गोरखपुर : गोरखपुर में नापाक आपराधिक साजिशों का नया खतरा फिर से पनप रहा है …फर्जी केस फैक्ट्री फिर सक्रिय हो चुका है । अफसोस कि, पुलिस जानती है इस “हनी-ट्रैप गैंग’ का “काला सच”…. लेकिन बोलती नहीं ! यहाँ कलम सो चुकी है और गिरोह जाग गए हैं….नतीजा गोरखपुर फिर खतरे में है ! फर्जी “मुकदमों के सौदागर” इस शहर की जमीन से उठते हुए वो नरपिशाच हैं, जो सीधे साधे लोगों के भविष्य की बलि ले रहे हैं । न्याय नहीं, व्यापार हो रहा है ! गोरखपुर में ‘फर्जी केस इंडस्ट्री’ का उदय एकबार फिर हो रहा है । विकास सिन्हा गैंग गिरा…तो अब एक और बड़ा गैंग तैयार है ! चौकन्ने रहिए क्योंकि गोरखपुर का नया हनीट्रैप नेटवर्क मजबूत सबूतों की रोशनी में “आइडेंटिफाई” हो चुका है । झूठे मुकदमों का साम्राज्य इस कदर फैल रहा है कि गोरखपुर की सड़कों पर फिर “डर” लौट आया है क्योंकि इस बार इस गिरोह में कथित पत्रकार और कॉन्ट्रैक्टर के शामिल होने की भी मजबूत संभावनायें दिखाई दे रही हैं । पुलिस की नींद और गिरोह की चाल में आखिर कितने बेगुनाहों कि बली और ?
सिस्टम सो रहा है, गैंग बढ़ रहा है…इसलिए गोरखपुर को फिर से सुरक्षा की जरूरत है। सच को दबाकर साजिश को पालना गोरखपुर के लिए साबित हो सकता है एक खतरनाक खेल…लेकिन फिर भी फर्जी इज़्ज़त, और “असली बर्बादी” की दास्तान समेट रहा है गोरखपुर में “पनपता जंजाल” !
झूठे मुकदमों की फैक्ट्री….
जी हाँ, आज के समय में विरोधियों को पस्त करने का यह सबसे आसान और खतरनाक हथियार बन चुका है । और सबसे दुखद सच्चाई यह है कि इस खेल के असली कर्ताधर्ता अक्सर वे होते हैं जिनसे इंसाफ की उम्मीद की जाती है । सब जानते हैं कि झूठे मुकदमे दर्ज कराने की इस प्रवृत्ति को रोकने के बजाय कई जगह पुलिस की ढीला रवैया इसे और ताकत देता है । फ़िलहाल गोरखपुर इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है । करीब दो साल पहले शहर ने जाना कि यहाँ बलात्कार के फर्जी मुकदमे लिखाने वाला एक पूरा गैंग सक्रिय था । हमने इस पर बहुत पहले ही काम किया था, सच उजागर भी किया था — लेकिन जब तक पुलिस की नींद खुली, तब तक कई बेगुनाह और सीधे साधे लोग बर्बाद हो चुके थे । विकास सिन्हा और उसका गिरोह तो जेल चला गया और शहर ने राहत की सांस ली…लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई ।
अब “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के हाथ जो इनपुट लगे हैं, वह उससे भी ज्यादा भयावह हैं । गोरखपुर में एक और बड़ा नेटवर्क सक्रिय है….एक “संगठित हनी-ट्रैप” और “फर्जी केस रैकेट” ! और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ “कथित पत्रकार” और “कॉन्ट्रैक्टर” भी इसमें शामिल बताए जा रहे हैं । किसी ने प्रॉपर्टी की लड़ाई में अपने ही भाई को इस गैंग के जाल में फेंक दिया है तो किसी ने निजी दुश्मनी निपटाने के लिए अपने विरोधी को…को इस सूची में डलवा दिया है । इस सूची में ऐसे नाम भी हैं, जिनकी कहानियाँ अभी तक सामने तक नहीं आ सकी हैं । खोजबीन में पता चला है कि यह गैंग पैसों के बल पर ऐसी “धंधेबाज औरतों” को हायर करता है, जो गोरखपुर,मध्यप्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा से लेकर फरीदाबाद तक फैली हुई हैं । और पैसे मिलते ही ऑनलाइन, फोन और “सोशल मीडिया” के जरिये अपना “काम” शुरू कर देती हैं ।
सबसे दुखद सच्चाई ?
पुलिस एक नजर में पहचान लेती है कि कौन सी शिकायत सही है और कौन सी फर्जी ! लेकिन अफसोस, कि गोरखपुर पुलिस को इस गिरोह की भनक भी नौ महीने पहले ही लग चुकी है । लेकिन वही पुरानी कहानी …लीपापोती, ढिलाई, और तब तक चुप्पी का चोला तब तक….जब तक बवाल की आँच अपने “यूनिफॉर्म” तक न पहुँच जाए ।
गैंग का सच जानती है पुलिस..लेकिन बोलती नहीं !
कुछ लोग सोचेंगे कि मैं डराने की कोशिश कर रहा हूँ । लेकिन नहीं.. ! मसला बेहद गंभीर है ….और बहुत से पीड़ित लोग आज भी उम्मीद से आसमान की तरफ देखते हैं…कि कोई तो उन्हें सुनेगा । कोई तो “सच” को सामने लाएगा । भले ये काम हमारा है…..भले पार्ट टाइम ही सही.. गंदगी का खुद हिस्सा बनने से तो बेहतर है…. कि सच को सामने लाकर रख दें ! और समाज के भीतर छिपे इन राक्षसों का चेहरा “बेनकाब” कर दें । सुकून इस बात का है कि हम अपना काम कर रहे हैं…ईमानदारी से, जिम्मेदारी से, और पूरी हिम्मत के साथ । तो आप भी अपनी आँखें खुली रखें । सच की तलाश जारी रखें…. और सिस्टम वेबसाइट मीडिया के इस लिंक को जॉइन कर लें..क्योंकि “सच और पिक्चर” दोनो अभी बाकी है …और मक्कारी की अंधेरी रात पर “सच का सूरज” उग चुका है !

