झूठे गर्व की आग में जलता समाज..ऊँचाई पर झंडे और खाई में ज़मीर !

रामपुर में सरकारी कार्यालय में दिनदहाड़े हुए गोलीकांड में एक अधिवक्ता की मौत हो गयी है । दोनो को उसी कार्यालय में कार्यरत बताया जा रहा है…आरोपी भी घायल है…आरोपी पुलिस हिरासत में है…वकील समुदाय द्वारा सख्त प्रतिक्रिया और प्रदर्शन जारी है।  दूसरी तरफ इन सबसे इतर “ठाकुर बनाम ब्राह्मण” बहसबाजी का नया “एंगल” पुनः “अवतरित”हो चुका है । जातिवाद व्यवस्था के “अंतर्द्वन्द” ने “सामाजिक तानेबाने” को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है । हालात “अजीब” हैं और लोग “बेचैन” हैं ! लड़कियां “शादी” नहीं कर रहीं क्योंकि उन्हें पहले “करियर” बनाना है…लड़के “शादी” नहीं कर रहे क्योंकि “शादी” के बाद उन्हें खुशहाल परिवार की जगह “क्लेश” और “कोर्ट कचहरी” दिखाई दे रहा हैं ! जिनकी “शादी” हो जा रही है वो “बच्चे” नहीं कर रहे…और जो “बुढ़ापे” की तरफ बढ़ रहे हैं वो बच्चे पैदा करने के लिए “टेस्ट ट्यूब बेबी” की लाइन में खड़े हैं ! जिनकी “जॉब” लगी हुई है वो उसे बचाने की “टेंशन” में जी रहे हैं….जिनकी नहीं लगी वो “जॉब” पाने की “टेंशन” में जी रहे हैं….जिनके “औलाद” नहीं है वो “औलाद” पाने की कोशिश में है..जिनके पास “औलाद” है वो उसे “AI” के “प्रकोप” से बचाते हुए उन्हें काबिल बनाने की कोशिश में लगे है ! “आधार” की लाइन से अभी पूरी तरह निकल भी नहीं पाए थे कि “व्यवस्था” ने “SIR” की अगली लाइन में लाकर फिर से खड़ा कर दिया ।

इन सबसे इतर ऊपर अपलोड किया गया वीडियो यह बता रहा है कि आज फिर के एक बार “ठाकुर बनाम ब्राह्मण” का शोर है । किसी को “ठाकुर” होने पर गर्व है तो किसी को “ब्राह्मण” होने पर गर्व है । लेकिन किसी को “इंसान” होने पर “गर्व” नहीं है ? क्योंकि इंसान तो रहे ही नहीं ! ऊपर वाले ने बनाया तो “इंसान” ही था लेकिन “जमीन” पर आते ही “कीड़े” बन गए “कीड़े” ! “जातिवाद” का यह “गर्व” सेवा का नहीं है…यह “गर्व” परोपकार का भी नहीं है…यह “गर्व” उस “ताकत” का है जिससे एक दूसरे को “नीचा” दिखाया जा सके । न शायद किसी “ठाकुर” ने कभी किसी “असहाय ठाकुर” को सहारा दिया होगा और न किसी “ब्राह्मण” ने कभी किसी “गरीब ब्राह्मण” को दो “रोटी” खिलाई होगी । इस शांत दिखती “सतह” के नीचे एक “उथल पुथल” है !

क्या ऐसा भी कोई है जिसे “मनुष्य” होने पर भी “गर्व” है…या सबको सिर्फ ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य, ओबीसी, एससी, एसटी, होने पर ही “गर्व” है । “मुसलमान” तो सिर्फ पोस्टर पर है.. असल “सरफुटौव्वल” तो हिंदुओं की आपसी लड़ाई में है ! हमारा यह “गर्व” ही नेताओं की स्थिति स्वर्गीय बना चुका है और हम “नारकीय” परिस्थितियों में अब भी जाति का “झंडा” उठाए खड़े हैं । हमारा “बचकाना” और “मिथ्या गर्व” विकसित देशों में कहीं दिखाई नहीं देता इसलिए आज भी हम मात्र विकसित राष्ट्र होने का “भ्रम” पालते रह गए लेकिन “विकसित राष्ट्र” कहला नहीं सके

सरल शब्दों में कहा जाए तो प्रदेश की जनता और व्यापारी प्रतिवर्ष राज्य को टैक्स के रूप में लगभग ₹2 लाख करोड़ से लेकर ₹3 लाख करोड़ की राशि देते हैं । औसतन हममें से हर एक व्यक्ति लगभग ₹9,000 से ₹9,500 का टैक्स एक “वित्तीय वर्ष” में सरकार को देते हैं, फिर भी देश में “80 करोड़” लोग आज भी “राशन” की लाइन में खड़े हैं । हमारी “सड़कें” पहले बनती है, फिर “सड़क” तोड़कर “नाला” बनता है…”नाला” बनने के बाद फिर से नई “सड़क” बनती है और “पाइप” बिछाने के लिए नाम पर “सड़क” फिर एक बार खोद दी जाती है.. ताकि फिर एक बार “सड़क” बनाई जा सके ! यह “चक्र” चलता रहता है और जनता के खून-पसीने की कमाई लूटने वाले “भ्रष्ट नेता” और “अफसर” हमें सिर्फ यह याद दिलाते रहते हैं कि तुम “ठाकुर” हो.. तुम “ब्राह्मण” हो….तुम “बनिया” हो…तुम “शूद्र” हो…तुम “मुसलमान” हो । हमारे लिए “रोजगार” मिले या न मिले…लेकिन हमारी सिर्फ एक “सड़क” भ्रष्टाचारियों को “आजीवन रोजगार” देती रहती है ।

कौन सी “जात” की बात करते हैं हम ? यहाँ “स्वर्ण” भी पिट रहा है, “ब्राह्मण” भी पिट रहा है, “दलित” भी पिट रहा हैं, और “ओबीसी” भी घिस रहा हैं ! इस विचित्र स्थिति पर सोशल मीडिया पर एक “पोस्ट” देखा था मैंने… पोस्ट में लिखा था कि  “69000” वालों को “नौकरी” नहीं…खेतों में “यूरिया” की टोकरी नहीं… “नशे के सौदागरों” की कोठियों पर चमक है…बेबसों पर “बुलडोज़र” की धमक है ..चिकित्सा, खनन से लेकर PWD तक “आकंठ” भ्रष्टाचार का “जोर है लेकिन जातिवाद का “दानव” कहता है कि “ये दिल मांगे मोर” है !

By systemkasach

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