उत्तर प्रदेश : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में दशकों से जड़ जमाए बैठे “भ्रष्टाचार” की नस पर सीधा प्रहार किया है । अंग्रेजी हुकूमत के दौर से चली आ रही जिस एस्टीमेट व्यवस्था के सहारे लाइनमैन से लेकर JE, SDO और ऊपर तक पूरा सिस्टम काले धन की धारा में बह रहा था…उस व्यवस्था को योगी सरकार ने जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है । ऐसा लगता है जैसे “एस्टीमेट” के नाम पर हो रही “खुली डकैती” को बंद करने के लिए योगी ने “भ्रष्टाचार के तार” को ही काट दिया हैं । अब तक हालात यह थे, कि जैसे ही कोई आम नागरिक “बिजली कनेक्शन” के लिए आवेदन करता था…भ्रष्ट कर्मचारी उसे “एस्टीमेट” नाम का ऐसा डरावना कागज थमा देते थे…जिसमें लाखों रुपये का खर्च दिखाया जाता था । खंभा, तार, ट्रांसफार्मर सब कुछ आवेदक के सिर मढ़ दिया जाता था । अगर घूस दे दिया तो…एस्टीमेट अपने आप “मैनेज” हो जाता था…और अगर नहीं दिया तो खर्च आसमान छूने लगता था । यह खुली लूट सालों से “बदस्तूर” चल रही थी।
योगी सरकार ने इसे रोकने के लिए पहले सस्पेंशन, विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई का सहारा लिया…लेकिन भ्रष्ट कर्मियों की चमड़ी इतनी मोटी हो चुकी थी कि वे इन कार्यवाहियों से भी नहीं डर रहे थे । शासन तक सैकड़ों शिकायतें पहुंचीं, मगर एस्टीमेट के नाम पर वसूली का खेल बदस्तूर जारी रहा । आखिरकार योगी सरकार ने आधे-अधूरे इलाज की जगह सीधा ऑपरेशन करने की ठानी…और अब नई व्यवस्था के तहत 300 मीटर तक की दूरी के लिए बिजली कनेक्शन की अधिकतम फीस मात्र साढ़े सात हजार रुपये तय कर दी गई । ना मनमाना एस्टीमेट, ना लाखों की डिमांड, और ना खंभे-तार के नाम पर उगाही ! इस फैसले से पूरे प्रदेश में सिर्फ बिजली कनेक्शन के नाम पर मची लूट पर बड़ा ब्रेक ही नहीं लगेगा…बल्कि सबसे अहम बात यह कि अब भ्रष्टाचार की जड़ यानी “एस्टीमेट सिस्टम” की जड़ में हीं “मठ्ठा” डाल दिया गया है ।
यह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि उस सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है, जिसने आम आदमी को सालों तक अंधेरे में रखकर अपनी जेबें भरीं । विभाग “कंगाल” होता रहा और विभाग में काम करने वाले कर्मचारी “मालामाल” ! योगी सरकार का यह कदम साफ संदेश देता है कि अब यूपी में बिजली विभाग में नियम के नाम पर रिश्वत नहीं चलेगी, और न ही सिस्टम को बंधक बनाकर आम जनता को लूटा जाएगा ।

