झूठ का “अखाड़ा” बंद : अदालत ने छीन ली फर्जी एफआईआर की “तलवार” !

प्रयागराज : सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला कि झूठे मामलों को गढ़ने वाले वर्दीधारियों और लोकसेवकों को 197 crpc का कोई फायदा नहीं मिलेगा और इलाहाबाद हाईकोर्ट का झूठे मुकदमों को लेकर ताजा फैसला उन लोगों के लिए मातमी एलान है जो अब तक अदालतों को इंतकाम का अखाड़ा और थानों को इख़्तियार से लैस अपना निजी हथियार समझते थे । जो लोग झूठी अर्ज़ियाँ, मनगढ़ंत एफआईआर और बनावटी इल्ज़ामों के सहारे दूसरों की ज़िंदगी तबाह करने को अपनी “फ़तह” समझते थे, उनके लिए यह “हुक्मनामा” अब किसी “क़यामत” से कम नहीं । हाईकोर्ट ने बड़े “वाज़ेह अल्फ़ाज़” में कह दिया है कि अब फर्जी मुक़दमा “हुनर” नहीं, बल्कि “हरामकारी” माना जाएगा । झूठ गढ़ने वाले, इल्ज़ाम सजाने वाले और मुक़दमा दर्ज कराने की साज़िश रचने वाले सब एक ही “सफ़” में खड़े किए जाएँगे । यानी अब “मज़लूम’ बनने का “नक़ाब” पहनकर क़ानून से खिलवाड़ मुमकिन नहीं होगा । अब तक हाल यह था कि “इल्ज़ाम लगाने” वाला “पाक-दामन”और “इल्ज़ाम झेलने वाला” “मुजरिम” मान लिया जाता था । मगर हाईकोर्ट ने इस “बेहूदा रिवायत” को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया है । अदालत ने साफ़ कह दिया क़ानून की आड़ में की गई बदनीयती, खुद सबसे बड़ा “जुर्म” है । यह फ़ैसला पुलिस और निचली अदालतों के लिए भी सख़्त “तंज़”है । अब न तो एफआईआर बगैर किसी तफ्तीश के रुटीन की तरह दर्ज होगी, और न ही झूठ पकड़ में आने पर महज़ फ़ाइल बंद करके “इत्मिनान” कर लिया जाएगा । अगर मुक़दमा झूठा और बुनियाद से खोखला निकला, तो इल्ज़ाम गढ़ने वाला भी उसी कटघरे में खड़ा होगा, जहाँ वह दूसरों को खड़ा देखना चाहता था । इस हुक्म का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिन्होंने रंजिश को “रिवायत” साज़िश को “रणनीति”और झूठे मुक़दमों को अपना पेशा बना रखा था । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहुत तल्ख़ मगर सच्चा पैग़ाम दे दिया है कि अदालत “इंसाफ़ का मिम्बर” है, कोई मक्कारी की महफ़िल नहीं । अगर इस फ़ैसले पर ईमानदारी से अमल हुआ, तो बेगुनाहों की बेइज़्ज़ती का सिलसिला थमेगा,पुलिसिया मनमानी की लगाम कसेगी,और अदालतों का वक़्त झूठ की पैरवी में ज़ाया नहीं होगा ।

दरगाही पत्रकार और फर्जी एफआईआर….अब किस दर पर होगा सज्दा ?

अब बेहद अहम सवाल ये है कि अब उनका क्या होगा जिनकी दुकान ही झूठे एफआईआर की आड़ में चलती थी ? जरा गोरखपुर के उस ख़ास नेक्सस पर नज़र डालिए…वही “दरगाही पत्रकार” जिन्हें कलम से “गुरबत” और साज़िश से “मोहब्बत” है । जिनकी पहचान पत्रकारिता से नहीं बल्कि कोतवाली की “दहलीज़” से होती है । अब फर्जी मुक़दमे का “औज़ार” छिन जाएगा, तो ये बेचारे किस दर पर “सज्दा” करेंगे ? और जुम्मन जैसे शरीफ़ इंसान पर बलात्कार का फर्जी इल्ज़ाम लगवाकर दरगाह की गद्दी हथियाने वाले उस “दो टके के गुंडे” का क्या होगा ? फर्जी मुक़दमे के बिना तो उसकी औक़ात “दोज़ख़” में तैरते “कीड़े” से ज़्यादा नहीं रह जाएगी । थोड़ा कोतवाल साहब की “सल्तनत” पर भी नज़र डाल लीजिए ! उन थानों का क्या होगा जहाँ फर्जी मुक़दमा “आलमपनाह” बनकर घूमता था और सच्चाई “लौंडी” बनकर नकाब में पड़ी रहती थी ? जहाँ झूठ “तख़्त” पर बैठता था और सच पैरों में “जंजीर” डालकर घसीटा जाता था ? अब जबकि हाईकोर्ट ने “सिंहासन” हिला दिया है, तो आमदनी के वो पुराने रास्ते कैसे बहाल रहेंगे ? ख़ैर छोड़िए, क्योंकि इस मुल्क में अदालती फ़ैसलों का फ़ायदा उन्हीं को मिलता है जो अपने हक़ के लिए लड़ने की “कूवत” रखते हों ! जो इंसाफ़ को “दरख़्वास्त” से नहीं बल्कि छीनकर लेने का “हौसला और जिद” रखते हों ।

कोतवाली और बड़े भैय्या का “गणित” गड़बड़ाया.. जब 500 में बिकने लगा गढ़ा गया “आरोप पत्र” !

फिलहाल सबकी पैनी नज़र कोतवाली में दर्ज उस फर्जी मुक़दमे पर टिकी है…जो “बज्र भ्रष्टाचारी” कहलाने वाले यानी “बड़े भइया” ने दर्ज कराई थी । अदालत ने दो-चार दिन पहले ही
उस झूठे “आरोप-पत्र” को “कोतवाली” के मुँह पर दे मारा था ।
“कोतवाली” के पास एक मौक़ा था कि कोई गणित, कोई हेरफेर, कोई जोड़-तोड़ या किसी “अलजेब्रा” का फार्मूला आज़माया जाए । मगर “रिश्वतख़ोरी” नाम की मुन्नी बाई इतनी क़ातिल अदाओं वाली है कि लगभग हर पलंग पर “हमबिस्तरी” करके ही दम लेती है । इस मुक़दमे में भी कुछ ऐसा ही हुआ है । आरोप-पत्र अदालत भेजा गया,और अदालत से लौटते-लौटते वो पूरा “आरोप-पत्र” “कचहरी बाज़ार” का “कैलेंडर” बनकर हाथों-हाथ बिकता हुआ,
मेज़-दर-मेज़ घूमने लगा । एक दम खुला रेट “पाँच सौ रुपया” !
अब ये करिश्मा कैसे हुआ, ये तो “कोतवाली” जाने या “कचहरी” ! क्योंकि इस आरोप पत्र की तिजोरी के “निगहबान” यही दोनो थे ।
अब चाहे उस झूठे आरोप-पत्र में “हेरफेर” हो या न हो..मगर दोनों ही सूरतों में “फंदा” तो कोतवाली के गले ही पड़ेगा । लगता है कि
“बज्र भ्रष्टाचारी” उर्फ़ “बड़े भइया” डूबेंगे तो अकेले नहीं बल्कि अपनी पूरी “भ्रष्टाचारी बिरादरी” को साथ लपेट कर डूबेंगे ।

By systemkasach

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