बयान, भूख और गोलियाँ : व्यवस्था की तीन अलग-अलग तस्वीरें !

यूपी : “ईरान” के लिए “छाती” पीटने वालों का बढ़िया “इलाज” कर दूँगा… “रील” बनाने वालों की “रेल” बना दूँगा…सड़क पर “नमाज” पढ़ता कोई दिखा तो सीधा उठाकर “जेल” भेज दूँगा…ये बयान “संभल” के सीओ “कुलदीप कुमार” का है और इस बयान ने फिलहाल “सनसनी” मचा रखी है । सीओ साहब बिल्कुल ठीक कर रहे हैं ! शायद इसलिए कि वो “अनुज चौधरी” साहब का जलवा पहले देख चुके हैं । वो देख चुके हैं कि “व्यवस्था” के “अभयदान” वाले “सर्वोच्च” शिखर पर बैठे “चौधरी साहब” के खिलाफ FIR का आदेश देने वाले “जज” का तबादला तक हो चुका है । जिस दौर में भारत के प्रधानमंत्री “ईरान” के राष्ट्रपति से बात कर सारा मामला सुलटाने में लगे हैं..जब देश के नागरिक “होर्मुज स्ट्रेट” से अपने जहाजों को सुरक्षित निकलने देने की खातिर “ईरान” से मेलजोल की दुआएं माँग रहे हैं.. जिस दौर में “ईरानी” समुद्री तटों के किनारे से गुजरते जहाज में सवार भारतीय नागरिकों का “जीवन” दांव पर लगा है….उस दौर में “संभल” के सीओ साहब “ईरान” को लपेटते हुए बयान बाजी कर रहे हैं…और इस बेवजह की “बयानबाजी” पर कुछ लोग ऐसे “खुश” हो रहे हैं जैसे “लखनऊ” के “कुकरैल बंधे” पर “घड़ियाल” गिनते हुए किसी “तपस्वी” को एकाएक “वराह अवतार” के “दर्शन” हो गए हों ! वैसे भी हमारे “सीओ साहब” के सामने आखिर “ईरान” कि औकात ही क्या है ? वो जब चाहें “ईरान” को “वीरान” बना सकते हैं ! वो जब चाहें “ईरान” को “संभल” का “कस्बा” घोषित कर सकते हैं और “अफगानिस्तान” को “चंदौसी” का कोई मोहल्ला !

सीओ साहब के बयान से कनेक्ट करते हुए अब कानपुर का एक वायरल वीडियो देखिए !

 

अब ये तो “गजब” हो गया , कानपुर पुलिस कह रही है कि LPG “सिलिंडर” की कोइ कमी नहीं है..फिर ये “कानपुर” में लोग खाली LPG सिलेंडर लेकर सड़क पर “धूप” में क्यों खड़े है ! बाद में ध्यान देकर सोचा तो इस नतीजे पर पहुँचा कि ये वही लोग हैं जिन्हें देश मे “अमन चैन” पसंद ही नहीं है । इनसे “व्यवस्था” और “देश” की तरक्की देखी ही नहीं जाती । जब देखो “खाना” क्या खाएंगे किस चीज पर “पकाएंगे” जैसा “राँड रूदन” मचाये रहते हैं । इन लोगों को शायद ये पता ही नहीं है कि “कानपुर” पुलिस हर चीज का हल है । यदि पुलिस चाहे तो “जेल” भेजकर आपको “खाना” पकाने से लेकर “गैस” भराने तक के सारे “झंझटों” से मुक्ति एक साथ दिला सकती है !क्योंकि जेल में न “राशन” की दिक्कत है.. न “पकाने” का झंझट है.. और न कोई LPG सिलिंडर की “किल्लत” है । इसलिए “पुलिस” की बात मानिए और “नोटबन्दी” से लेकर “राशन” की दुकान तक…और “आधार कार्ड” से लेकर “गैस भराने” तक हर चीज के के लिए “सड़कों” पर बार बार “लाइन” लगाकर “शांति व्यवस्था” से “खिलवाड़” करने की “आदत” से “बाज” आइए ।

अब बदायूँ की दुस्साहसिक घटना का वीडियो देखिए !

 

ऊपर वीडियो में “बदायूँ” पुलिस गाड़ी दो “बॉडी बैग” निकालती दिखाई दे रही है । ध्यान से देखिए तब पता चलेगा कि इन दोनों “बॉडी बैग” में किसी मनुष्य की “देह” नही हैं…बल्कि इनमें से एक बैग में “कानून” और दूसरे बैग में “व्यवस्था” की “लाश” है….जो मरी पड़ी है ! ये “बदायूं” के सैजनी में “हिंदुस्तान पेट्रोलियम” के प्लांट की “तस्वीर” है । यहाँ “अजय प्रताप सिंह” नाम के आदमी ने “मैनेजर” और “डिप्टी मैनेजर” की सरेआम गोलियां चलाकर “हत्या” कर दी है । कुछ समय पहले “मृतक” मैनेजर सुधीर गुप्ता और डिप्टी मैनेजर हर्षित मिश्रा दोनो ने पुलिस से अपनी “सुरक्षा” की “गुहार” लगाई थी । मगर ये “मृतक” भूल गए थे कि व्यवस्था की “तंद्रा” तभी टूटती है जब वो “लाश” देख लेती है ।

घटना नई लेकिन पुलिस स्टोरी वैसी ही पुरानी !

घटना के विषय मे जो “तथ्य” सामने आए हैं उनके अनुसार बताया जा रहा है कि दो व्यक्तियों की “हत्या” कर अजय “डंके” की चोट पर “थाने” पहुँचता है और “सरेंडर” कर देता है । पुलिस गिरफ्तार करती है और चारों तरफ़ “शोर” हो-हल्ला मचना शुरू हो जाता है । इस “चैलेंजिंग वारदात” के भीषण दबाव में घिरी “पुलिस”….हत्या के आरोपी “अजय प्रताप सिंह” से “कत्ल” का “औज़ार” बरामद करने की ख़ातिर उसे उसकी बतायी हुई जगह “मुड़सेना” के जंगल ले जाती है । वहाँ पहुँचकर “हत्या” का वही आरोपी अजय प्रताप सिंह जो ख़ुद “थाने” में “सरेंडर” कर चुका होता है…वो “जंगल” में छिपाए गए “तमंचे” से पुलिस पार्टी पर “फायरिंग” कर देता है ! और फिर पुलिस की जवाबी “फायरिंग” में “गोली” न इधर जाती है, न उधर ! वो सीधे “हत्यारोपी” के दोनों “पैरों” का “चरणस्पर्श” करती है और उसे अस्पताल पहुँचा देती है ! और इसी के साथ “बदायूं” घटना की “फ़िल्म” का “द एन्ड” हो जाता है । आइए हम सब मिलकर “अजय प्रताप सिंह” के “पैरों” के अच्छे “इलाज” की “दुआ” करें…क्योंकि जो “मार” दिए गए उनके लिए अब “दुआ” करने से भी क्या फायदा ?

व्यवस्था की मूर्धन्यता से उगते हुए रक्तबीज !

ये घटनाएँ बता रही हैं कि “सड़” चुकी “व्यवस्था” का “फोड़ा” अब “शुंभ-निशुंभ” और “रक्तबीज” सरीखे “दानव” का रूप ले चुका है ! यही कारण है कि जब तक “लाश” “रक्त” और “उत्पीड़न” की इन्तेहाँ न हो जाय, तब तक “व्यवस्था” की “तंद्रा” नहीं टूटती । हालात ऐसे हैं कि “व्यवस्था” की “मूर्धन्यता” से बहा जितना भी “रक्त” ज़मीन पर गिर रहा है, उतने ही “रक्तबीज” फिर से “पैदा” कर दे रहा है । हमारे जिम्मेदार अगर “धृतराष्ट्र” होते तो फिर भी ग़नीमत थी लेकिन इन्होंने तो “गांधारी” की तरह आँखों पर पट्टी बाँध लेने का “विकल्प” चुन लिया है !

By systemkasach

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