सीमा आनंद भारत में उन गिनी-चुनी हस्तियों में से हैं जो सेक्स
अंतरंगता (Intimacy) विवाह, सहमति और रिश्तों पर खुलकर सार्वजनिक मंचों पर बात करती हैं । उनका दावा रहा है कि वे समाज में सेक्स को लेकर फैली झिझक और अज्ञानता को तोड़ना चाहती हैं । बतौर लेखक और वक्ता उन्होंने कामसूत्र, तंत्र और प्राचीन भारतीय ग्रंथों के संदर्भ से आधुनिक यौन-जीवन को समझाने की कोशिश की है । इसी कारण कुछ लोग उन्हें “प्राचीन भारतीय यौन ज्ञान की आधुनिक व्याख्याकार” मानते हैं । परंतु जब आत्म-अभिव्यक्ति के नाम पर मर्यादा को रौंदा जाए और ‘आज़ादी’ की आड़ में सस्ती उत्तेजना परोसी जाए, तब चुप रहना सहमति नहीं, कायरता बन जाता है । क्या आधुनिकता का मतलब यही है कि समाज को झकझोरने के बजाय उसे उकसाया जाए ? और क्या बोल्ड होने की शर्त अब मर्यादा छोड़ देना ही रह गया है ? सीमा आनंद द्वारा सेक्स को लेकर किए गए हालिया भीषण प्रचार और सोशल मीडिया पर सक्रिय लॉबी ने इसी सवाल को फिर से खड़ा कर दिया है !

सीमा आनंद की उम्र 63 वर्ष है लेकिन उनके दीवानों की अभी भी कोई कमी नहीं है लेकिन सीमा आनंद से मैं कहना चाहता हूँ कि मैं उन हज़ारों लाखों करोड़ों पुरुषों में से कोई एक बोल रहा हूँ जिन्हें “कामसूत्र” के अनुसार सेक्स करना नहीं आता ! और हमारे पास आपसे क्रैश कोर्स करने की सुविधा भी नहीं है और न ही इतना समय ! तमाम लोगों की पत्नियां बहुत सीधी हैं और उनके पति लोग भी भोले भाले ही हैं दोनों में से कोई भी तेज़ तर्रार होता तो बिखर जाती उनकी गृहस्थियां ! उनके बीच सेक्स पर बातचीत बहुत कम होती हैं लेकिन तब भी वे बच्चे पैदा कर लेते हैं और परमेश्वर की दया से वे ह्रष्ट पुष्ट भी होते हैं ! मुझे तो सीमा आनंद की नीयत पर शक है ! बहुत से पति पत्नियों में लगभग सब कुछ ठीक है लेकिन मुझे लगता है आप स्त्रियों में दबी हुई आग को भड़काना चाहती हैं । लेकिन ये पत्नियां इतनी समझदार हैं कि वे समझती हैं उनके पति के ऑफिस की थकान ! वे पतियों को माफ़ कर देती हैं जिस दिन उनका मूड तो होता है मगर उनके पतियों का नहीं होता ! आप एक सेंसेशन बनना चाहती हैं सीमा आनंद ! आप उन बातों को लेकर मुखर हैं जिन बातों पर हर थोड़े दिनों में कोई भी मुखर हो ही जाता है । इन बातों पर मुखर होना हमेशा से एक धंधा रहा है इससे बहुत कमाई होती है और बरकत में कभी घाटा भी नहीं होता । लेकिन सभ्य समाज ऐसे धंधेबाज़ों से अक्सर अपनी पतंग बचाते रहे हैं । कभी आचार्य रजनीश,कभी फ्रायड, कभी ओशो, कभी सीमा आनंद ने काटनी चाही है सभ्य समाज के इस पतंग को लेकिन सफल नहीं हुए !
तिरेसठ की उम्र में जब इन्द्रियों का निग्रह करके आपको राम की ओर जाना चाहिए तब आप “काम” की ओर जा रही हैं ! ईश्वर करे कि तिरासी बरस की उम्र में भी आप शरीर शरीर और सेक्स सेक्स खेलें ! परंतु तिरेसठ की उम्र में जो तीर्थाटन करना चाहते हैं….कम से कम उनके मन में तो कोई काम्प्लेक्स पैदा न करें ! क्या है सेक्स ? क्या है चुम्बन ? क्या है चाटना चूमना ? क्या है पेनेट्रेशन ? यह काम आपसे बेहतर शहरों में गलियों के “आवारा कुत्ते” और गाँवों में घूम रहे “गुलाबी अंडकोष” वाले “बैल” सिखा देते हैं ।आप इसके अतिरिक्त नया और क्या सिखाएंगी ? कितना अच्छा होता कि आप उनमें से कोई एक होती जो हमें बताती कि इन बातों पर समय खर्च करने के बजाय कुछ भला काम समाज के लिए भी करना चाहिए !

जरा नजरें उठाकर देखिए सीमा आनंद कि नीम के पेड़ के नीचे
टाट की टट्टी के पीछे ,दो छायाएं मिल रही हैं । इन भिखारियों को भी पता है कैसे करते हैं प्यार ! यह कोई “रॉकेट साइंस” नहीं है ! इसे सीखना नहीं पड़ता यह अपने आप आ जाता है । आठवीं कक्षा का बच्चा भी इन सब बातों के बारे में इतना जानता है कि वह बायलोजी के शिक्षक तक को बता सकता है कि हस्तमैथुन कब और कैसे करें…ताकि कमज़ोरी महसूस न हो ! सेक्स एक प्रारम्भिक बिंदु है ! इस बिंदु से शुरू होती है ज़िंदगी की लक़ीर ! बिंदु बनाना तो हमें आता है ! हो सके तो हमें ज़िंदगी की लक़ीर खींचना सिखाइये ! तत्काल प्रसिद्ध कर देने वाली इस सतही दुनिया में आपको आपका यह नाम और आपकी पहचान मुबारक हो । हमें नहीं चाहिए कोई शिक्षक जो सिखाए हमें सेक्स करना । सभ्य समाज ऐसा होता है जहाँ एक बाँझ और एक नपुंसक भी पिछले कई दशकों से विवाह नाम के बंधन में ख़ुशी से रह रहे हैं ! काश किसी कवि से होता तुम्हें प्यार सीमा आनंद ! जो ठुकरा देता तुम्हारा जिस्म और तुम्हारी ख़ुशबू को…और अपनी साँसों में बाँधकर हमेशा के लिए तुम्हारी आँखों से ओझल हो जाता ! तब तुम्हें समझ आता कि जिस्म के सेक्स से ज़्यादा यादों के सेक्स पर टिकी है दुनिया ! मैंने तो पहली बार ही आपका सार्वजनिक तौर पर हजारों के सामने विरोध कर दिया था जब आप हैदराबाद के FICCI FLO इवेंट के लिए नवंबर 2023 में हैदराबाद में थीं । इसलिए मैं जानता हूँ कि मेरे इस पोस्ट को भी कोई न कोई “मरजानी” आप तक अवश्य पहुँचा देगी ।
नोट : यह पोस्ट सेक्स के ख़िलाफ़ नहीं, उसके धंधेकरण के ख़िलाफ़ है ।

