गोरखपुर : “दरगाह” तथा “धार्मिक आस्था” की आड़ में गैरकानूनी गतिविधियों का ताना-बाना बुनने वाला “इकरार अहमद” गुट की “हनीट्रैप साजिश” की जाँच अब एक नए मोड़ पर पहुँचती दिख रही है । जांच से जुड़े शुरुआती संकेत बताते हैं कि राजधानी दिल्ली के “कालिंदी कुंज थाने” में दी गयी एक शिकायत पर लगी “पुलिस की मुहर” और “नंबरिंग” संदिग्ध है । जैसे उसकी “कूट–रचना” कर किसी प्रमाणिक दस्तावेज का रूप दे दिया गया हो । संबंधित थाना इस पूरे मामले की तथ्यात्मक स्थिति आने वाले समय मे लिखित रूप में स्पष्ट कर सकता है… और यही सबसे “बड़ा मोड़” साबित होगा । सबसे गंभीर सवाल यह है कि एक दरगाह के मुतवल्ली की जिम्मेदारी संभालने का दावा करने वाला “असामाजिक तत्व” आखिर इतनी हिम्मत कैसे जुटा सका कि उसने अपने नेटवर्क के माध्यम से “पुलिसिया दस्तावेजों” की भी नकल तैयार कर ली ? और वह “संदिग्ध तहरीर” ठीक उसी दिन उस व्यक्ति के हाथ कैसे पहुँच गई….जब कि वह दूसरे राज्य के थाने में इतनी दूर दी गयी थी ?
जाँच के दायरे में आया यह “तथ्य” भी ध्यान देने योग्य है कि यह तहरीर दो दिन बाद “इकरार अहमद” के एक गुर्गे “नदीम” के जरिये “सिस्टम का सच” के सम्पादक को धमकी के साथ भेज दी गई । तो क्या यह पूरी कवायद एक “स्वतंत्र मीडिया प्लेटफॉर्म” को “डराने” और “ब्लैकमेल” करने के उद्देश्य से की गई थी ? क्या लक्ष्य यह था कि “धार्मिकता” का चोला ओढ़े दरगाह की आड़ में चल रहे “अवैध और राष्ट्रविरोधी नेटवर्क” की “खुलती परतों” को रोका जा सके ? और क्या इस साजिश में केवल कुछ स्थानीय तत्व ही शामिल हैं, या फिर उनके इर्द–गिर्द घूमने वाला एक छोटा “मीडिया–तंत्र” और उसके सहयोगी भी भूमिका निभा रहे हैं ?
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वह “व्हाट्सएप्प चैट” भी है…जिसमें “इकरार” का गुर्गा “नदीम” पहले तो इस तहरीर और धमकी को भेजने की बात स्वीकार करता है, और जाँच के दौरान पूछताछ में मामला उजागर होने पर वही “नदीम” इसे नकारने लग जाता हैं कि…. उसने किसी “जमशेद” को कोइ “धमकी” या “तहरीर” नही भेजी । इस कारण इस पूरे प्रकरण में “दोगलेपन” की परतें और भी मोटी होती दिखाई देने लगी हैं ।
सुनें “नदीम” की स्वीकारोक्ति
इसी दौरान जाँच के क्रम में “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के हाथ कुछ और ऐसे “साक्ष्य” भी लगे हैं… जो यह बताते हैं कि लखनऊ से लेकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक एक बड़ा “अवैध फंडिंग नेटवर्क” खड़ा करने की कोशिशें हो रही है । “इकरार अहमद” के खास गुर्गे “नदीम” ने ही “GFA” के नाम से एक विशेष “व्हाट्सएप्प मैसेजिंग” ग्रुप तैयार कर प्रदेश भर से ऐसे सैकड़ों “धनकुबेरों” को उस ग्रुप में जोड़ा है….जो “सम्प्रदाय विशेष” से ताल्लुक रखते हैं । प्राप्त जानकारी के अनुसार इस “व्हाट्सएप्प ग्रुप” के सदस्यों के जरिये प्रत्येक सदस्य से एक लाख रुपये “डोनेट” कराने का लक्ष्य रखते हुए “नदीम” द्वारा 500 करोड़ रुपये की “गुप्त फंडिंग” जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । अब तक इस “व्हाट्सएप्प ग्रुप” से लगभग साढ़े तीन सौ लोग जुड़े चुके हैं । सवाल यह नहीं है कि “धन” किस नाम पर और किस “प्रयोजन” के लिए जुटाया जा रहा है बल्कि..सवाल यह है कि यदि इसका उद्देश्य परोपकारी है…तो फिर यह सब गुप्त और “अवैध रास्तों” से क्यों किया जा रहा है ? ठीक, बिल्कुल वैसे ही जैसे पिछले पाँच सालों से “दरगाह” का मुतवल्ली बनकर “इकरार अहमद” “दरगाह” की आड़ में कर रहा है ।

दरगाह से इसी नेटवर्क से जुड़े “हनीट्रैप मॉड्यूल ” की गूंज धीरे धीरे गोरखपुर शहर से भी निकल कर बाहर आ रही है । प्राप्त जानकारी के अनुसार गोरखपुर शहर में तमाम “अवैध निर्माणों” का ठेकेदार “कादिर” का अपने भाई “कबीर” से प्रॉपर्टी का विवाद चल रहा था । बताया जाता है कि इस विवाद को हल कराने के नाम पर “कादिर” एक “दरगाही पत्रकार” में सम्पर्क में आया और उस “दरगाही पत्रकार” ने “कादिर’ की मुलाकात “इकरार अहमद” से कराई । फिर अचानक एक “पेशेवर महिला” को हायर करते हुए इस “प्रॉपर्टी विवाद” को नया “एंगल” दे दिया गया । पहले “छेड़खानी और ब्लैकमेलिंग” का मुकदमा थाना गोरखनाथ में दर्ज कराने की “पुरजोर कोशिश” की गयी….लेकिन जब वहाँ सफलता नही मिली तो यही मामला थाना “चिलुआताल” में मुकदमा संख्या 742/2024 के रूप में दर्ज करा दिया गया । अब “कबीर” के बेटे बताए जा रहे दो लोगों पर “छेड़खानी और रंगदारी” का मुकदमा दर्ज है… और इस मुकदमे के जरिये “प्रॉपर्टी विवाद” को हल कराने का “भरसक” प्रयास किया जा रहा है ।
यदि गंभीरता से जाँच कर दी जाए तो ऐसे मामलों की “फेरहिस्त” बड़ी लंबी निकलेगी । साजिशों और घटियापने की यह “गंगोत्री” उसी “सर्किल क्षेत्र” से होकर निकलती है जो…”राजाओँ के घाट” से लेकर “तिवारी बाबा” के थाने तक बहती हुई…. “कोतवाल साहब” के थाने से गुजरती हुई “त्रिवेणी रूपी संगम” में “तब्दील” हो जाती है । यह सारी “हैरतअंगेज घटनाएं” संकेत दे रही हैं कि…यह केवल “अवैध फंडिंग” या एकाध घटना का मसला नहीं बल्कि एक “संगठित गिरोह” का स्वरूप ले चुका एक “भयावह तंत्र” है…..जो “हनीट्रैप” से लेकर “फर्जी केस तक”, हर एक “हथकंडे” को “वसूली’ और दबाव बनाने के “औजार” की तरह “दरगाह” की आड़ में इस्तेमाल कर रहा है…और पेट की खातिर “चमगादड़” बने कुछ “मुस्टंडे” इस “अय्याश मुतवल्ली” के “झंडाबरदार” बने हुए हैं । “इबादतगाह” की “सरपरस्ती” में धार्मिकता की आड़ लेकर फल–फूल रहा यह नेटवर्क… केवल एक क्षेत्र विशेष या संस्था की समस्या नहीं है बल्कि यह पूरी “व्यवस्था” को चुनौती देने वाला “तंत्र है” । और ऐसे तंत्रों को उजागर करना किसी भी ‘लोकतांत्रिक समाज” और “मीडिया’ की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है
इस पूरे ताने बाने से जुड़ी सनसनीखेज वीडियो खबर देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं !

