“करोड़ों डकारने वाले सुरक्षित, 12 लाख का कर्ज़ और एक पूरा परिवार दहशत में”

देश का हज़ारों करोड़ डकारने वाले “सम्मानित भगोड़े” और 12 लाख के कर्ज़ में कुचले जा रहे मध्यम वर्ग परिवारों के बीच… बैंकिंग सिस्टम का ऐसा “नंगा सच” कभी कभी सामने दिखाई दे जाता है…कि उसे देखकर मन “आक्रोश” से भर जाता है । आज कई दिनों से शहर का एक मध्यम वर्गीय परिवार अपनी पीड़ा लेकर “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” का दरवाज़ा खटखटा रहा था । न कोई “रसूख” न “ऊँची पहुँच”न ही अंग्रेज़ी में “काग़ज़ात’ समझने की महारत ! बस टूटी-फूटी आर्थिक हालत और कचहरी के चक्कर काटती ज़िंदगी ! परिवार का कसूर सिर्फ़ इतना था कि उसने ईमानदारी से व्यापार शुरू करने के लिए बैंक से लोन ले लिया….और विडंबना देखिए कि…जो देश नीरव मोदी, विजय माल्या जैसे हज़ारों करोड़ डकारकर फरार ‘साहबों’ को अब तक छू नहीं पाया, उसी देश में एक किसान, एक छोटा व्यापारी या एक मध्यम वर्गीय परिवार अगर मजबूरी में EMI न भर पाए तो बैंक का सिस्टम अचानक से लाठी, धमकी और गुंडागर्दी में बदल जाता है ।

12 लाख का लोन और बैंक की ‘बहादुरी’

इस परिवार के मुखिया ने शहर के गीता वाटिका स्थित केनरा बैंक से GST के आधार पर 12 लाख रुपये का बिज़नेस लोन लिया।
जब तक दुकान चली, किश्तें जाती रहीं । लेकिन व्यापार बैठ गया दुकान बंद हो गयी और आमदनी शून्य हो गई । और अब यहीं से शुरू होती है “बैंकिंग संवेदनहीनता” की वह कहानी…जिसे पढ़कर सवाल उठता है कि क्या RBI की गाइडलाइन्स सिर्फ़ काग़ज़ों के लिए होती हैं ? केनरा बैंक के कर्मचारी और मैनेजर पर यह आरोप है कि बैंक कर्मियों ने पीड़ित परिवार को अनपढ़ समझकर वसूली के लिए कानून नहीं, गुंडागर्दी का रास्ता चुना । “घर के अंदर जबरन घुसना” “महिलाओं से बदतमीज़ी” “पड़ोसियों के सामने बेइज्जती” “बार-बार फोन पर धमकियाँ”…और यह सब एक बार नहीं, कई बार ! हालात ऐसे बने कि परिवार का मुखिया डर के मारे कुछ दिनों तक अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो गया । घर मे घुसे दो लोगों को तस्वीर नीचे दी गई है जो अपने आप को बैंक कर्मी बताकर घर मे तब घुसे..जब महिला अकेली थी ।

परिवार की महिला अब पुलिस की शरण में..

आज यह परिवार थाना तिवारीपुर से सबूतों के साथ न्याय की गुहार लगा रहा है । “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” ने जब मामले की पड़ताल की…तो जो सामने आया वह चौंकाने वाला था ! इस मामले में बैंक ने वसूली को “कानूनी प्रक्रिया” नहीं बल्कि बाहुबल का विषय बना डाला । जब केनरा बैंक असुरन शाखा के कथित बैंक मैनेजर से संपर्क किया गया, तो साहब जवाब देने से बचते नज़र आए और दुबारा फोन उठाने में उन्हें “नैहर का सोहर’ याद आ गया । जब दूसरे नंबर पर बात हुई तो बैंक कर्मी ने क्या कहा..वो आप भी सुनिए ।

अब ज़रा कानून समझ लीजिए, मैनेजर साहब ! क्योंकि इस परिवार के मुखिया को दिया गया लोन…बिना किसी बंधक,बिना गारंटर केवल GST के आधार पर दिया गया था । और अब दुकान भी बंद….यानी यह एक Unsecured Loan है । मतलब, कानून कहता है कि आप इस मामले में SARFAESI Act के तहत कोई कार्यवाही नही कर सकते । क्योंकि SARFAESI सिर्फ़ सिक्योर्ड लोन (घर, ज़मीन, मशीनरी) पर लागू होता है । इसलिए आपका बैंक इस मामले में… न संपत्ति ज़ब्त कर सकता है और न घर कुर्क कर सकता है ।

बैंक क्या कर सकता है ? (लीगल राइट्स)

इस मामले में आपका बैंक केवल “सिविल रिकवरी” केस कर सकता है..मतलब “सिविल कोर्ट” में दावा कर सकता है । कोर्ट के सामने लोन लेने वाले की “आर्थिक स्थिति” का आकलन होगा और किस्तों में भुगतान या समझौता की स्थिति बनेगी । One Time Settlement (OTS) भी हो सकता है लेकिन याद रखिए कि..इसमें आप लोन लेने वाले को जेल नहीं भेज सकते मैनेजर साहब !

आपका बैंक क्या नहीं कर सकता ?

आप और आपका बैंक घर पर चढ़कर धमकी…महिलाओं को डराना..पड़ोसियों को परेशान करना… पुलिस लेकर आना…मानसिक उत्पीड़न इत्यादि नहीं कर सकता…यह याद रखिये ! क्योंकि लोन न चुकाना “अपराध” तब तक नहीं है.. जब तक लोन लेने के लिए इस्तेमाल किये गए दस्तावेज फर्जी, न साबित हों जाएँ या फिर आपराधिक मंशा साबित न हो जाए ।

सिस्टम वेबसाइट मीडिया” का स्पष्ट संदेश !

यह मामला सिर्फ़ एक परिवार का नहीं है बल्कि यह उस “बैंकिंग सिस्टम” का आईना है….जो बड़े अपराधियों के सामने “बौना” और गरीब मजबूर के सामने “पहलवान” बन जाता है । इसलिए “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” इस परिवार को निःशुल्क “विधिक सहायता” दिलाने में पूरी ताक़त से खड़ा है । तो अब आइए मैनेजर साहब,…क्योंकि अब “रिकवरी” डंडे से नहीं बल्कि “दस्तावेज़” से होगी । और वह भी तब…जब न्यायालय आदेश देगा । इसके अलावा भी अभी बहुत से “कानूनी विकल्प” मौजूद हैं साहब..इसलिए अब “डर” तो होगा लेकिन “एकतरफ़ा” नहीं ।

By systemkasach

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