काशी (यूपी) : योगी आदित्यनाथ की चेतावनी के बाद बनारस के मणिकर्णिका घाट प्रकरण में एफआईआर शुरू हो चुकी है । आठ व्यक्तियों और एक अदद X हैंडल पर अब तक मुकदमा दर्ज हो चुका है । यानी अब अव्यवस्था के ध्वजारोहि सिर्फ ज़मीन पर नहीं बल्कि स्क्रीन पर भी तलाशे जाएंगे । मणिकर्णिका घाट के जिन पौराणिक निर्माणों को ध्वस्त किए जाने को लेकर हो-हल्ला मचा था…जिन तोड़फोड़ के वीडियो-क्लिप्स ने सोशल मीडिया को धुआँधार किया था…उन वीडियो और फोटोज को अब बड़े आत्मविश्वास के साथ AI जनरेटेड (छद्म वीडियो) घोषित कर दिया गया है । जो लोग इसे नंगी आँखों से देखा हुआ सत्य बता रहे थे, उन्हें “खतरनाक मोतियाबिंद” से ग्रसित घोषित करते हुए उनके लिए मुफ़्त “नेत्र शिविर” का आयोजन कर दिया गया है । अब इस शिविर में सिर्फ “नज़र” का ही नहीं बल्कि “नज़रिये” का भी ऑपरेशन किया जाएगा । “नजर” “नजरिये” और “नाराजगी” का उच्च कोटि के “चिकित्सीय माहौल” में इलाज बिल्कुल मुफ्त किया जाएगा, क्योंकि जो वीडियो कल तक ध्वस्तीकरण का सबूत बताए जा रहे थे…वो अब अचानक से मिथ्या करार दे दिए गए हैं ! गोरखपुर समेत प्रदेश के कई सोशल मीडिया प्रेमियों ने फेसबुक और ट्विटर पर तस्वीरें-वीडियो साझा कर अपनी व्यथा जाहिर की थी । यदि वे लोग इस वक्त चैन की नींद सो रहे हैं और चल रही कानूनी कार्यवाही से अंजान हैं, तो यह खबर उन्हीं के लिए है । आदेश आ चुका है ! अब मुकदमों और गिरफ्तारियों की बरसात होगी, और साथ ही मणिकर्णिका घाट की चिता-अग्नि के और भी प्रचंड होने की शुरुआत होगी ।
AI : सत्य को फौरी तौर पर खारिज करने का हथियार !
AI किसी एक व्यक्ति की खोज नहीं,बल्कि यह दशकों की वैज्ञानिकों, गणितज्ञों और इंजीनियरों की सामूहिक साधना का परिणाम है । पूरा विश्व इस AI का भले सदुपयोग कर रहा हो लेकिन विलक्षण प्रतिभाओं से भरे हमारे देश में AI को फौरी तौर पर किसी भी सत्य को झुठलाने का “सॉफिस्टिकेटेड हथियार” बनाकर रख दिया गया है । हाल यह हैं कि किसी वीडियो में “नेताजी पीकर नाच रहे थे” ! जवाब आया “भक्क” “बुरबक”… ई..त..AI जनरेटेड है ! AI लाने वाले उन वैज्ञानिकों, गणितज्ञों और इंजीनियरों को शत-शत नमन है जिनकी रचना, वर्तमान में बनारस में लिखी जा रही तड़ातड़ एफआईआर का सबब बन रही हैं । AI अब इतना खतरनाक “मिथक” बन चुका है कि अगर कोई चाहें तो इस पूरे “ब्रह्मांड” “कालखंड” और “वर्तमान” को भी “AI जनरेटेड” बताकर फौरी तौर पर खारिज कर सकता है । शायद यही वजह है कि दुनिया AI के सहारे नए “कीर्तिमान” गढ़ रही है और हम उसी AI के सहारे नित-नए “मुकदमे” ।
मणिकर्णिका घाट : कांग्रेस के हाथ लगा नया ‘हॉट केक’ !
मणिकर्णिका घाट टूटने पर कांग्रेस का “रुदाली-रूदन” और प्रलाप कम से कम कांग्रेस पर नैतिक रूप से तो सूट नहीं करता ! क्योंकि यही कांग्रेस कभी धर्म को अफीम, राम को मिथक और रामसेतु को कल्पना बता चुकी है । मणिकर्णिका घाट प्रकरण ने कांग्रेस को एक ऐसा मुद्दा दे दिया है जिसे मशीनरी खुद ही गरम-गरम परोस रही है और तड़तड़ाती हुई एफआईआर इस मुद्दे को और ज़्यादा भड़काती जा रही है । काशी में फैले इस रायते को समझदारी से समेट कर और जिम्मेदारों को कटघरे में खड़ा कर मात्र दो दिन में पूरी तरह सुलझाया जा सकता था । लेकिन मशीनरी ने संजय सिंह और पप्पू यादव सरीखे चर्चित नेताओं पर एफआईआर दर्ज कर विपक्ष के हाथों एक और खिलौना थमा दिया । क्या यह FIR संजय सिंह और पप्पू यादव सरीखे नेताओं को जेल भेज सकेगी ? और यदि मान भी लें कि भेज देगी.. तो कितने दिन ? मशीनरी को ऐसा क्यों लगता है कि “धराधर एफआईआर” कराकर वो प्रदेश में अमन चैन ले आएगी ? अगर ऐसा होता, तो लाखों मुकदमों के बाद प्रदेश आज भी कुछ अपराधों में शीर्ष पर क्यों बना हुआ है ?
इस मुद्दे पर काशी के मंत्री जी और पत्रकारों के बीच हुए संवाद को देखिए !
नोट :-यह लेख, लेखक के निजी विचार हैं । यह समाचार रिपोर्ट नहीं बल्कि एक आलोचनात्मक टिप्पणी है ।

