गोरखपुर के थाना कोतवाली का “क्राइम ब्रांच संस्करण” !

गोरखपुर : यहाँ गुंडे खुद को क्राइम ब्रांच बताकर घर में घुसते हैं और थाने के साहब घुटनों पर बैठकर सलामी ठोकते हैं । जी हां, ऐसा लगता है कि शहर में एक नया ट्रेंड शुरू हो चुका है.. “पुलिसिया स्टाइल में गुंडागर्दी”। बताया जा रहा है कि कोतवाली थानाक्षेत्र में “क्राइम ब्रांच” बनकर घुस आए दंबगों ने घर में धावा बोला….मारपीट की और जबरन गाड़ी में उठाकर ले जाने की हिमाकत भी की ! जब आस पड़ोस के लोग जुटे तो “क्राइम ब्रांच” का भेष धारण किये “गुंडे” धीरे से पतली गली पकड़ कर निकल भी लिए । “सीसीटीवी” सब देख रहा है, मगर थाना “कोतवाली” के साहब, शायद सेटिंग का ‘सेट-टॉप बॉक्स’ देख रहे हैं । पीड़ित भी अभी तक सबूत लेकर शायद अधिकारियों तक नहीं पहुँच पाया है…इसलिए खबर लिखे जाने तक इस मामले में कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं होने की जानकारी मिली है ।

जिन्हें यह भ्रम है कि इस थानाक्षेत्र में “कानून व्यवस्था” का राज चलता है…वे थोड़ी देर के लिए अपना “भ्रम’ तौलिये से पोंछ लें ! क्योंकि यहाँ तो “कानून व्यवस्था का नाड़ा” “अखाड़े” की रेत में कब का घसीटा जा चुका है और थाना एक “बाहुबली भूमाफिया’ के सामने “नब्बे डिग्री” पर “परफेक्ट योगासन” कर रहा है । अंदर की खबर ये है कि इस थाने में “सबूतों” की नहीं, “सेटिंग” की अहमियत है । यहाँ सच्चाई को “इंतज़ार कक्ष” में बिठा दिया जाता है…और झूठे मुकदमे “वीआईपी गेट” से “तड़ाक तड़ाक” अंदर दाखिल हो जाते हैं ।  मौका मिले तो “फरियादी” बनकर आप भी थाने में घूम आइए ! आप देखेंगे कि पत्रकारिता के भेष में बैथे” डफर”…वहाँ बाकायदा “डेली शिफ्ट” में ड्यूटी बजाता मिलेगा । बस एक “चैम्बर” की कमी है….यदि साहब चाहें तो यह कमी भी “डफर जान” के लिए पूरी कर दें ! आख़िर इस “हद दर्जे” तक गिरे हुए लोग जल्दी मिलते ही कहाँ हैं ? ऐसे लोगों का तो काम ही है “फर्जी मुकदमे” पैदा करना…”सच्चे मुकदमों” को गर्भ में ही मरवा देना…और थाने के “वर्दीधारियों” को ऐसा “घनचक्कर” बना देना कि.. असल पीड़ित अपने होश में ही बेहोश हो जाए ।

बताया जाता है कि यहाँ के साहब कानपुर से आए हैं और अपने साथ ‘कानपुर मॉडल’ का पूरा “टूलकिट” भी साथ ले आए हैं । लगता है कोतवाली में दूसरा “कानपुर पार्ट-2” रिलीज़ होने वाला है….और “कानपुर का अखिलेश दुबे” – “सीज़न 2” जल्द ही प्रसारित होने वाला है । यही हाल रहा तो यह भी संभव है कि गोरखपुर को फिर से एक नए “जगत नारायण” से “रूबरू” होना पड़े !

खैर छोड़िए….अब बात करते हैं पत्रकारिता के ‘डफर-संस्करण’ की…

पत्रकारिता जगत में जबरदस्त डिमांड है कि “डफर” जैसी पत्रकारिता करने के लिए कौन-कौन सी खास योग्यताएँ चाहिए होती हैं ? इस भारी “डिमांड” को देखते हुए मैंने आखिरकार अपनी शोध पूरी कर ली है । यदि आप भी इस महान कला के “वारिस” बनना चाहते हैं…तो नीचे दिए गए “वीडियो” को पूरी “आत्मीयता” के साथ देखें… और वीडियो में बताए गए “नुस्खों” का पालन उसी “कट्टरता” से करें…जिस “कट्टरता” से लोग “फर्जी मुकदमे’ लिखवाते हैं ।

By systemkasach

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का खुद का चेहरा कितना विद्रूप और घिनौना है..ये आप इस पेज पर देख और समझ सकते हैं । एक ऐसा पेज, जो समाज को आईना दिखाने वाले "लोकतंत्र के चौथे स्तंभ" को ही आइना दिखाता है । दूसरों की फर्जी ख़बर छापने वाले यहाँ खुद ख़बर बन जाते हैं ।

Related Post