“सिस्टम की सर्जरी जरूरी” :- रवि किशन ने संसद में फर्जी मुकदमों के सौदागरों को ललकारा !

अपने चुटीले अंदाज में सवालों को संसद में उठाने पर अक्सर गोरखपुर के सांसद रवि किशन को सोशल मीडिया ट्रोलर्स अपने निशाने पर लेते रहे हैं …लेकिन यह तथ्य स्वयं उन ट्रोलर्स को भी स्वीकार करना चाहिए कि…रविकिशन ने हाल ही में संसद में जो विषय उठाया है….वह वर्तमान समय का अत्यंत गंभीर, ज्वलंत और राष्ट्रीय स्तर पर चिंतनीय मसला है । यह वही मुद्दा है, जिस पर खुलकर बोलने की हिम्मत आज अधिकांश जनप्रतिनिधि नहीं दिखा पाते… जबकि इस पीड़ा को देश के करोड़ों नागरिक झेल रहे हैं । सांसद रवि किशन ने सदन में फर्जी मुकदमे लिखवाने वाले गिरोहों, झूठी रिपोर्ट तैयार करने वाले भ्रष्ट तत्वों, तथा उन पुलिसकर्मियों पर कड़ा प्रहार किया है जो फर्जी चार्जशीट तैयार कर किसी निर्दोष को अपराधी सिद्ध करने का प्रयास करते हैं । उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस पूरे तंत्र के विरुद्ध कड़े, प्रभावी और दंडात्मक कानून का बनाया जाना अब समय की माँग है। यह मात्र अपराध नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे पर सीधा हमला है ।

विडंबना यह है कि कानून की किताब में ऐसे कृत्यों को रोकने के लिए “प्रावधान” अवश्य मौजूद हैं, परंतु ये प्रावधान जितने कठोर “लोकसेवकों” के लिए हैं, उतने ही कमजोर और निष्प्रभावी निजी व्यक्तियों के लिए हो जाते हैं । इस कारण झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों के मनोबल पर तब तक कोई ठोस कानूनी भय उत्पन्न नहीं होता…जब तक कोई पीड़ित अपने धैर्य, संसाधन और मानसिक संतुलन की परवाह किए बगैर उनके पीछे बुरी तरह पड़ न जाए ।

सच्चाई यह है कि आज थानों में फर्जी मुकदमों और फर्जी चार्जशीटों का “खुला बाजार” निर्ममता से संचालित हो रहा है । हर प्रकार के काम की एक निश्चित दर तय है… बोली लगाइये, और किसी निर्दोष की ज़िंदगी को अपराध के अंधे कुएँ में धकेल दीजिए । भ्रष्टाचार का यह तंत्र इतना निर्लज्ज हो चुका है कि कानून की टेंट-टपड़ी को फर्जी मुकदमों की बल्लियों पर टांगकर, भारतीय न्याय-व्यवस्था की प्रतिष्ठा को मक्कारी के आसमान में उछाल देना इनके लिए सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है । फर्जी मुकदमों का यह दंश केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं है बल्कि सत्ता परिवर्तन के बाद इस फर्जीवाड़े की चपेट से कई माननीयों और जनप्रतिनिधियों को भी गुजरना पड़ा है । संभवतः इसी व्यक्तिगत और सामाजिक अनुभव के कारण सांसद रवि किशन इस त्रासदी की गंभीरता को अधिक व्यवस्थित ढंग से समझते हैं ।

लेकिन सबसे विडंबनापूर्ण तथ्य तो यह है कि स्वयं उनका संसदीय क्षेत्र गोरखपुर ही… आज फर्जी मुकदमों के इस राष्ट्रीय रोग का सबसे गंभीर केंद्र बन चुका है । साक्ष्यों के आधार पर कलेक्ट किये गए एक “डेटा बेस” रिपोर्ट स्पष्ट तौर पर यह बताती है कि गोरखपुर के “तिवारीपुर” “कोतवाली” और “राजघाट” क्षेत्र में फर्जी मुकदमों के जरिये उगाही, प्रताड़ना और अवैध वसूली का सबसे संगठित तंत्र विकसित हो चुका है और यहाँ सच्ची घटनाओं पर फर्जी रिपोर्ट लगाने की “विध्वंसक परम्परा’ पिछले कई सालों से चली आ रही है । यह “विध्वंसक तंत्र” हर वर्ष कई परिवारों की जिंदगी तहस-नहस कर रहा है । यदि अधिकारी चाहें, तो इस रिपोर्ट को “ऑन रिकॉर्ड” प्राप्त करने के लिए “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के ऑफिशियल ईमेल आई डी पर सम्पर्क कर सकते हैं ।

अवैध ठेकेदारों, पेशेवर महिलाओं, कथित पत्रकारों और कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों का यह मजबूत गठजोड़ आज कानून-व्यवस्था के लिए एक सीधी चुनौती बन चुका है । यह क्षेत्र एक ऐसे “नेक्सस” के रूप में उभर रहा है….जो किसी भी दिन “प्रशासन” “न्याय-तंत्र” और “शासन” की प्रतिष्ठा को गंभीर रूप से शर्मसार कर सकता है । यदि इस नेक्सस की कोई बड़ी घटना कल सामने आ जाए, तो उस पर किसी भी प्रकार का आश्चर्य करने की आवश्यकता नहीं होगी । बल्कि आश्चर्य तो इस बात पर है कि इतने स्पष्ट संकेतों के बावजूद अब तक इसे रोकने के लिए कोई निर्णायक कदम क्यों नहीं उठाया गया ?

By systemkasach

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