प्रेस काउंसिल के नोटिस ने खोल दी “शाहपुर पुलिस” की पोल…हाईकोर्ट की “दस्तक” भी पड़ी भारी…नेताजी “शीतनिद्रा” में !

गोरखपुर : जब थाना, पत्रकारी भांड और नेता जी…तीनों एक ही फाइल में फिट हो जाएँ तो वही होता है जो थाना शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष “नीरज राय” और उपनिरीक्षक “अभिषेक” ने कर दिखाया था । इन दोनों वर्दीधारियों ने यह साबित कर दिया कि अगर नीयत गंदी हो तो कानून भी “कैलकुलेटर” बन जाता है । जोड़-तोड़, गुणा-भाग और मनचाही धाराएँ की माला जपने की आदत तो इस कदर नसों में घुल चुकी है कि बस…सामने दलाल तंत्र और ऊपर नेताजी का वरदहस्त होना चाहिए…बाकी फिर तो बस हम ही हम हैं । “ताकत के भरम” में चूर रहने वाले लोगों को यह समझना चाहिए कि इस धरती पर ईश्वर सिर्फ एक है….बाकी “सिकंदर” महान भी झेलम में फँस कर…और “जूलियस सीजर” भी अपनों के ही चक्रव्यूह में उलझकर सिमट गया था । इसलिए भले किसी को अपने ताकतवर होने का भरम हो..फिर भी यकीन रखिये की आप परमेश्वर नहीं हैं । निशाना बनाया गया “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के संपादक को..और कहानी गढ़ी गई इतनी सफ़ाई से.. कि खुद पुलिस रिकॉर्ड भी शरमा जाए । लेकिन दिक्कत ये हुई कि “यह तिलिस्म काग़ज़ों में था”…और सच “रिकॉर्डिंग्स और रिकार्ड्स में ! अब वही “तिलिस्म” “प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया” के सामने नंगा खड़ा है…और नोटिस की भाषा में जवाब माँग रहा है ।

क्या था मामला…?

मामला अवैध निर्माण को संरक्षण देने के उद्देश्य से लिखे गए फर्जी मुकदमे का था । इस मामले में वर्दीधारियों के साथ-साथ पर्दे के पीछे “सूत्रधार” बने कथित नेता जी को भी कानूनी प्रेमपत्र मिल चुका है और मामला हाईकोर्ट के दरवाज़े पर भी हाज़िर है । प्रकरण बिल्कुल साफ था…क्योंकि शहर में अवैध निर्माणों की शिकायत कोई नई बात नहीं है । जमशेद, “जाँच की आँच” संस्था के ज़रिये पहले भी कई अवैध इमारतों की नींव हिला चुके हैं । इसी क्रम में जब पादरी बाज़ार का अवैध निर्माण सामने आया तो GDA ने निरीक्षण किया..उसे अवैध घोषित किया और थाना शाहपुर को निर्माण रोकने का आदेश दिया । थाना शाहपुर ने आदेश माना और लगभग एक महीने तक काम रुका रहा और फिर अचानक निर्माण फिर से उठने लगा…मानो कानून छुट्टी पर चला गया हो और संरक्षण ड्यूटी पर आ गया हो ।

शिकायतकर्ता से अपराधी बनाने की “थानेदार” स्कीम !

जमशेद ने दोबारा GDA का दरवाज़ा खटखटाया । और यहीं से अवैध निर्माणकर्ता ने पुलिस को अपना औज़ार बनाया । पादरी बाज़ार चौकी में एक तहरीर आई और उपनिरीक्षक अभिषेक ने
उसे “सबूत” मान लिया । इस संबंध में जमशेद के पहले से लंबित प्रार्थना पत्रों पर..झूठी रिपोर्ट….फर्जी निस्तारण…मीठे आश्वासन की घुट्टी पिलाई गयी और पीछे से पूरी साज़िश की पटकथा लिखते हुए जमशेद के खिलाफ ही अगले दिन थाना शाहपुर में फर्जी मुकदमा लिख दिया गया था । जिस अवैध निर्माण को GDA ने रोकने का आदेश दिया था…उसी को बचाने के लिए शिकायतकर्ता पर ही ब्लैकमेलिंग का केस !

यही मामला जब हाईकोर्ट पहुँचा…तो जिस अवैध निर्माण को थानेदार साहब बचा रहे थे….वही सील हो गया । इस दौरान थानेदार साहब मजिस्ट्रेट और GDA के सामने सिर्फ “तमाशबीन” ही नहीं बने रहे…बल्कि खुद ही फ़ोर्स के साथ उन्हें वहाँ “मुस्तैद” रहकर सारी कार्यवाही सम्पूर्ण करानी पड़ी । यानी कि जिसे बचाने के लिए कानून को तोड़ा मरोड़ा गया…उसी को सील होते देखने के लिए वर्दी को खुद “खड़ा” होना पड़ा । इससे बड़ी बेइज़्ज़ती तो शायद कानून की दुनिया में नहीं होती ।

अंगूठाछाप की तहरीर और कंप्यूटर की भाषा !

मुकदमा जिस महिला के नाम से लिखा गया था वह अंगूठाछाप थी । लेकिन दो पन्ने की तहरीर, ऐसी टेक्निकल, कानूनी और हाई-लेवल शब्दों से सजी हुई थी… कि मानो महिला नहीं बल्कि थाने का कंप्यूटर बोल रहा हो । मगर अब पर्दा उठ चुका है और लड़ाई अब भी हाई कोर्ट के दरवाजे पर है । बहुत हद तक उम्मीद है कि इस मामले में अगला “मोहब्बत भरा पैगाम” जल्द ही जिम्मेदारों को मिलेगा । आज लगभग नौ महीनों से अवैध निर्माण “सील” है । पड़ोसी से जबरन दुश्मनी कराई गई…लेकिन अब पड़ोसी ने “नेता जी से नाता तोड़ा” “साज़िशकर्ताओं के नाम भी बताए” और “फर्जी मुकदमा” वापस लेने का शपथ पत्र भी विवेचक को सौंप दिया । निर्माण तो कानूनी प्रक्रिया के बाद “सीलमुक्त” हो ही जाएगा..क्योंकि हम भी यही चाहते हैं । लेकिन “झूठा सबूत”और मुकदमा गढ़ने वालों के खिलाफ…झूठी रिपोर्ट लगाने वालों के खिलाफ…वर्दी की दलाली करने वालों के खिलाफ और सिविल मामले को “आपराधिक रंग” देने वालों के खिलाफ यह लड़ाई अभी चलेगी । क्योंकि जब वर्दी सवालों के घेरे में आती है,तो जवाब सिर्फ कानून को ही देना होता है…और वो भी तारीख़ के साथ !

By systemkasach

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