गोरखपुर : गोरखपुर में दैनिक जागरण के पत्रकार दुर्गेश त्रिपाठी की कॉल रिकॉर्डिंग ने सीएमओ कार्यालय के प्रांगण में अस्पताल संचालक से हुई 15 लाख रुपये की ठगी की कहानी से काफी हद तक पर्दा उठा दिया है । पत्रकार दुर्गेश त्रिपाठी के कल की वायरल कॉल रिकॉर्डिंग से यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो गयी थी कि लगभग सभी पत्रकारों को यह सच्चाई पता थी कि अस्पताल संचालक से ठगा गया 15 लाख सीएमओ कार्यालय (सही जगह) पहुँचा है । साथ ही इस ठगी के मामले के किरदार “गोल्डन बाबा” और सीएमओ साहब के सम्बंधों के विषय में भी सभी पत्रकारों को पहले से पता था….ऐसा भी पत्रकार साहब की कल की प्रसारित कॉल रिकॉर्डिंग से स्पष्ट हो चुका है । पत्रकार साहब की कॉल रिकॉर्डिंग न केवल पूरे घटनाक्रम की कई परतों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह से कुछ अखबार और उनसे जुड़े लोग सच्चाई जानते हुए भी अपने पाठकों के सामने झूठ परोसकर उनके भरोसे का कत्ल करने में जरा भी संकोच नहीं करते ।
“सिस्टम वेबसाइट मीडिया” से पुरानी खुन्नस का खुला जिक्र
अगर बात यहीं तक सीमित रहती तो शायद इसे एक सामान्य पत्रकारिता विवाद माना जा सकता था । लेकिन पत्रकार दुर्गेश त्रिपाठी ने अपनी बातचीत में पहली बार उस अहम सच को भी उजागर कर दिया, जिसे गोरखपुर के अखबारी गलियारों में लंबे समय से दबाकर रखा गया था । उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अखबारों और पत्रकारिता की आड़ में पल रहे कई दलालों की
“सिस्टम वेबसाइट मीडिया” से पुरानी खुन्नस है ।
खबर मैनेजमेंट के खेल का पर्दाफाश बनी खुन्नस की वजह
इस खुन्नस की वजह भी उतनी ही साफ है । “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” ने समय-समय पर “खबर मैनेजमेंट” के कई खेल उजागर किए, उन चेहरों को बेनकाब किया जो पत्रकारिता के नाम पर दलाली का कारोबार चला रहे थे, कई पत्रकारों और संपादकों को अदालत तक पहुँचा दिया और बिना दस्तावेज़ के खबर चलाने की प्रवृत्ति को खुलेआम चुनौती दी। यही कारण है कि जिन लोगों का कारोबार “मैनेज्ड खबरों” पर टिका हुआ था, उनके लिए “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” हमेशा से एक असुविधाजनक सच बनकर सामने आया ।
गैंगेस्टर लगाने में पत्रकारों की भूमिका का दावा
यही नहीं, पत्रकार दुर्गेश त्रिपाठी अपनी एक अन्य रिकॉर्डिंग में यह कहते हुए भी सुने जा रहे हैं कि “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” पर “गैंगेस्टर” लगाए जाने के पीछे “पत्रकारों” की भूमिका थी । यह बयान सिर्फ एक टिप्पणी नहीं बल्कि बेहद गंभीर “संकेत” है । क्योंकि “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के खिलाफ दर्ज फर्जी मुकदमों और उत्पीड़न से जुड़े मामलों में “सुप्रीम कोर्ट” तथा अन्य मंचों के समक्ष कई जांचें लंबित हैं । इन जांचों के संदर्भ में दुर्गेश त्रिपाठी की यह कॉल रिकॉर्डिंग एक महत्वपूर्ण इनपुट मानी जा रही है । पत्रकार साहब की यह रिकॉर्डिंग इस मामले में 2024 से लंबित कई जाँचों में आँच का काम कर सकती है । कॉल रिकॉर्डिंग में समाहित पत्रकार साहब के “स्वीकरोक्ति” की गूँज, दूर अन्य जिलों में बैठे कुछ और लोगों को भी “असहज” कर सकती है । अब स्वाभाविक रूप से यह उम्मीद की जा रही है कि पत्रकार साहब जो बात अपनी कॉल रिकॉर्डिंग में कह रहे हैं…वही सच अदालत के सामने भी कहने का साहस दिखाएँगे !…वैसे पत्रकार साहब के पास इसके अलावा कोई अन्य विकल्प अब शेष है भी नहीं ! कॉल रिकॉर्डिंग के कुछ अंश नीचे लिंक में सुनें–
सिस्टम वेबसाइट मीडिया, को फँसाने और निपटाने की साजिश वाली रिकॉर्डिंग
दरअसल “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने के आरोपों से जुड़ी यह तीसरी कॉल रिकॉर्डिंग है जिसमें पत्रकारों की भूमिका की चर्चा सामने आई है। इससे पहले की तीन अहम कॉल रिकॉर्डिंग भी जांच में पुष्ट होकर अब अदालत की दहलीज तक पहुँच चुकी हैं । उन रिकॉर्डिंगस में प्रेस क्लब के कुछ पूर्व पदाधिकारियों और पेशेवर अपराधियों से जुड़े लोगों की बातचीत दर्ज है… जिसमें “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को “निपटाने” उस पर “रासुका” लगवाने तथा फर्जी “गैंगरेप” केस में फँसाने तक की साजिश की गई थी ।
अदालत के कठघरे में खड़े पत्रकारों की लंबी सूची..
इसलिए जब पत्रकार दुर्गेश त्रिपाठी यह कहते हैं कि “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” ने कई पत्रकारों को अदालत के कठघरे में खड़ा कर रखा है, तो यह बात गलत भी नहीं है । लेकिन वे यह बताना भूल जाते हैं कि उन मामलों में प्रमुख तौर पर उन्ही के संस्थान दैनिक जागरण से जुड़े सतीश पांडेय, रजनीश त्रिपाठी, संपादक, के अलावा शिवम सिंह, फैय्याज, जफर, सुभाष गुप्ता समेत कई अन्य नाम भी शामिल हैं ।
असाधारण आरोप और आपराधिक साजिश भी
इन सबके खिलाफ आरोप भी कोई साधारण नहीं हैं । आरोप यह है कि आपराधिक साजिश के तहत किसी व्यक्ति विशेष के बारे में अधिकारियों को भ्रामक फीडबैक देना, कूटरचना के माध्यम से बिना सबूत भ्रामक खबर प्रकाशित करना और सूचना प्रौद्योगिकी कानून का दुरुपयोग करना ! ये सब उस तथाकथित पत्रकारिता का हिस्सा था जिसे आज “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” हर स्तर पर चुनौती दे रहा है ।
संदेश साफ है : साक्ष्य आधारित पत्रकारिता ही चलेगी
इस पूरे प्रकरण से एक संदेश बिल्कुल साफ निकलकर सामने आता है कि अगर “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के खिलाफ पत्रकारिता करनी है तो वह सिर्फ और सिर्फ साक्ष्यों के आधार पर ही करनी होगी । टुल्लू छाप पत्रकारिता,भ्रामक फीडबैक,फर्जी खबरों का खेल और बंद कमरों में रची जाने वाली साजिशें बिल्कुल नहीं चलेंगी ।
…………………………………………………………………………
इस मामले में “भड़ास फ़ॉर मीडिया” पर छपी खबर देखने के लिए नीचे लिंक पर जाएं !
गोरखपुर का 15 लाख ठगी कांड : दैनिक जागरण के रिपोर्टर की रिकॉर्डिंग से मचा हड़कंप!
