गाज़ीपुर :खाकी का नया फ़लसफ़ा, जब इंसाफ़ “थार” की सीट पर बैठा दिखा !

गाजीपुर : “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को यह खबर यूपी के गाजीपुर जिले से भेजी गई है । खबर यह है, कि गाज़ीपुर में खाकी ने इस बार कानून की किताब नहीं,बल्कि “लक्ज़री थार” की चाबी खोल दी है । मिज़ाज ऐसा था कि वीडियो तड़ाक से वायरल हुआ और वायरल ऐसा हुआ कि अगले रोज अख़बारों की “सुर्ख़ियाँ” भी बन गया ।

वाक़या यूँ है, कि जिस अभियुक्त के मुक़दमे में “दरोगा साहब” को जाँच अधिकारी (विवेचक) की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी…उसी अभियुक्त के संगी साथियों के साथ दरोगा जी थार ख़रीदने निकल पड़े । बात सिर्फ़ साथ चलने की होती तो शायद बात भी गले उतर जाती, मगर यहाँ तो दरोगा जी ने अपने सिपाही समेत बावर्दी थार पर सवारी भी फ़रमाई,और हूटर बजाकर एलान कर दिया कि …हम हैं “क़ानून”…और “क़ानून” आज “थार” में है !

अब सवाल यह है कि जिस अफ़सर के क़लम को मुक़दमे की तक़दीर लिखनी है…और अगर वही कलम अभियुक्त का “राइडिंग पार्टनर” बन जाए..तो इंसाफ़ की “मैय्यत” गाजीपुर के किस गली से निकलेगी, यह बताने की जरूरत नहीं है ?

यह कोई शायराना कल्पना नहीं, बल्कि वायरल वीडियो की हक़ीक़त है…और इस हक़ीक़त को वादी मुक़दमा ने अधिकारियों को भेजे गए अपने पत्र में बग़ैर किसी “लाग-लपेट” दर्ज कर दिया है । दरोगा जी के वायरल वीडियो के कारण गाज़ीपुर की खाकी ने अपनी अनोखी स्टाइलिंग से सोशल मीडिया के “टॉप ट्रेंडिंग” की कुर्सी पर अपना “कब्ज़ा” जमा रखा है ।

बहरहाल, आज गाज़ीपुर की “गली-नाले” से लेकर ऑनलाइन मंचों तक यही चर्चा है कि “जब दरोगा जी खुद “अभियुक्त” के साथ थार में घूम रहे हों, तो मुकदमे और न्याय के बीच की दूरी घटेगी या बढ़ती चली जायेगी ?”

By systemkasach

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