ऑपरेशन थिएटर में बैक्टीरिया और दफ्तरों में रिश्वत का वायरस : अंधी व्यवस्था ने छीन ली आँखों की रोशनी ?

गोरखपुर : राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में 19 मरीजों की आँखों की रोशनी ऑपरेशन के बाद चली गई है । हंगामा बरपा है और “कैमरे” बंद “कमरों” से निकलकर “करतब” दिखाते हुए “कमाल” करने में लगे हैं । कुछ “छिन” चुकी आँखों और कुछ की “विलुप्त” हो चुकी रोशनी ने “प्रशासन” को “झकझोर” कर जगा दिया है और प्रशासनिक जाँच दल ने बड़ी “जेम्स बॉन्ड” शैली में अस्पताल के “ऑपरेशन थिएटर” को खंगाल दिया है । खोजबीन के परिणाम के तहत इस सारे “कांड” की जड़ “बैक्टीरिया” को बताते हुए उसे अब “मुजरिम” करार दे दिया गया है ।

वाह ! अद्भुत खोज ! हॉस्पिटल में “बैक्टीरिया” मिल गया लेकिन वर्षों से “सीएमओ दफ्तर” में पनप रहा “व्यवस्था का वायरस” आज तक किसी रिपोर्ट में सामने नहीं आया ? अब अस्पताल सील होगा…लाइसेंस निलंबित होगा…एफआईआर होगी और “संचालक” जेल जाएगा । क्योंकि इस पूरी “श्रृंखला” की सबसे कमजोर “कड़ी” तो अस्पताल संचालक ही है । “सीएमओ दफ्तर” की व्यवस्था तो “बकेन भैंस” के दूध से धुली हुई है । मरीजों की आँख का ऑपरेशन करने वाले “डॉक्टर” तो मानो स्वयं “शल्य चिकित्सा” के जनक “आचार्य सुश्रुत” के अवतार हैं । उनसे भूल कैसे हो सकती है ?

सीएमओ कार्यालय : जहाँ “वायरस” अमर है…

कहते हैं कि “मानकविहीन” अस्पतालों के “जन्मदाता” माने जाने वाले “सीएमओ दफ्तर” के नोडल अधिकारी डॉक्टर “ए के सिंह” के कार्यकाल में कई “चमत्कार” हुए हैं । यदि इनके “भ्रष्टाचार” के खिलाफ कोई याचिका “हाईकोर्ट” में लंबित है तो क्या हुआ ? इनके “भ्रष्टाचार” के खिलाफ यदि कोई जाँच “सिटी मजिस्ट्रेट” की मेज पर धूल फाँक रही है तब भी क्या फर्क पड़ता है ? भले साहब एक पैर से “लाचार” दिखाई देते हों लेकिन इनकी “स्थिरता” ऐसी… जैसे “प्रशासनिक हिमालय” हों । इनके कार्यालय के “संविदा कर्मियों” की निष्ठा भी अद्भुत बताई जाती है । “सिंह साहब” के “कर्तव्य” पालन की प्रेरणा ऐसी है कि उसका अनुसरण करते-करते “संविदाकर्मियों” ने भी “लाखों” का माल कूटने की “परिक्रमा” कब की पूरी कर डाली है ।

फर्जी डिग्री का महाकाव्य…

सीएमओ दफ्तर के “वायरस” जनित माहौल में पलने वाले कम्पियरगंज के “ओम हॉस्पिटल” वाले डॉक्टर “कृष्णा नंदन” की कहानी भी कम “रोचक” नहीं है । “दस्तावेज” कहते हैं की डॉक्टर साहब के “एमबीबीएस” और “एम डी” की डिग्री तो फर्जी है ही…साथ में “यूपी और उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल” में “रजिस्ट्रेशन” का विवरण भी फर्जी है । कमाल की बात ये है कि इतना सबकुछ फर्जी होने के बाद भी इनके “ओम हॉस्पिटल” का रजिस्ट्रेशन बिल्कुल “ओरिजिनल” है ! ये “कृपा” आखिर कहाँ से बरसी ? अब दो दो “राज्य” के “मेडिकल काउंसिल” को मैनेज करने का “माद्दा” रखने वाले डॉक्टर “कृष्णा नंदन” जी यदि एक जिले के “सीएमओ दफ्तर” को भी “मैनेज” न कर सकें तो यह उनकी “विलक्षण प्रतिभा” का घोर अपमान कहलायेगा ।

डॉक्टर साहब का पक्ष बड़ा भावुक है….

ओम हॉस्पिटल के डॉक्टर “कृष्णा नंदन” अपना पक्ष रखते हुए कहते हैं कि….मैं एमबीबीएस डॉक्टर हूँ ही नहीं, किसी दुश्मन ने मेरी “फर्जी डिग्री” बनवा दी है” । अब “दुश्मनी” यदि ऐसी हो तो निश्चित तौर पर यह “दुश्मनी” भारत-पाकिस्तान स्तर की होगी ! “साठ लाख” खर्च करके “डिग्री” बनवाना…फिर “यूपी और उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल” में रजिस्ट्रेशन करवाना…और डॉक्टर साहब के HPR आईडी में यूपी मेडिकल कौंसिल के “रजिस्ट्रेशन नंबर” को संलग्न कर देना तो “प्रार्थना” करने पर “विवश” कर देता है…कि “भगवान” ऐसे “उदार दुश्मन” सबको दें !

डॉक्टर कृष्णा नंदन डिग्री PDF

डॉक्टर साहब के HPR आईडी में भी फर्जी डिग्री का जिक्र…

“सीएमओ दफ्तर” के “वायरस” से यहाँ भी वही प्रश्न है कि यदि “डॉक्टर साहब” अपनी HPR आईडी में भी खुद को एमबीबीएस घोषित किये बैठे हैं तो आपकी “सत्यापन” की प्रक्रिया कहाँ है और कैसे दे दिया आपने इस “ओम अस्पताल” को “रजिस्ट्रेशन” ? “दुश्मन” फर्जी डिग्री तो बनवा सकता है लेकिन क्या किसी डॉक्टर की HPR आईडी भी कोई “दुश्मन” बनवा सकता है । ये काम तो वही कर सकता है जो खुद ही अपना सबसे बड़ा “दुश्मन” हो । सीएमओ दफ्तर के “रजिस्ट्रेशन” के दम पर ही “डॉक्टर साहब” अपने अस्पताल में खुलेआम मरीजों का “तियां पांचा” करते रहते हैं । भविष्य में अगर इस “अस्पताल” में भी कोई “नरसंहार” या “कांड” हो जाये तो “सीएमओ दफ्तर” को यहाँ की ओटी में भी कोई ऐसा खतरनाक “बैक्टीरिया” मिल जाएगा जो अब तक “रिश्वत” के “अभेद कवच” वाले “आवरण” में ही छिपा बैठा है । यहाँ भी किसी घटना के बाद मिलेगा “बैक्टीरिया” सील होगा “अस्पताल”…मरेगा “इंसान” जेल जाएगा “अस्पताल संचालक” ! और व्यवस्था का “रिश्वत रूपी वायरस” अपने “प्रोटीन संश्लेषण कवच” में फिर से “मौज” करेगा ।

देखें HPR आईडी PDF

नेपाल बॉर्डर से संचालित फर्जी डिग्री उद्योग….

सूत्र बताते हैं कि “एमबीबीएस” की फर्जी डिग्रियाँ बनाने वाला एक बड़ा “रैकेट” सक्रिय है । इस “रैकेट” का सरगना गोरखपुर नेपाल सीमा के आसपास बैठकर “ऑपरेट” करता है । गोरखपुर के कुछ अस्पताल संचालकों के नाम भी इस “रैकेट” से जुड़े होने के प्रमाण सामने आए हैं । इसी सिलसिले में “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के सूत्र इस “रैकेट” के नेपाल बॉर्डर स्थित ठिकाने पर पहुँचकर लौट भी आये हैं ।

इससे पूर्व गोरखपुर के “एमडी डॉक्टर” एस सी वर्मा और “सर्जन” जनार्दन प्रसाद की “डिग्री” की असलियत “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” सामने ला चुका है ! असलियत सामने आने के बाद दोनो डॉक्टर अलग अलग जनपदों से जेल भेजे गए…लेकिन “एक्सपोज” होने से पहले इसी गोरखपुर की “व्यवस्था” इन दोनो डॉक्टरों को “सलाम” ठोकती थी । “दैनिक जागरण” अखबार ने तो इन दोनो फर्जी डॉक्टरों को “धरती के भगवान” का तमगा दे डाला था । फर्जी डिग्री के इस मामले में शामिल सभी “किरदारों” की कहानी जल्द ही “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के “यू ट्यूब” प्लेटफार्म पर दिखाई दे सकती है क्योंकि इस मामले में शामिल कई “किरदार” तो इतने “शातिर” हैं कि उन्होंने “एमबीबीएस” की “फर्जी डिग्री” पर भारी भरकम लोन उठा रखा है । “सीएमओ दफ्तर” की “संवेदनहीनता” को “व्यवस्था” और “समाज” की आँखों पर पट्टी बाँध देने वाला “अपराध” कहना गलत नहीं होगा । लगभग हर बार घटना के बाद ओटी में “बैक्टीरिया” मिल जाता है । वास्तव में “बैक्टीरिया” ऑपरेशन “थिएटर” में नहीं बल्कि व्यवस्था की “नसों” में है । हर घटना की “गाज” हर बार घटना की “सबसे कमजोर कड़ी” पर ही गिरती है और “दफ्तरों” में पनप रहा “रिश्वत-प्रोटीन संश्लेषण वायरस” किसी “माइक्रोस्कोप” से भी दिखाई नहीं देता !

By systemkasach

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का खुद का चेहरा कितना विद्रूप और घिनौना है..ये आप इस पेज पर देख और समझ सकते हैं । एक ऐसा पेज, जो समाज को आईना दिखाने वाले "लोकतंत्र के चौथे स्तंभ" को ही आइना दिखाता है । दूसरों की फर्जी ख़बर छापने वाले यहाँ खुद ख़बर बन जाते हैं ।

Related Post