18 लाख मिलते ही अस्पताल लाइसेंस निरस्त ! नकली OSD और नए आरोपों से घिरा स्वास्थ्य प्रशासन !

गोरखपुर : सिकरीगंज स्थित राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में हुए ऑपरेशन के बाद 9 मरीजों की आंखों की रोशनी चले जाने की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया । नौ मरीजों के आँखों की रोशनी चले जाने को केवल “बैक्टीरियल इंफेक्शन” नहीं माना जा सकता । या तो यह एक गंभीर “चिकित्सकीय” लापरवाही थी, या फिर “व्यवस्थागत” विफलता ! जाँच टीम की रिपोर्ट और इस मामले के हर पहलू को खंगालने के बाद यह कहा जा सकता है कि ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर पराग अग्रवाल और सीएमओ कार्यालय की गर्दन बचाने के लिए “निरीह” अस्पताल संचालक की गर्दन “कलम” कर दी गई । कैसे हुआ ये..इस पर एक दो दिन में तथ्यों के साथ प्रकाश डाला जाएगा । इसी बीच दिनाँक 28 फरवरी 2026 की शाम सीएमओ गोरखपुर ने “राजेश हाई टेक अस्पताल” का पंजीकरण निरस्त कर दिया । सार्वजनिक रूप से यही संदेश गया कि दोषी पर कार्रवाई हो गई । लेकिन संचालक राजेश राय का दावा इस कहानी को एक बिल्कुल अलग दिशा में ले जाता है ।

जाँच के नाम पर सौदेबाज़ी ?

इस मामले में अब तक सबको सिर्फ वही दिखाई दे रहा था जो दिखाया जा रहा था । लेकिन परदे के पीछे का असली खेल कुछ और ही था । संचालक राजेश राय का कहना है कि जाँच प्रक्रिया के दौरान उन्हें कार्रवाई से “बचाने” के नाम पर उनके एकमुश्त 15 लाख रुपये “हड़प” लिए गए । इसके अतिरिक्त लगभग 3 लाख रुपये अलग-अलग और भी लोगों के बीच बांटे गए ।

सबूतों के इशारा किस ओर है ?

अस्पताल संचालक राजेश राय ने बताया है कि जाँच प्रक्रिया के दौरान उत्तरप्रदेश सरकार की डीपी लगे एक मोबाइल नंबर से कॉल आया । कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को मुख्यमंत्री का OSD बताया और मामले को “हाईलाइटेड” बताते हुए संचालक को आश्वस्त किया कि वह स्वयं आकर सीएमओ से बात करेगा । फोन पर वार्ता का क्रम जारी रहा । बातचीत में ठगों ने बकायदे “OSD” “PA” और “CMO” बनकर संचालक से बातचीत की । “बृजेश पाठक” और “सीएम योगी” का नाम लेते हुई “गोरखपुर मठ” में ही मीटिंग करा देने का “दम्भ” भरा ! और कुछ दिनों बाद “ठगों” में से दो लोग गोरखपुर पहुंचे । उनमें से एक का नाम कथित रूप से “गोल्डन बाबा” बताया जाता है । कथित “गोल्डन बाबा” ने संचालक को बताया था कि दो दिन पहले वह सीएमओ कार्यालय में सीएमओ गोरखपुर से मिला था । साथ ही यह भी बताया कि मामला 15 लाख में “मैनेज” होगा । संचालक राजेश राय कथित “गोल्डन बाबा” और “OSD” की बातों पर भरोसा इसलिए कर बैठे क्योंकि ठगों की बातों की पुष्टि सीएमओ कार्यालय के कुछ कमियों ने भी करना शुरू कर दिया था । अस्पताल संचालक को भरोसा दिलाया गया कि अस्पताल के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होगी । कथित “OSD” तथा अन्य की कॉल रिकॉर्डिंग सुनें !

15 लाख का झोला और उसी शाम निरस्तीकरण

राजेश राय का कहना है कि 28 फरवरी 2026 को दोपहर लगभग 12 बजे वो “15 लाख” रुपये एक झोले में लेकर सीएमओ कार्यालय स्थित “हनुमान मंदिर” पर पहुंचे । वहाँ एक व्यक्ति ने उनसे वह “झोला” लिया, लेकिन उसी दिन शाम को अस्पताल के लाइसेंस “निरस्तीकरण” का पत्र जारी हो गया । “15 लाख” की डिलीवरी से पहले कथित “OSD” द्वारा नोटों की गड्डियों के फोटो भी अपने “व्हाट्सएप्प” पर अस्पताल संचालक से मंगवाए गए ताकि “डिलीवरी” पूरी तरह “कन्फर्म” रहे । देखें वीडियो !

 

सीसीटीवी फुटेज क्यों सुरक्षित नहीं ?

संचालक का कहना है कि उन्होंने बार-बार सीएमओ कार्यालय फोन कर अनुरोध किया कि सीएमओ कार्यालय की “सीसीटीवी फुटेज” सुरक्षित रखी जाए । क्योंकि कथित “गोल्डन बाबा” तथा “OSD” की सीएमओ से कथित मुलाकात, और “सीएमओ” कार्यालय स्थित “हनुमान मंदिर” पर “15 लाख” से भरा झोला लिया जाना तथा “15 लाख” की “डिलीवरी” के ठीक साढ़े तीन घंटे बाद”लाइसेंस निरस्तीकरण” का पत्र जारी किया जाना  “गंभीर शंका” पैदा करती है । इसके बाद भी कमाल है कि बार बार कहने पर भी अब तक “फुटेज” सुरक्षित नहीं की गई । ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण “साक्ष्य” वही होते हैं जो सरकारी परिसरों में उपलब्ध होते हैं । यदि “फुटेज” सुरक्षित नहीं रखी जाती, तो यह केवल “लापरवाही” नहीं, बल्कि संभावित “साक्ष्य” नष्ट होने की “आशंका” भी पैदा करता है । यदि संचालक राजेश राय का “कथन” और “सबूत” सत्य हैं, तो यह केवल “धोखाधड़ी” नहीं, बल्कि “प्रशासनिक” तंत्र की “विश्वसनीयता” पर सीधा प्रश्न है ।

पुराना पैटर्न या नया प्रयोग ?

यह भी कहा जा रहा है कि लगभग तीन वर्षों पहले अस्पताल पंजीकरण विभाग की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव हुआ था । “विजिलेंस ट्रैप” से बचने के लिए कथित तौर पर दलालों संविदाकर्मियों और बाहरी माध्यमों के जरिए “वसूली” की प्रणाली विकसित की गई लेकिन आजतक इस मसले पर कोई प्रभावी जाँच नहीं की गई । यदि जांच होती और यह आरोप प्रमाणित होते, तो यह “संगठित उगाही” का मॉडल “ध्वस्त” किया जा सकता था । अस्पताल संचालक द्वारा जल्द ही इस मामले में मुकदमा दर्ज कराए जाने आसार नजर आ रहे हैं ।

अंधी सर्जरी और अंधा सिस्टम

संचालक राजेश राय का स्पष्ट आरोप है कि उनसे की गई “15 लाख” की ठगी के मामले में “सीएमओ” कार्यालय के कुछ कर्मियों कथित “OSD”, और “गोल्डन बाबा” की आपसी मिलीभगत का परिणाम है । कौन थे वे कथित “OSD” और “गोल्डन बाबा” ? क्या वे “ठग” थे ? क्या वे किसी बड़े “संरक्षण तंत्र” का हिस्सा थे ? क्या सीएमओ कार्यालय के कुछ कर्मियों की भी इस घटना में “भूमिका” है ? क्या यह सब एक सोची-समझी चाल थी ताकि असली निर्णयकर्ता “पर्दे” के पीछे छिपा रहे ? संचालक राजेश राय उन मरीजों के दवा यात्रा भत्ता इलाज हर चीज का खर्च उठा रहे थे जिनके आँखों की रोशनी चली गई या इलाज चल रहा है । अब इन स्थितियों में अस्पताल का “लाइसेंस” निरस्त होने के बाद सबसे बड़ा “प्रश्न” जो पीछे छूट गया है वो यह है कि अब उन नौ मरीजों का क्या होगा जिनकी आँखों का इलाज चल रहा है ? खबर लिखे जाने तक सीएमओ से संपर्क के लिए कई बार फोन किये गए लेकिन प्रयासों का जवाब नहीं मिला है । यदि प्रशासन के पास इस मामले का “स्पष्ट” और “तथ्यात्मक” उत्तर है, तो उसे “सार्वजनिक” करना चाहिए क्योंकि “पारदर्शिता” ही इस “अविश्वास” को समाप्त कर सकती है ।

अखबारी तंत्र पर सवाल..

अस्पताल के रजिस्ट्रेशन “निरस्तीकरण” की खबर को बड़ी साइज में छापने वाले “खबरनवीस” इतनी बड़ी घटना के मामले में चुप क्यों हैं ? क्या इसलिए कि किसी का बेटा “ब्लड बैंक” में “कृपा पात्र” कोटे से नौकरी कर रहा है ? या किसी की पत्नी सौ बेड वाले टीबी अस्पताल में “पदस्थ” है ? जब यहाँ का “चौथा स्तंभ” ही “कृपा स्तंभ” बना हुआ है,और उसके “मुँह” से लेकर “अंग विशेष” तक “कृपा बिस्किट” से “ठूँसे” पड़े हैं तो फिर ऐसे “कांड” तो होते ही रहेंगे ।

By systemkasach

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का खुद का चेहरा कितना विद्रूप और घिनौना है..ये आप इस पेज पर देख और समझ सकते हैं । एक ऐसा पेज, जो समाज को आईना दिखाने वाले "लोकतंत्र के चौथे स्तंभ" को ही आइना दिखाता है । दूसरों की फर्जी ख़बर छापने वाले यहाँ खुद ख़बर बन जाते हैं ।

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