बीते दिनों एक तथाकथित “पत्रकारिता के महापंडित” ने मुझसे कहा कि “गोरखपुर की पत्रकारिता में “मक्कारी की मिठास” घोलिये और फिर मजा देखिए –हर कोना आपके साथ खड़ा दिखाई देगा ! मैंने हँसकर कहा—कभी “सच” के साथ आजतक कईयों को खड़े देखा है, क्या आपने ? बस यही बात उनके “अहंकार” के “सेप्टिक टैंक” में “मिर्च” बनकर गिर गई । नतीजा, कि थोड़ा बहुत सच बोलने-लिखने वालो के खिलाफ मीटिंगें, दावतें और “साजिशों” का दौर शुरू हो गया ।

अब “विकास प्राधिकरण” को ही ले लीजिए ! “गोरखपुर विकास प्राधिकरण” के पवित्र गलियारों में इन दिनों एक अनोखा “सन्नाटा” पसरा है—क्योंकि ‘बंटी–बबली’ नामक महान ठेकेदार-जोड़ी…जो “मानचित्र स्वीकृति” के नाम पर चमत्कारी कारनामे दिखाया करती थी…अचानक से “अलोप” हो गई है । “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” द्वारा “कौंसिल ऑफ आर्किटेक्ट” में बंटी का किरदार निभाने वाले “अभिषेक त्रिपाठी” (आर्किटेक्ट) के “प्रोफेशनल मिसकंडक्ट” की जाँच कराई गयी है… और अब सबूतों के आधार पर “बंटी” का लाइसेंस “निरस्त” होने की कगार पर है । बताया जा रहा हैं कि “सिस्टम”, “वेबसाइट” और “मीडिया” जैसे —”तीन दावानल” के “श्राप” से बचने के लिए फिलहाल यह जोड़ी काफी दिनों से “भूमिगत साधना” में लगी है । दूसरी तरफ खबर है कि बंटी उर्फ़ “महाआर्किटेक्ट” ने अपने हुनर का ऐसा जाल बोया था कि “गोरखपुर विकास प्राधिकरण” की एक महिला अधिकारी भी बंटी को विकास प्राधिकरण का “अप्रूव्ड आर्किटेक्ट” बताती फिर रहीं थीं । विकास प्राधिकरण के कुछ भ्रष्ट कर्मियों के इतने “प्रगाढ़” सम्बन्ध इस बंटी उर्फ अभिषेक से थे….की इस “ठग चालीसा” का शिकार अब तक कई लोग हो चुके थे । “ठगी का आतंक” बढ़ चुका था और पाप का “घड़ा” भर चुका था… इसलिए बंटी की मुलाकात “समग्र राहुकाल” में “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” से हो गयी । जाँच का क्रम ऐसा चला कि दूसरों के “घरों का मानचित्र” पास कराने का दावा करने वाले इस “चमत्कारी पुरुष” का खुद का घर बिना “मानचित्र” के खड़ा मिला ! अब विकास प्राधिकरण ने भी बंटी उर्फ “आर्किटेक्ट महोदय” के घर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है ।

इधर, स्थानीय अख़बार “दैनिक जागरण” भी अचानक “कोमा” से बाहर निकल आया और “राजघाट” थाने की “छत्रछाया” में पनप रहे “वसूली उद्योग” पर एक “झपकी-जागृति” ले ली है ।

बाज़ार में चर्चा है कि “थाना” इन दिनों एक दो-टके के ऐसे “स्थानीय गुंडे” के इशारे पर “भरतनाट्यम” कर रहा है जिसके “खानदान” से लेकर “थूकदान” और “पीकदान” से लेकर रोशनदान सब पर “अपराध की कलंक” के छीटे मौजूद हैं । यह “खबीस” “खलीलाबाद” से चलकर “खलल” डालने गोरखपुर पहुँचा… और “दरगाह” की आड़ में “खतरनाक” “खता” करता चला गया ! स्थानीय जानकार बताते हैं कि इसी “नामाकूल गुंडे” के “तख्तानशीं” होने के बाद थाना “वसूली का अड्डा” बन गया । हालात ऐसे हैं कि, आने वाले समय में “वर्दी पर मलाई” पोतने की एवज में इस “गुंडे” का हुक्म बजा लाने वाले कई नाम एक “इंटरस्टेट जाँच” के दौरान उजागर हो सकते हैं !

उधर, ठाकुर जी को समझाया गया था कि जिला महिला चिकित्सालय के “महाभौकाली” और “बज्र भ्रष्टाचारी” “बड़े भैया” के चक्कर में मत पड़ो… लेकिन “ठाकुर जी” की खोपड़ी पर “डी जे नाईट” का “शैतानी साया” नाच रहा था । जाँच से बचाने के नाम पर “बड़े भैया” ने “ठाकुर जी” के लाखों रुपये भी डकार लिए और जाँच में प्रथम दृष्टया दोषी साबित हुए “ठाकुर जी” अपनी कुर्सी से हटा भी दिए गए । जाँच से बचाने के नाम पर “बड़े भैया” ने “ठाकुर जी” के लाखों रुपये ऐसे निगल लिए जैसे बच्चों की टॉफी हो, और ऊपर से कुर्सी भी “कुर्बान” हो गयी । जब पैसे वापसी का मसला गरम हुआ तो फिर वही भ्रष्टाचार के आरोप में भ्रष्टाचारी साबित हो चुके…महाभौंकालीनंद फिर से हाज़िर हो गए ! “चलिए साहब, आपको फिर से “तख़्तानशीं” करवाते हैं”….कहकर “ठाकुर जी” को लखनऊ की फिर से दो-चार “परिक्रमा” करवा दी । बमुश्किल “डेढ़ फुट” का यह “महाभौकाली नंद” अब “ठाकुर जी” को नवंबर 2025 का “हवा–हवाई” भरोसा पिला रहा था…पर “सिस्टम’ का “तमाचा” देखिए कि “महा भौकाली भैया” का मुँह “बानर सरीखा” लाल हो गया ! पुराने साहब के रिटायर होते ही कुर्सी किसी जूनियर को दे दी गयी ! और क्यों ? क्योंकि इस पूरे “भ्रष्टाचार–कांड” की फाइलें नीचे से लेकर ऊपर तक, और केंद्र से लेकर “उच्चतम सिंहासन” तक पहुँच चुकी हैं । अब सवाल यह है कि—कि अपने “टुच्चे टाइप” के “घुमंतू लौंडों” के बल पर उछलने वाला…..जब यह डेढ़ फुट का “स्वघोषित” “भौंकली–सम्राट” खुद की खाल को “जाँच की आँच” से नही बचा पा रहा है….तो “ठाकुर जी” को क्या “घंटा” बचाएगा ? “बेहयाओं” के लिए एक कहावत है कि..”लाजू मरै और ढिठू जियै” ! सो “भौकाली भैया” के “बानर” यह “रयूमर” फैला रहे हैं कि सेटिंग के बल पर “भौकाली भैया पियक्कड़” ने कुर्सी पर किसी और को “काबिज” करा दिया है । गजब का “दोगलापन” है !

