देश और प्रदेश में हर तरफ़ “बम-बम” चल रहा है । लेकिन ज़रा ठहरकर देखें तो पता चलता है कि यह बम बम विकास के नहीं, बल्कि लापरवाही, अहंकार और सिस्टम की सड़ांध के हैं । बहुत साल पहले की बात है। मरीज़ का दाहिना पैर पूरी तरह सड़ चुका था । जान बचाने के लिए काटना ज़रूरी था । लेकिन गोरखपुर के एक नामी अस्पताल में नामी डॉक्टर साहब ने दाहिने की जगह बायाँ पैर काट दिया । तब कहा गया “गलती हो गई ।” आज हम तरक्की कर चुके हैं क्योंकि अब गलती सिर्फ़ पैर तक सीमित नहीं रही । वो इसलिए कि अब कानपुर के अस्पताल में मौत 42 नंबर बेड पर पड़े मरीज़ की होती है, और पोस्टमार्टम 43 नंबर बेड पर ज़िंदा पड़े मरीज़ का कर दिया जाता है । अब इसे तरक्की कहते हैं या टेक्नोलॉजी ?
पिछली बार कुम्भ मेला भगदड़ की मौतों और मोनालिसा की चार्मिंग और रिकॉर्ड तोड़ कमाई तथा रोजगार के कारण चर्चा में था और इस बार चर्चा का विषय है..संतों पर लाठियाँ, ज़मीन पर गिराकर पीटना और दाढ़ी-चोटी से घसीटना ! स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जब हठधर्मिता दिखाते हुए मुख्यमंत्री योगी के “संतत्व” पर सवाल उठाया, तो मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस थमाकर उनके शंकराचार्य होने पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया । स्वामी के शिष्यों को चोटी से घसीटते हुए मारने के वीडियो सोशल मीडिया पर हाय तौबा और उलाहना का सबब बन रहे हैं और सिस्टम कह रहा है,सब कंट्रोल में है ।
बनारस में पौराणिक धरोहरों के ध्वस्तीकरण के वीडियो को AI जनित वीडियो बताकर FIR दर्ज हुए अभी समय बीता भी नहीं था कि पुलिस की बरसी लाठियों ने फिर मामला गर्मा दिया । बनारस के एक विप्रदेव ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री से पूछा है कि “अगर वीडियो AI है तो उसे फाँसी दी जाए, और अगर AI नहीं है तो जिम्मेदारों को…”
उधर AI अभी बनारस से निकला भी नहीं था कि कर्नाटक में DGP साहब पर इल्ज़ाम आ गया । वर्दी में कथित अश्लील हरकत करने का वीडियो वायरल हुआ और DGP साहब सस्पेंड हो गए । DGP साहब से वीडियो पर सफाई माँगी गयी तो साहब ने भी कह दिया कि यह AI है । अब यह “ए आई” है…या “बेहयाई”…यह तो जाँच ही बताएगी ।
गोरखपुर अब तक शांत था, लेकिन खोराबार थाने के कारनामे की चर्चा ने सोशल मीडिया को गरम करना शुरू कर दिया । आरोप लगा कि राजेन्द्र को उठाया गया…तीन दिन तक परिवार थाने के चक्कर काटता रहा..और जवाब मिला “पता नहीं” । ADG साहब के हस्तक्षेप से राजेन्द्र घर लौटा, लेकिन सवाल वहीं खड़ा है कि अगर आज थाने की CCTV फुटेज माँगी जाए, तो जवाब क्या मिलेगा ? यही कि “CCTV खराब है ।”और अगर CCTV ख़राब है, तो Paramvir Singh Saini बनाम बलजीत सिंह (2020) के अनुसार यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है । इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश था कि 6 महीने से 18 महीने तक की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाए ।
इन तमाम घटनाओं के बीच जनता आज किंकर्तव्यविमूढ़ है । इस देश की “पॉपुलेशन” के मन के अंदर सिर्फ “फ्रस्टेशन” है ! सिस्टम के “कॉन्स्टिपेशन” से बाहर यह “सिचुएशन” है….कि हर जगह “सेचुरेशन” है ! पब्लिक जानना चाहती है कि इस “टॉक्सिकेशन” का “जस्टिफिकेशन” क्या है ? “राइट टू इन्फॉर्मेशन” है..लेकिन उस पर भी “ऑब्जेक्शन” है ! पुलिस के पास पावर है लेकिन उसका भी “लिमिटेशन” है ! जिसके पास “डेजिग्नेशन” है उसके पास “इंटेंशन” नहीं…और जिसके पास “सजेशन” है….उसके पास “पोजीशन” नहीं ! ऐसे हालात में पब्लिक बेचारी क्या करे…यही तो “क्वेशचन” है और यही “क्वेशचन” आज पब्लिक का सबसे बड़ा “फ्रस्टेशन” है ।
किसी ने पूछा कि आप क्या करते हैं ? मैंने कहा पढ़ता-लिखता हूँ । पढ़ता हूँ वो सफेद झूठ, जो अख़बारों में लिखा जाता है…और लिखता हूँ वो सच, जो किसी को दिखाई नहीं देता । संत कहते हैं कि दुनिया विश्वास पर टिकी है । शायद इसी लिए बैंक वाला पेन बाँधकर..मेडिकल वाला कैंची बाँधकर..फोटोकॉपी वाला स्टेपलर बाँधकर..प्याऊ वाला गिलास बाँधकर…कचहरी में वकील कुर्सी बाँधकर…रेलवे टॉयलेट में मग बाँधकर…बड़े घर वाले कुत्ता बाँधकर…लड़कियाँ मुँह बाँधकर, और पत्नियाँ पति बाँधकर रखती हैं । किसी को किसी पर “भरोसा” नहीं है लेकिन फिर भी “भरोसे” पर ही देश चल रहा है ।

