गोरखपुर : गोरखपुर की “पत्रकारिता” जगत में इन दिनों दो अलग-अलग घटनाओं को लेकर चर्चाओं का बाजार “गर्म” है। पहली चर्चा गोरखपुर जर्नलिस्ट “प्रेस क्लब” के चुनाव से जुड़ी है, जबकि दूसरी हलचल एक बार फिर शुरू होने की खबरों के बीच “सहारा” समूह के अख़बार को लेकर है। जानकारी के अनुसार, गोरखपुर जर्नलिस्ट “प्रेस क्लब” के हालिया चुनाव में चुनाव अधिकारी की जिम्मेदारी निभाने वाले “बागीश चंद्र श्रीवास्तव” समेत नौ नामजद लोगों के विरुद्ध बाराबंकी जनपद के कोतवाली थाना क्षेत्र में एक मुकदमा दर्ज होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह मुकदमा 4 दिसंबर 2025 को दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप फर्जी “अनुबंध” तैयार कर कंपनी की भूमि बेचने का प्रयास करने और जमीन पर “जबरन” कब्जा करने की कोशिश से संबंधित बताए जा रहे हैं ।
चुनाव अधिकारी रहे श्रीवास्तव जी पर सवाल !
यही “तथ्य” अब पत्रकारिता जगत में चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह उठ रहा है कि “पारदर्शिता” और “शुचिता” की बात करने वाले पत्रकारों के “संगठन” में यदि चुनाव अधिकारी पर पहले से “मुकदमा” दर्ज था, तो क्या इस “तथ्य” का उल्लेख उनके 2026 के हलफनामे में किया गया था ? जानकारों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में “पारदर्शिता” बनाए रखने के लिए उम्मीदवारों के साथ-साथ महत्वपूर्ण “पदों” पर नियुक्त व्यक्तियों द्वारा भी अपने ऊपर दर्ज “मुकदमों” की जानकारी “हलफनामे” में देना आवश्यक माना जाता है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से यह “प्रश्न” उठ रहा है कि क्या “चुनाव अधिकारी” ने अपने “शपथपत्र” में इस “मुकदमे” का उल्लेख किया था ?
क्या पूरी चुनावी प्रक्रिया अदालती कटघरे में खड़ी की जाएगी ?
यदि इसका “उल्लेख” किया गया था तो “स्थिति” स्पष्ट है, लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो क्या यह पूरी “चुनावी प्रक्रिया” की निष्पक्षता पर सवाल खड़े नहीं करता ? यह भी चर्चा है कि चुनाव में पराजित “प्रत्याशी” यदि चाहें तो इस आधार पर पूरी “चुनाव प्रक्रिया” को अदालत में घसीट सकते हैं । हालांकि फिलहाल इस मामले में कोई “औपचारिक” आपत्ति सामने नहीं आई है, लेकिन पत्रकारिता जगत के “गलियारों” में यह सवाल “मगरमच्छ” बनकर तैरने जरूर लगे हैं ।
दूसरी खबर नेपाल के खूबसूरत रिजॉर्ट से !
इधर दूसरी ओर “मीडिया” जगत में एक और बड़ी खबर धीरे-धीरे आकार ले रही है । लंबे समय से बंद पड़े “सहारा समूह” के अख़बार को फिर से शुरू किए जाने की “चर्चाएं” तेज हो गई हैं । सूत्रों के मुताबिक इस बार इसके “संचालन” की कमान भारत एक्सप्रेस चैनल के मालिक मुख्तार “उपेंद्र राय” के हाथों में है जो पहले भी “सहारा समूह” में महत्वपूर्ण “पदों” पर रह चुके हैं । बताया जाता है कि “संपादक” पद के लिए शुरू से ही “बंका का डंका” घनाघन बज रहा था.. लेकिन हाल के घटनाक्रम ने “समीकरण” बदल दिए हैं । सूत्रों का दावा है कि हाल ही में नेपाल के एक “क्लब” में “शराब” और “जुए” से जुड़ा एक विवाद सामने आया, जिसमें कथित रूप से एक व्यक्ति ने “नशे” की हालत में अपनी “कार” गिरवी रखकर अपनी “प्रेमिका” के साथ जुआ खेला । बताया जाता है कि “रकम” वापस न मिलने के कारण “देनदार” ने उस “गाड़ी” को अब भी “नेपाल” में ही खड़ा कर रखा है और इस मामले को लेकर “सिद्धार्थनगर” जिले के एक “थाने” में तहरीर दिए जाने की चर्चा भी सामने आई है ।

कहा जा रहा है कि यह मामला जब “सहारा” के नए “खेवनहार” तक पहुँचा तो “संपादकीय” पद को लेकर चल रही “चर्चाओं” की दिशा बदलने लगी । बताया जा रहा है कि इसी बीच “गोरखपुर” में पत्रकारिता के “मैनेजमेंट गुरु” के रूप में चर्चित एक वरिष्ठ पत्रकार ने परिस्थितियों का “रुख” अपने पक्ष में मोड़ने की पूरी “कसरत” कर डाली । फिलहाल इन दोनों घटनाओं को लेकर “आधिकारिक” स्तर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पत्रकारिता जगत में इन चर्चाओं ने “हलचल” जरूर पैदा कर दी है ।
नोट : नेपाल सम्बंधित प्रकरण से संबंधित खबर में नाम और दस्तावेज पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होने के बाद ही सार्वजनिक किए जाएंगे । इसलिए अनावश्यक रूप से फोन कर नाम पूछने से परहेज करें ।

