“गंवार” महेंद्र गौड़
गोरखपुर : मरीज और उनके परिजनों को पीटने वाले गार्ड साहब कल खुद ही पिटा गए । गार्ड साहब “ओह माय गॉड”, “ओह माय गॉड” चिल्लाते रहे और लोग उन्हें पीटते रहे । पीटने वाले कोई बाहरी नहीं बल्कि अपने ही थे । भारतीय सेना में “नायक” के पद से रिटायर्ड होने वाले गार्ड साहब को “खलनायक” बना दिया गया । अर्जुन पुत्र “अभिमन्यु” की तरह घेरकर “कौरवों” ने जमकर पिटाई की । बताया गया कि 5000 रुपए और स्कूटी की चाबी छीन ली गई । मरीज से ज्यादा परिजनों का “इलाज” करने के मामले में बदनाम यह संस्थान अब अपने सुरक्षा गार्ड भी इलाज करने लगे हैं । इलाज की पराकाष्ठा ऐसी, कि कब किसका इलाज कर दें कुछ पता नहीं चलता ।

परिजनों के साथ अब गार्डों का भी तन्मयता से इलाज किया जाना यह साबित करता है कि यहां “पूरी निष्ठा और बिना भेदभाव” के कार्य किया जाता है । आपको बता दें कि x नायक साहब कि मनोरोग विभाग में रात्रि ड्यूटी थी । सुबह 6:00 तक उन्हें रिलीज नहीं किया गया तो उन्होंने इसकी शिकायत सीनियर सुपरवाइजर से की । लेकिन नियम की बात करने वाले नायक को मनोरोगी मानकर इलाज शुरू कर दिया गया । ख़ैर यह तो होना ही था ।
सार:-
“बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहाँ से होय”…

