15 लाख की धमकी और तीन साल पुराना स्टिंग ! आखिर सच क्या है डॉक्टर साहब ?

गोरखपुर में मानसी हॉस्पिटल के डॉक्टर पंकज दीक्षित द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर ने अचानक “सनसनी” का माहौल बना दिया है । डॉक्टर दीक्षित ने दावा किया है कि राहुल शर्मा नाम के एक “हिस्ट्रीशीटर” ने उनसे 15 लाख रुपये की रंगदारी मांगी है और उन्हें जान माल का खतरा भी है । कागज़ पर यह मामला तो बेहद गंभीर दिखता है और होना भी चाहिए । रंगदारी कोई हल्की बात तो है नहीं ! लेकिन यहाँ कहानी का एक पहलू और भी है, और मजेदार बात यह है कि कहानी के इस पहलू से शहर के तमाम अन्य डॉक्टर भी अच्छी तरह वाकिफ हैं । डॉक्टर साहब का कहना है कि धमकी भरी कॉल आई, मगर कमाल है कि उसकी “रिकॉर्डिंग नहीं हो पाई”। आज के डिजिटल दौर में, जब आम लोग तक कॉल रिकॉर्डिंग ऑन रखकर चलते हैं तब एक स्थापित डॉक्टर का यह तर्क थोड़ा असहज सवाल खड़े करता है । क्या वाकई तकनीकी असमर्थता थी, या फिर मूल कहानी में कुछ पन्ने अभी लिखे जाने बाकी हैं ?

तीन वर्ष पूर्व “स्टिंग” में फँसे थे “डॉक्टर दीक्षित”…!

गौरतलब है कि यही डॉक्टर साहब पहले भी चर्चा में रहे हैं । आज से लगभग तीन वर्ष पूर्व “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के स्टिंग ऑपरेशन में ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें डॉक्टर साहब कथित तौर पर हिस्ट्रीशीटरों उठाईगीरों और एम्बुलेंस गैंग के साथ जश्न मनाते और ठुमके लगाते कैमरे में कैद हुए थे । उस वक्त आरोप यही लगे थे कि डॉक्टर साहब एम्बुलेंस नेटवर्क के जरिए मरीजों को “रेफर” कराकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराने वाले कमीशन के खेल में व्यापारिक साझेदार हैं । यानी इलाज कम, व्यापार ज्यादा ! ये आरोप सही हैं या नहीं, यह तो उस जाँच का विषय है जो कभी पूरी ही नहीं होती लेकिन जब पृष्ठभूमि धुंधली हो, तो यह सवाल लाजिमी है कि एक वेल एजुकेटेड डॉक्टर का बदमाशों, एम्बुलेन्स गैंग के लोगों, और मरीज माफियाओं के साथ खाना पीना और नाचना गाना क्यों चल रहा था ?

कौन है राहुल शर्मा ?

चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत कुछ “शूरवीरों” की माने तो राहुल शर्मा पहले “मानसी हॉस्पिटल” के लिए ही एम्बुलेंस गैंग का काम करता था । फ़िलहाल राहुल शर्मा बेतियाहाता स्थित एक निजी अस्पताल में मरीजों की सप्लाई में लिप्त है । एक नंबर का मनबढ़, गालीबाज और शराबी राहुल शर्मा का “अपराध” से पुराना नाता है । खुलेआम फायरिंग करना और हथियार लहराना “राहुल शर्मा” का पुराना शगल रहा है । राहुल शर्मा की इसी “आपराधिक प्रवृत्ति” को नए अंदाज में पेश कर “रंगबाजी” के फ्रेम में ढाल दिया गया है ।

“थेथरई” का “बस अड्डा” बना फेसबुक…!

इन सवालों के बाद अब अचानक आई तहरीर स्वाभाविक रूप से संदेह के घेरे में आ जाती है लेकिन हमारे “फेसबुकिये पत्रकार”। इनका हाल यह है कि तहरीर की स्याही सूखी भी नहीं कि हेडलाइन बन गई ! बड़ी खबर ! बहुत बड़ी खबर ! बड़ी घटना ! सीएम सिटी में सनसनी ! बजा घंटा औऱ रोया घड़ियाल ! कुल मिलाकर माफियाराज का हल्ला काटते और वुजू करते हुए पहुँच गए डॉक्टर साहब के पास चाय नाश्ते के जुगाड़ में ! जांच-पड़ताल का धैर्य और कॉमन सेंस तो मानो इनके लिए विलुप्त प्रजाति घोषित हो चुका है । न तथ्यों की पुष्टि, न दूसरे पक्ष की पड़ताल ! बस सनसनी की रफ्तार में पेटकारिता की गाड़ी दौड़ पड़ी ! यहाँ सवाल डॉक्टर दीक्षित से भी उतना ही है,जितना उन लोगों से भी जो बिना सत्यापन के खबर को “सनसनी” बनाकर परोस देते हैं ।

जब “बेशर्मी” आँखों का “ग्लूकोज़” बन जाये…!

“सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के “स्टिंग ऑपरेशन” में डॉक्टर साहब का तीन वर्ष पुराना वो वीडियो आज भी ताजा है । हो सकता है कि इस नाच पार्टी की वीडियो में डॉक्टर साहब के साथ नाचता हुआ वो हिस्ट्रीशीटर राहुल शर्मा भी दिख जाए ! यदि राहुल शर्मा इस वीडियो में नहीं है तो इस वीडियो में डॉक्टर साहब के साथ नाच गा रहे बाकी के अन्य बदमाश और हिस्ट्रीशीटर कौन हैं जिनका डॉक्टर साहब से पुरातन कनेक्शन रहा है । मरीजों से भी फीस के बगैर न मिलने वाले डॉक्टर साहब….यदि बदमाशों और एम्बुलेंस गैंग के साथ नाच गा रहे हैं तो, जाहिर सी बात है कि रिश्ते काफी प्रगाढ़ रहे होंगे ! अब यदि बेशर्मी किसी की आँखों का ग्लूकोज़ बन जाये तो फिर वो लाइलाज है । बहरहाल, वीडियो में दिखाए गए सभी किरदारों के खिलाफ पुलिस ने बाद में तगड़ी धड़ पकड़ की औऱ जफर खान ने थक हार कर इस धंधे से तौबा कर अपना दूसरा व्यवसाय शुरू कर दिया ।

क्या कहता है “हाईकोर्ट” का हालिया निर्देश…!

हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फर्जी सूचना और झूठी शिकायत देने वालों पर सख्त कार्यवाही की बात कही थी । न्यायालय का स्पष्ट संदेश था कि कानून का दुरुपयोग करने वालों को बख्शा न जाए । ऐसी स्थिति में यदि जाँच में यह शिकायत असत्य पाई जाती है…तो क्या उसी मानक के तहत डॉक्टर साहब के खिलाफ कार्रवाई होगी ? या फिर नियम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं ? शायद डॉक्टर साहब के खिलाफ कार्यवाही नहीं होगी….क्योंकि हमारा कानून बहुत समझदार है ! ये कमजोरों के सामने तो चिंघाड़ता है लेकिन रसूखदारों के आगे मिमियाने लगता है । मुद्दा सीधा सा है ! यदि डॉक्टर सच कह रहे हैं, तो प्रशासन को तुरंत सुरक्षा देनी चाहिए और रंगदारी मांगने वाले पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन यदि यह तहरीर किसी बड़े खेल की भूमिका है, तो कानून को उतनी ही दृढ़ता से दूसरी दिशा में भी चलना चाहिए । सच क्या है, यह तो सिर्फ निष्पक्ष जाँच ही बताएगी पर फिलहाल, इस पूरे प्रकरण में शोर बहुत है । पुराना वीडियो अपने साथ नई कहानियाँ और नए किरदार जोड़ रहा है…और सत्य कहीं पीछे खड़ा, अपनी बारी का इंतजार कर रहा है

देखिए, तीन वर्ष पुराना “वीडियो” और “स्टिंग”…!

By systemkasach

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