कोतवाली पुलिस की पटकथा फेल, कोर्ट से बैरंग लौटा झूठ का आरोप पत्र !

गोरखपुर : गोरखपुर की कोतवाली पुलिस का खेल कोर्ट की चौखट पर आकर औंधे मुँह गिर पड़ा है । न्यायालय से घालमेल वाले एक मुकदमे का आरोप पत्र का “बैरंग” लौट जाने की घटना ने सिर्फ कोतवाली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल ही खड़े नहीं किए, बल्कि पूरे षड्यंत्र की कलई भी खोल दी । ऑफ द रिकॉर्ड हुई इस घटना की कचहरी परिसर से लेकर जिला अस्पताल तक चर्चा है, साथ ही उस खबर की चर्चा भी जोरों पर है….जिस पर न सिर्फ जनता ने भरोसा जताया बल्कि शासन की अंतिम जाँच ने भी अपनी “मुहर” लगा दी । जैसे ही शासन की रिपोर्ट आई, वैसे ही भ्रष्टाचारियों की आग में शुद्ध घी पड़ गया । क्योंकि आख़िरी जाँच में जो “बचे-खुचे पाक-साफ” होने का नाटक कर रहे थे, वे भी दोषी करार दे दिए गए । इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा झटका लगा उस शख़्स को, जिसे लोग अब “भ्रष्टाचार का जनक” कहने लगे हैं । महिला जिला चिकित्सालय गोरखपुर का लैब टेक्नीशियन बृजेन्द्र बीर सिंह ! हाँ, वही बृजेन्द्र, जिसने अपने भ्रष्टाचार के उजागर होने से बौखलाकर खुद को “कट्टर ईमानदार” बताते हुए, जमीन के नीचे “अधोलोक” तक धँस चुकी अपनी साख की दुहाई देकर यह फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था । मुकदमा लिखवाते समय बृजेन्द्र बीर सिंह ने बड़ी शान से दावा किया था कि वह पुलिस को ब्लैकमेलिंग के ऑडियो-वीडियो और सबूत देगा । लेकिन ऐन मौके पर महाशय पलटी मार गए । वजह साफ थी क्योंकि तहरीर झूठी थी, कहानी मनगढ़ंत थी और सबूत नाम की कोई चीज़ इनके पास थी ही नहीं । इन्हें भ्रम था कि जैसे कुछ लोग इनकी “जूठन” पर पलकर खुद को धन्य समझते रहे हैं… वैसे ही इनके मुकदमे की घुड़की से “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” भी इनकी “जूठन” को प्रसाद मान लेगा और इनके मूत्र में अपनी पत्रकारिता की “मशाल” को विसर्जित कर देगा । लेकिन इस बार खेल उल्टा पड़ गया और बिना पेन ड्राइव के पहुँचे आरोप पत्र को कोर्ट ने “बैरंग ” लौटा दिया ।

क्या था पेन ड्राइव का “सबूत”?

जब मक्कारी का तमगा धारण किए भ्रष्टाचारियों के हाथ कुछ नहीं लगा, तो सभी ने मिलकर अपने चैम्बर में एक बैठक की । इस बैठक में जिला अस्पताल के डॉक्टर शहनवाज को भी बुलाया गया । बैठक के दौरान आपसी आरोप-प्रत्यारोप, चीख-पुकार और बचाव का नाटक चला । उसी बंद कमरे की बतकही की रिकॉर्डिंग को “महत्वपूर्ण सबूत” बताकर मुकदमा दर्ज करा दिया गया और हैरानी की बात यह कि कोतवाली पुलिस ने भी भ्रष्टाचारियों के बीच बंद कमरे में हुई आपसी तकरार को “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के खिलाफ सबूत मान लिया । यानी चोर-चोर मौसेरे भाई, और पुलिस बनी गवाह !

शासन की रिपोर्ट ने खोली कोतवाली पुलिस की मंशा..

इस फर्जी मुकदमे में डॉक्टर शहनवाज को ही मास्टरमाइंड बताने का सारा ड्रामा रचा गया था । इस ड्रामा स्क्रिप्ट के लेखक पूर्व SIC राजेन्द्र ठाकुर पर पहले ही आकाशीय बिजली गिर चुकी है । बीबी सिंह और ठाकुर साहब ने कहानी गढ़ी कि अस्पताल संचालक ताहिर डॉक्टर शहनवाज के लिए काम करता है और “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” शहनवाज तथा ताहिर के इशारे पर जिला अस्पताल को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है ।स्थितियाँ बता रही हैं कि इस स्क्रिप्टेड ड्रामे को असली दिखाने के लिए बीबी सिंह के इशारे पर ही ठाकुर साहब द्वारा डी एम और थानाध्यक्ष कोतवाली को डॉ शाहनवाज के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए ऐसे पत्र लिखे गए जो आजतक अपने गन्तव्य तक नही पहुँचे । जाँच रिपोर्ट बताती है कि असल मे यह पत्र कहीं भेजा ही नही गया था, बस साजिश के तहत इस पत्र की एंट्री रजिस्टर में दर्ज कराकर पत्र को गायब कर दिया गया । यहाँ तक कहा गया कि इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉक्टर शहनवाज को वापस लाने के लिए ही “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” अनर्गल खबर के जरिये दबाव बना रहा है, ताकि मरीजों की दलाली फिर से शुरू की जा सके । लेकिन खेल यहीं पर इसीलिए पलट गया क्योंकि कोतवाली पुलिस ने डॉक्टर शहनवाज का नाम ही मुकदमे से बाहर कर दिया । और जिस पेन ड्राइव को आसमान-जमीन हिलाने वाला सबूत बताया जा रहा था, शासन ने उसे सबूत मानने से साफ इंकार कर दिया । नतीजा यह हुआ कि डॉक्टर शहनवाज को क्लीन चिट दे दी गयी । इस पूरे खेल का पर्दाफाश करने वाली रिपोर्ट देखने के लिए नीचे की लाइन पर क्लिक करें ।

शाहनवाज रिपोर्ट जिला अस्पताल pdf

शासन की इस रिपोर्ट के अलावा अभी बहुत से प्रमाण ऐसे हैं जो यह साबित करते हैं कि इस पूरे स्क्रिप्टेड ड्रामे में कोतवाली पुलिस के भी तीन वर्दीधारियों की गहरी साजिश और संलिप्तता थी । लेकिन इस साजिश को अंजाम देने वाले कथित तीन वर्दीधारी यह भूल गए कि आप बहुत कुछ हो सकते हैं लेकिन सबकुछ नहीं ! इसलिए एक बार फिर से कोशिश कीजिए ! अब इस बार ज़रा और मेहनत कीजिए ! फिर से कुछ झूठे सबूत गढ़िए या फिर अपने मर चुके जमीर को जगाइए ! फिर से एक नया आरोप पत्र भेजिए । पर सनद रहे, कि इस बार आरोप पत्र की फ़ाइल में झूठे गढ़े गए साक्ष्य, साजिश, पद का दुरुपयोग और रुपयों की भूख दिखाई न दे । आंखे खोल कर देखिए कि अपनी “फटी हुई इज्जत” का ढोल पीट कर यह फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले वाले संगठित भ्रष्टाचारी लोग….शासन की रिपोर्ट के बाद इस कदर निरीह लग रहे हैं जैसे वेनेजुएला अमेरिका के आतंक की छाया में सूखकर पीला हुआ जा रहा हो । ऐसा न हो कि, अगली बार गढ़े गए साक्ष्यों के आधार पर फिर से आरोप पत्र भेजने वाले, खुद ही आरोपी बना दिये जाएं ।

By systemkasach

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