गोरखपुर : पत्रकारों से इतर बहुत से लोग शायद यह नहीं जानते कि “Press Club” गोरखपुर शहर का सबसे पुराना और ऐतिहासिक “पत्रकार संगठन” माना जाता है । इस संगठन के अस्तित्व में आने के कई वर्षों बाद ही “Gorakhpur Journalist Press Club ” (शास्त्री चौक स्थित) का गठन हुआ था । इसी क्रम में “Gorakhpur Journalist Association” के प्रशासनिक संरक्षक श्री रत्नाकर सिंह द्वारा संगठन की नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई और साथ ही ” Press Club ” गोरखपुर की नई कार्यकारिणी का चुनाव भी संपन्न कराया गया । इस चुनाव का परिणाम जहाँ कुछ लोगों के लिए “चिंता” और “असहजता” का कारण बना, वहीं अनेक “पत्रकारों” और “शुभचिंतकों” के लिए यह “खुशी” और “संतोष” का “संदेश” भी लेकर आया है । इसकी एक प्रमुख वजह यह रही कि इस चुनाव में “सिस्टम का सच” के “फाउंडर” सत्येंद्र कुमार को “Press Club” गोरखपुर का कार्यकारिणी सदस्य घोषित किया गया है । पत्रकारिता के क्षेत्र में सत्येंद्र कुमार के इस “चयन” को कई लोगों ने “संगठन” में एक नई “ऊर्जा” और “सक्रियता” के रूप में देखा है, सत्येंद्र कुमार पर भरोसा जताने के लिए “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” चयनकर्ताओं तथा संगठन के प्रशासनिक संरक्षक “श्री रत्नाकर सिंह” को धन्यवाद ज्ञापित करता है ।

अब बात करते हैं आज की ! आज की ज्ञानवर्धक खबर उन टीवी पत्रकारों के लिए है जिनके अंदर पत्रकारिता करने का ऐसा “कीड़ा” मौजूद है कि वो सही गलत “अंट शंट” कुछ भी किये चले जाते हैं । हो यह रहा है कि चैनल के “स्ट्रिंगर” और “रिपोर्टर” द्वारा चैनल की “माइक आईडी” पर बनाये गए वीडियोज़ को धड़ल्ले से अपने नाम से बने “फेसबुक” पेज पर चलाया जा रहा है । अब चैनल की “माइक आईडी” के प्रभाव के इस्तेमाल को अपने व्यक्तिगत और निजी हित साधने का जरिया बना दिया गया है । टीवी पत्रकारिता में “माइक आईडी” और “चैनल ब्रांड” का इस्तेमाल व्यक्तिगत “सोशल मीडिया” पर करना एक संवेदनशील और आंशिक रूप से “नियमन” से जुड़ा विषय है । इसे समझने के लिए तीन स्तर हैं, कानूनी नियम, संस्थागत नीति, और व्यावहारिक प्रचलन !
माइक आईडी किसकी संपत्ति होती है ?
तमाम टीवी चैनल जैसे आज तक, ज़ी न्यूज़, एबीपी न्यूज़, न्यूज़ 24 इन सभी में “माइक आइडी” और “लोगो” चैनल की “बौद्धिक संपत्ति” मानी जाती है । इसलिए सामान्य सिद्धांत यह है कि “माइक आईडी” चैनल “ब्रांड” की प्रॉपर्टी है और “रिपोर्टर” या “स्ट्रिंगर” को चैनल का “एम्प्लॉई” माना जाता है । इसलिए “माइक आईडी” का इस्तेमाल सिर्फ “चैनल” के लिए “कंटेंट” बनाने के उद्देश्य से ही होना चाहिए ।
क्या चैनल की माइक आईडी को रिपोर्टर अपने फेसबुक पर चला सकते हैं ?
नियमों के हिसाब से सामान्य स्थिति यह होती है कि यदि “चैनल” ने लिखित अनुमति दी है तो “रिपोर्टर” आने “सोशल मीडिया” प्रोफाइल पर अपने नाम के साथ “चैनल” के नाम को भी साझा करते हुए ऐसा कर सकते हैं । और ऐसा करना कुछ “हद” तक सहन किया जाता है । लेकिन अगर रिपोर्टर “माइक आईडी” लगाकर अपनी पर्सनल “फेसबुक पेज” पर एक्सक्लूसिव चलाता है तो इसे कई मामलों में “चैनल” की “नीति” का “उल्लंघन” माना जाता है ।
कानूनी दृष्टि से क्या समस्या हो सकती है ?
चैनल का लोगो “माइक आईडी” एक “ट्रेडमार्क” होता है । बिना अनुमति व्यक्तिगत उपयोग पर “कंपनी” कार्रवाई कर सकती है । “वीडियो फुटेज” आमतौर पर “चैनल” की संपत्ति मानी जाती है इसलिए “कॉपीराइट” के तहत कार्यवाही हो सकती है । अधिकांश टीवी चैनल के “कॉन्ट्रैक्ट” में यह लिखा होता है कि रिपोर्टर द्वारा बनाया गया “कंटेंट” चैनल की संपत्ति होगा । ऐसी स्थिति में “एम्प्लॉई कॉन्ट्रैक्ट वायलेशन” का “तोहमत” लग सकता है । रिपोर्टर के “सोशल मीडिया” व्यवहार का अधिकांश हिस्सा चैनल की “इंटरनल पॉलिसी” से तय होता है इसलिए इसे काफी गंभीर पेशेवर “अनियमितताएं” पैदा हो सकती हैं ।
ग्राउंड पर वास्तविकता क्या है ?
आजकल बहुत से रिपोर्टर “फेसबुक पेज” और “ट्विटर” पर चैनल की “माइक आईडी” के साथ वीडियो डालते हैं क्योंकि इससे उनकी व्यक्तिगत पहचान बनती है,”फॉलोवर” बढ़ते हैं लोकल स्तर पर “प्रभाव” बनता है और बाद में यह पता चलता है कि इसका लाभ बड़े स्तर पर “अवैध धन अर्जन” के लिए किया जा रहा था । इसलिए कई बड़े “चैनलों” में इस विषय पर काफी सख्त “पॉलिसी” भी है ।
कैसे हों सकती है क़ानूनी कार्यवाही
अगर कोई रिपोर्टर किसी बड़े टीवी चैनल की “माइक आईडी” (लोगो वाला माइक) लगाकर अपनी व्यक्तिगत “फेसबुक” या अन्य “सोशल मीडिया” प्लेटफॉर्म पर समाचार चला रहा है, तो उसके खिलाफ कई स्तरों पर शिकायत या कार्यवाही संभव है ।
शिकायत कौन कर सकता है ?
इस मामले में स्वयं “चैनल” या कोई ऐसा व्यक्ति जो इस दुरुपयोग की जानकारी दे उसकी शिकायत मानी जायेगी । व्यावहारिक “सच्चाई” यह है कि “ग्राउंड” पर अक्सर “चैनल” के कई स्ट्रिंगर / जिला रिपोर्टर अपने “फेसबुक” पर माइक “आईडी” के साथ “वीडियो” डालते हैं जो कि “कानूनी दृष्टि” से “अनुचित” और “अवैध” है ।
वैधानिक चेतावनी :- यह पोस्ट किसी “धमाका” या “जिंदाबाद” टाइप “फेसबुक पन्ने” के विषय में नहीं है, इसलिए “गफ़लत” में स्वयं को “अहमियत” देने जैसी “गलतफहमी” बिल्कुल भी न पालें ।

