नेपाल : दो दिन पहले नेपाल के एक खूबसूरत रिजॉर्ट में घटी एक घटना की खबर “सिस्टम वेबसाइट” पर प्रकाशित हुई थी । उस समय यह मामला महज एक “विवादास्पद” लेनदेन की घटना लग रही थी, और इस घटना से गोरखपुर के “पत्रकारिता” जगत का कोई सीधा “कनेक्शन” दिखाई नहीं दे रहा था । लेकिन अब इस घटना के तार धीरे-धीरे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर सीधे गोरखपुर के “पत्रकारिता जगत” से जुड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं ।
नेपाल के भैरहवां स्थित “टाइगर पैलेस” रिजॉर्ट में घटित इस पूरे घटनाक्रम का “कनेक्शन” अब खुलकर सामने आने लगा है, जो अब स्थानीय पत्रकारिता जगत में भी “हलचल” पैदा कर रहा है ।
क्या था पूरा मामला ?
प्राप्त इनपुट्स के अनुसार “नेपाल” के भैरहवां में स्थित “टाइगर पैलेस” रिजॉर्ट के होटल “बारहसिंगा लियो क्लब एंड बार” में आगरा निवासी “राहुल कांधारी” और उनके साथ मौजूद “साजिया” नाम की महिला ने “ओम प्रकाश मिश्र” नामक व्यक्ति से “चार लाख सत्तर हजार” रुपये नकद लिए । बताया जा रहा है कि इस रकम के बदले “राहुल कांधारी” ने अपनी चार पहिया गाड़ी ओम प्रकाश के पास “गिरवी” रख दी और भरोसा दिलाया कि “भारत” लौटकर “रकम” वापस कर देंगे तथा अपनी “गाड़ी” वापस ले लेंगे । इस लेन-देन का पूरा “वीडियो” भी ओम प्रकाश मिश्र द्वारा “रिकॉर्ड” किया गया । सूत्रों के अनुसार यह पूरा प्रकरण जुआ, शराबखोरी और ऐय्याशी से जुड़ा हुआ था, जिसकी वजह से मामला और भी संवेदनशील हो गया ।
गोरखपुर कनेक्शन ने खड़े किए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में गोरखपुर से जुड़े “राष्ट्रीय सहारा” मीडिया संस्थान के प्रबंधक “पीयूष बंका” की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं । पीड़ित पक्ष का आरोप है कि “पीयूष बंका” ने “राहुल कांधारी” की गाड़ी छुड़वाने का “ठेका” लिया और अपने कथित “उच्च” संपर्कों का इस्तेमाल करते हुए पीड़ित ओम प्रकाश मिश्र पर गाड़ी छोड़ने के लिए दबाव बनवाना शुरू कर दिया और दबाव न मानने पर “फर्जी मुकदमे” में फँसाने की धमकी दी । बताया जा रहा है कि इस संबंध में पीड़ित ओम प्रकाश मिश्र ने “सिद्धार्थनगर” जिले की बांसी कोतवाली में “तहरीर” देने के साथ-साथ “मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल” पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई है ।
पहले भी विवादों में रहे हैं पीयूष बंका !
दिलचस्प बात यह है कि “पीयूष बंका” का नाम इससे पहले भी विवादों में आ चुका है । कुछ ही समय पहले “राष्ट्रीय सहारा” गोरखपुर के कर्मचारियों ने उनके खिलाफ जोरदार “नारेबाजी” करते हुए उनके “इस्तीफे” की मांग की थी । उस दौरान यह आरोप सामने आया था कि लगभग 70 वर्षीय “पीयूष बंका” स्वयं पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं, जबकि 40 वर्षों से कार्यरत सहारा के कर्मचारियों पर “त्यागपत्र” देने का दबाव बनाया जा रहा है । कर्मचारियों के विरोध से नाराज होकर “पीयूष बंका” ने सार्वजनिक रूप से जो “प्रतिक्रिया” दी, उसने पूरे “प्रिंट मीडिया” जगत को “चौंका” दिया था ।

बताया जाता है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने गुस्से में अपने कपड़े तक “फाड़” दिए और “अर्धनग्न” अवस्था में आ गए ।
उस समय उन्होंने “भावनात्मक” अंदाज में कहा था कि…..
“जूता निकाल के हमको मारो… जितना मार पाओ उतना मारो, क्योंकि मैं इसी का पात्र हूँ। लेकिन याद रखना, मैं राष्ट्रीय सहारा अखबार जब तक जीवित रहूँगा, नहीं छोड़ूँगा। जीते जी नहीं छोड़ूँगा। मारना चाहते हो तो मारो!”
सवाल अभी भी बाकी हैं !
संभव है कि उस समय “पीयूष बंका” द्वारा कही गई यह बात “सहारा संस्थान” के प्रति उनकी “निष्ठा” या “व्यक्तिगत भावनात्मक” जुड़ाव को दर्शाती हो या फिर उम्र के इस “पड़ाव” पर “सहारा” पर उनकी “निर्भरता” को ! लेकिन जब “नेपाल” की इस घटना में उनका नाम सामने आ रहा है, तो कई नए सवाल खड़े हो रहे हैं ।
● आखिर “बंका साहब” का उस सट्टेबाज व्यापारी से क्या संबंध है ?
● व्यापारी के साथ उसकी महिला मित्र “साजिया” कौन है ?
● इन दोनों से “बंका साहब” का कौन-सा ऐसा रिश्ता या संपर्क है, जिसने उन्हें इस विवाद में कूद कर अपना “डंका” बजवाने के लिए प्रेरित किया ?
● और क्या किसी पीड़ित व्यक्ति पर दबाव बनाने के लिए “पत्रकारिता” और उसके “प्रभाव” का इस्तेमाल करना उचित है ?
यह पूरा मामला केवल एक लेन-देन या विवाद का नहीं, बल्कि “पत्रकारिता” की “विश्वसनीयता” और उसके “दुरुपयोग” से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़ा करता है । बेहद पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं कि आज गोरखपुर में पत्रकारिता जगत के कुछ “कुकुरमुत्ते” पत्रकारिता का नकाब ओढ़कर “प्रताड़ना” के नए नए “अध्याय” लिख रहे हैं और पत्रकारिता की आड़ में “फर्जी मुकदमों” को एक “व्यवस्थित” पेशा बना कर “इंसानियत” की “बोटियाँ” नोच रहे हैं । कभी-कभी लगता है कि यदि “पत्रकारिता” की “जमीन” पर उग आए इन “मक्कारी” “बेकारी” और “गद्दारी” के “पौधों” को ईमानदारी की “खुरपी” से समय रहते “उखाड़” कर फेंक दिया होता, तो शायद “पत्रकारिता” की “गरिमा” आज ज्यादा “सुरक्षित” होती ।
बंका साहब के “कपड़े” उतारने और नेपाल में “गाड़ी” गिरवी रखने का वीडियो देखें !

