आज राष्ट्रीय “प्रेस दिवस” है । आप भी मनाइए, क्योंकि राष्ट्र तो है, और दिवस भी… लेकिन जिसके लिए “राष्ट्र” में यह “दिवस” मनाया जा रहा है..वो “प्रेस’ अब कहीं नही है । ये ठीक वैसा ही है जैसे बगैर “गांधी के गांधी जयंती” और बग़ैर “शिक्षक” के “शिक्षक दिवस” ! “प्रेस दिवस” पर अब अपने “ज़ी न्यूज़” के आज का नया तमाशा ही देख लीजिए !

कभी भी ‘फट’ सकते हैं 200 आतंकी डॉक्टर…. पूरे देश में हड़कंप !…अब ये 200 आतंकी डॉक्टर अभी तक फटे हैं या नहीं, ये तो पता नहीं… लेकिन इतना ज़रूर है कि इस ख़बर के सामने आने के बाद “इजराइल के मोसाद” से लेकर “अमेरिका के CIA” तक की ‘फट’ कर “हाथ” में आ गई है । अब इस “फटने” की स्थिति मे इजरायल और अमेरिका ने “ज़ी न्यूज़” वालों को अपने “दूतावासों” के बाहर तैनात करने का “विशेष आग्रह” भारत सरकार से किया है.. और साथ ही “फट जाने” की स्थिति में त्वरित तौर पर “सिलाई” करने के लिए “उषा सिलाई मशीन” की एक बड़ी खेप का आर्डर भी एडवांस में दे दिया है ।
ये है, हमारे प्रेस वालों का “बानर नृत्य”! जिसे कुछ दिनों पहले तक सिर्फ हम एन्जॉय कर रहे थे…लेकिन आज पाकिस्तान से लेकर भूटान और नेपाल तक एन्जॉय किया जा रहा है । यह तो सर्वविदित है कि वर्तमान समय मे “प्रेस” पूरी तरह से मर चुका है । यदि मरा न होता तो, दिल्ली ब्लास्ट पर हाय तौबा मचाने वाला मीडिया आपको यह भी बताता कि, मध्यप्रदेश के भोपाल में “तब्लीगी जमात” का एक भव्य कार्यक्रम चल रहा है, जो कुल चार दिनों तक चलेगा । इस कार्यक्रम में 20 देशों से 12 लाख लोग आए हैं और यह कार्यक्रम 600 एकड़ के दायरे में हो रहा है । इतनी बड़ी “जुटान” है लेकिन इसपर इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया से लेकर नेता, अभिनेता, बुद्धिजीवी, लेखक सभी खामोश हैं । आजतक कभी यह चर्चा ही नहीं हुई कि भारत मे पकड़े गए दहशतगर्दों से “तब्लीगी जमात” के कनेक्शन थे भी या नहीं ? हैरत ही नही हुई कि पढ़े लिखे नौजवान इंजीनियर, डॉक्टर आखिर आतंकी क्यों बन रहे हैं ? यह स्थिति तब है जब “तब्लीगी जमात” को दुनिया के कई देशों ने बैन किया हुआ है जैसे ईरान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान,सऊदी अरब और रसिया !

हैरत की बात यह भी है कि, “तब्लीगी जमात” की स्थापना भारत में ही हुई और जानकार बताते हैं कि इसकी स्थापना “आरएसएस” को “काउंटर” करने के लिए ही हुई । सन 1925 मे “आरएसएस” की स्थापना नागपुर मे हुई तो “तब्लीगी जमात” की स्थापना 1926 में दिल्ली मे हुई ! “आरएसएस” के “सौ साल” पूरे हो रहे हैं तो, “तब्लीगी जमात” के 99 साल ! आज तक कभी यह चर्चा ही नही हुई कि, “तब्लीगी जमात” दुनिया के 155 देशों में काम करता है… तो आखिर वो काम क्या है ? संघ का छोटा सा कार्यक्रम हो जाये तो चर्चाओं का बाजार गर्म हो जाता है, और भोपाल में 600 एकड़ में 20 देशों से 12 लाख लोग “तब्लीगी जमात” के कार्यक्रम में “शिरकत” कर रहे हैं….. और कहीं कोई “सुगबुगाहट” तक नही है । इतने बड़े कार्यक्रम में मीडिया का कहाँ “देहांत” हो गया है ? क्यों कोई वीडियो ऑडियो जनता तक नही पहुँच रही ? क्यों “किसी भाषण का अंश “आवाम” को सुनाई नही दे रहा ? किसी “तक़रीर” की आवाजें क्यों नही सुनाई दे रही ? “तब्लीगी जमात” कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नही करता ? आख़िर होता क्या है “तब्लीगी जमात” के कार्यक्रम में ?
सन 2009 में रूस के “सुप्रीम कोर्ट” ने तो “तब्लीगी जमात” को आतंकी समूहों की “लिस्ट” में डाल दिया था । 2021 में एक इस्लामिक देश होने के बावजूद खुद “सऊदी अरब” ने “तब्लीगी जमात” के बारे में कहा था कि “तब्लीगी जमात, (डेंजर टू सोसाइटी है) और (वन ऑफ द गेट ऑफ़ टेरररिज्म) है ! क्या भारत सरकार को उन इस्लामिक देशों ईरान, सऊदी,उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान से यह नही पूछना चाहिए कि ऐसा क्या कर दिया “तब्लीगी जमात” ने… जो उसे बैन कर दिया ? यदि कुछ गड़बड़ करने के सबूत हैं, तो फिर भारत ने “तब्लीगी जमात” को बैन क्यों नही किया ? और यदि सबूत नही हैं, तो फिर भारत के एक संगठन को इन देशों ने आखिर बैन क्यों किया ?
“तब्लीगी जमात” के समर्थक ज्यादातर पाकिस्तान, मलेशिया इंडोनेशिया से हैं । भारत के अंदर भी बहुत से नेता, अभिनेता, पत्रकार, कलमकार, लेखक, बुद्धिजीवी “तब्लीगी जमात” से जुड़े हुए हैं । यहाँ तक कि एक “भूतपूर्व कैबिनेट मंत्री” “तब्लीगी जमात” के “लीगल एडवाइजर” तक रह चुके हैं । तमाम दहशतगर्दों, आतंकियों, अंडरवर्ल्ड और हार्ड कोर अपराधियों के लिए सबसे घातक व्यवस्था थी “नार्को ब्रेन मैपिंग टेस्ट” ! लेकिन इस व्यवस्था को “सुप्रीम कोर्ट” के सबसे भ्रष्ट माने जाने वाले भूतपूर्व जज “बालकृष्णन” ने ये फैसला देकर खत्म कर दिया कि….. “ब्रेन मैपिंग नार्को टेस्ट” संविधान के “आर्टिकल 20” का उल्लंघन है । ऐसा निर्णय इसलिए दिया गया… क्योंकि वह व्यक्ति खुद ही सर्वाधिक “भ्रष्ट” था और उसे पता था कि इस फैसले से सबसे ज्यादा चांदी “भ्रष्टाचारियों” की हो जाएगी । “अजमल कसाब” को छोड़कर आज तक किसी भी आतंकी का शायद ही “नार्को पॉलीग्राफ टेस्ट” कर उसका सीधा प्रसारण किया गया हो । क्योंकि भ्रष्टाचारियों आतंकियों और दशतगर्दों का “नार्को टेस्ट” करने से पहले आपको उन्ही दहशतगर्दों और भ्रष्टाचारियों से इजाजत लेनी पड़ती है ! यही तो खूबसूरती है हमारे “लोकतंत्र” की ! जिसकी “फर्जी ठसक” में हम जिये जा रहे हैं… और जिसका कोई “वजूद” ही नही बचा…. उसके लिए “प्रेस दिवस” मना रहे हैं
