात करें !
“काबिल ए तारीफ” होने के लिए…”वाकिफ़ ए तकलीफ” होना पड़ता है …लेकिन दुर्भाग्य से भारत के लोकतंत्र का “फोर्थ क्लास स्तंभ” इसे भूल चुका है ! “प्रेस क्लब” गोरखपुर के चुनाव को लेकर सरगर्मियाँ तेजी से चल रही हैं । हालात देखकर ऐसा लगता है जैसे यहाँ “चुनाव” नहीं, बल्कि “श्राद्ध” का मौसम चल रहा है । नए सदस्य बनने के लिए आवेदन आमंत्रित किये गए हैं । प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक लगभग 6 सौ आवेदन फॉर्म बंट चुके हैं जबकि बायलॉज के अनुसार मात्र 10 फीसदी लोगों को ही सदस्यता मिलनी है । एक अनुमान के मुताबिक वर्तमान समय मे लगभग “7 सौ” लोग प्रेस क्लब के सदस्य हैं…और प्राप्त जानकारी के अनुसार इनमे से लगभग अस्सी नब्बे लोग “गोलोकवासी” हो चुके हैं । लेकिन इन “मृत पत्रकारों” की आत्माएं अभी तक “प्रेस क्लब” बिल्डिंग के इर्द गिर्द भटक रही हैं और “प्रेस क्लब” चुनाव में बाकायदा समय से वोट डालने पहुँच भी जाती हैं ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रेस क्लब गोरखपुर के लगभग “सात सौ” सदस्यों में से लगभग दो ढाई सौ तो फ़िलहाल “गुमशुदा” चल रहे हैं…..लेकिन हैरत यह है कि, उनके नाम के वोट भी अब तक हर चुनाव में पड़ते रहे हैं । स्थितियाँ देखकर यह कहा जा सकता है कि…दुनिया का विनाश कैसे होगा.. ये तो नही पता…लेकिन इतना तो तय है कि देश के विनाश का कारण यहाँ के “भ्रष्टाचारी” और “दलाल मीडिया” ही बनेंगे ।
मल मल धोए शरीर…
धुले न मन का मैल…
नहाए गंगा गोमती….
रहे “बैल के बैल” !

