गोरखपुर : तिवारीपुर थाना अब कानून के पालन करने का केंद्र कम और निजी बदले की और जेब गरम करने की पटकथा लिखने का मंच ज्यादा नजर आने लगा है । सवाल सीधा सा है कि जब एक थाना प्रभारी अपने ही वरिष्ठ अधिकारी के आदेश को मानने से इंकार कर दे, तो आम नागरिक की औकात थानों में क्या रह जाती है ? कल की घटना ने इस सवाल को हकीकत में बदल दिया है।एक पीड़ित महिला जब एसपी सिटी के पास न्याय की गुहार लेकर पहुँचती है, तो स्पष्ट आदेश होता है कि मुकदमा दर्ज करो । लेकिन तिवारीपुर थानेदार के लिए यह आदेश उनकी भ्रष्ट व्यवस्था और अहम पर चोट बन जाता है । नतीजा यह हुआ कि महिला को दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे तक थाने में बैठाकर रखा गया । FIR के नाम पर मानसिक प्रताड़ना, धमकी और दबाव ! और यह सब तब हो रहा था, जब ऊपर से स्पष्ट आदेश मौजूद था ! यह केवल कोई चूक नहीं बल्कि सीधे-सीधे अवैध हिरासत और वर्दी के दुरुपयोग का मामला है । अवैध हिरासत का आरोप इसलिए लग रहा है क्योंकि पीड़ित महिला ने घबराते हुए फोन कर इस बात की जानकारी अपने पति को दी । सुने कॉल रिकॉर्डिंग…
कैसे शुरू हुई तिवारीपुर थानेदार की बदलापुर पटकथा ?
गोरखपुर : घोषीपुर का एक परिवार ..जिस परिवार के मुखिया की कुछ महीनों पहले मौत हो जाती है । परिवार के मुखिया की मौत के बाद पेंशन माँ को मिलना शुरू हो जाता है । पिता जब तक जिंदा थे घर की सारी जिम्मेदारी उठाते रहे । परिवार में दो लड़के हैं बड़ा भाई सतेंद्र और छोटा शैलेन्द्र ! बड़े बेटे ने दस लाख का बैंक से कर्ज लेकर व्यापार शुरू किया जो ठप्प हो गया । बैंक के रखे गुंडे गैर कानूनी रूप से घर मे घुसकर पत्नी के साथ अपमानजनक व्यवहार करने लगे । महिला ने तिवारीपुर पुलिस से शिकायत की लेकिन मदद की बजाय घुड़की मिली । थाने से मदद तो नहीं मिली लेकिन जब गुंडई का मामला तूल पकड़ने लगा तो लोन का मामला अधिवक्ता की मदद से कोर्ट पहुँच गया । लेकिन जैसे ही महिला ने पुलिस की शिकायत ऊपर तक पहुँचायी ,उसी दिन से “बदलापुर स्क्रिप्ट” लिखी जाने लगी । शायद इसीलिए कहतें हैं कि “भ्रष्ट पुलिसकर्मी” ज्यादा दिन तक एक जगह जमें रहें तो थाना अराजकता के “अड्डे” में “तब्दील” हो जाता है ।
क्या था घटनाक्रम ?
छोटा भाई शैलेन्द्र नौसढ़ स्थित टाइड वाशिंग पाउडर के गोदाम में काम करता है । व्यापार ठप्प होने के बाद फ़िलहाल बड़ा भाई बेरोजगार है । घर के मुखिया की मौत के बाद शुरू से ही मनबढ़ रहे छोटे भाई शैलेन्द्र ने खुद को घर का शहंशाह घोषित करना शुरू कर दिया । अभी चार दिन पहले पानी के विवाद में बड़े भाई की पत्नी को छोटे भाई शैलेन्द्र ने मारकर लहू लुहान कर दिया । बीच बचाव करने पहुँचे बड़े भाई को भी लहू लुहान किया गया । देखें तस्वीर
पीड़ित महिला रीता ने घटनास्थल से 112 नंबर पर फोन कर पुलिस सहायता ली लेकिन देवर शैलेन्द्र पुलिस के आने से पहले ही घर से फरार हो गया ! पीड़ित महिला तिवारीपुर थाने पहुँची लेकिन थानेदार साहब ने मेडिकल कराने और मुकदमा लिखने से इंकार कर दिया । थाने पर ही पीड़ित महिला से तिवारीपुर थाने के दरोगा हिमांशु राय से मुलाकात हुई । दरोगा जी महिला को पहचान गए । बोले, कि तुम तो वही हो न जिसके पति का लोन वाला मामला था ! तुमने ही शिकायत की थी न हमलोगों की अधिकारियों से ! दरोगा जी बोले घबराओ मत, अब समझाते हैं तुम्हारे पति को और तुमको ! अपने पति को बुलाओ यहाँ पर !
थानेदार साहब का चमत्कार…
दूसरे दिन तिवारीपुर थाने के थानेदार साहब ने चमत्कार कर दिया । मारपीट के बाद घर से फरार हुए छोटे भाई को बुलाया तो साथ में माँ भी थाने पर गयी । थानेदार साहब ने आरोपी की माँ से पीड़ित महिला और उसके पति के खिलाफ तहरीर लेकर अपने पास रख लिया । थानेदार साहब ने पीड़ित महिला से बार बार उसके पति को थाने पर भेजने का दबाव डालना शुरू कर दिया । पीड़ित महिला थानेदार साहब के बदलापुर संस्करण को किंकर्तव्यविमूढ़ होकर देख रही थी और सोच रही थी उसके साथ हुई मारपीट की घटना से उसके पति का क्या कनेक्शन है ? महिला ने सुना था कि थानेदार साहब जैसे लोग सिर्फ पैसा लेकर काम करते है लेकिन यहाँ बात सिर्फ पैसे की नहीं थी बल्कि यहाँ पैसे के साथ बदलापुर की तस्वीर भी जुड़ी थी । तिवारीपुर पुलिस को पीड़ित महिला की हुई बर्बर पिटाई से कोई सरोकार नहीं था । वो सिर्फ पीड़ित महिला के खिलाफ बदलापुर की स्क्रिप्ट तैयार कर रही थी । पीड़ित महिला के घर पूछताछ के बहाने पहुँची पुलिस के पूछताछ की वो ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई है जिसे पूछताछ के दौरान महिला के घर पर इकट्ठा हुए किसी पड़ोसी द्वारा रिकॉर्ड किया गया था । पीड़ित महिला की सुनवाई नहीं होने पर महिला ने फिर वही गलती दोहराई जो उसने लगभग 6 माह पहले की थी । सुनवाई नही होने पर पहुँच गयी एस पी सिटी साहब के पास ! साहब ने फोन पर थानेदार साहब को फटकार लगाई और पीड़ित महिला का मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया । एस पी सिटी साहब के आदेश के बाद भी तिवारीपुर थाने से पीड़ित महिला के पति को फोन कर थाने पर आने का दबाव बनाया जाता रहा । जब इस मामले की जानकारी महिला के अधिवक्ता द्वारा “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को दी गयी तो बार बार फोन कर दबाव बनाने वाले पुलिसकर्मियों से “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” ने बात की । गलत काम का जैसे कोई भी जवाब नहीं होता वैसे ही पुलिसकर्मियों के पास हमारे सवालों का भी कोई जवाब नही था । आप भी सुनिए !
थानेदार आया..भाई थानेदार आया !
महिला के पक्ष में एसपी सिटी का आदेश…महिला के अधिवक्ता की पैरवी और मीडिया के सवाल जवाब से थानेदार साहब इतनी बुरी तरह झल्ला गए कि उन्होंने साँप को रस्सी और रस्सी को साँप बताने का फार्मूला गढ़ दिया । पीड़ित महिला पर कोई असर न होता देख थानेदार साहब ने विपक्षियों को भी थाने पर बुला लिया । पीड़ित महिला का मुकदमा एस पी सिटी साहब के आदेश के बाद भी न लिखने वाले थानेदार साहब ने झल्लाहट में दो दो मुकदमे लिख डाले । पीड़ित महिला ने 112 पर शिकायत की..थाने पर तहरीर दी…एसपी सिटी साहब से मिली.. पर मुकदमा दर्ज नहीं हुआ । लेकिन जिस आरोपी ने कोई रिपोर्ट नही की उस आरोपी की माँ से ली गयी तहरीर पर पीड़ित महिला और उसके पति के खिलाफ थानेदार साहब ने मुकदमा लिख डाला । एस पी सिटी साहब का आदेश दरकिनार कर थानेदार साहब ने सबसे पहले आरोपी पक्ष की ओर से कल शाम को पौने सात बजे मुकदमा लिखा और जिस पीड़ित महिला के लिए एस पी सिटी साहब का आदेश था उसका मुकदमा शाम 7 बजे लिखा गया । सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि पीड़ित के गंभीर चोटों को नजर अंदाज कर आरोपियों के खिलाफ मामूली दो धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया लेकिन आरोपी की माँ की तरफ से मिली तहरीर पर पीड़ित महिला और उसके पति के खिलाफ चार धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया । सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि थानेदार साहब ने FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 333 जोड़ दी । वही धारा, जो सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान गंभीर चोट पहुंचाने पर लगती है और जिसमे 10 साल की सजा का प्रावधान है । लेकिन सवाल यह है कि FIR में कौन सा सरकारी कर्मचारी घायल हुआ है ? किसकी ड्यूटी में बाधा डाली गई और क्या है उसका नाम ? जवाब…कोई नहीं ! तो फिर यह धारा क्यों ? वो इसलिए कि डर पैदा कर दमन किया जाए, जेल भेजने की धारा का डर दिखाकर उत्पीड़न और वसूली की पटकथा शुरू की जाए । देखें FIR
थानेदार साहब का रिवर्स जस्टिस !
ऊपर दी गयी FIR से स्पष्ट है कि उसमें किसी भी सरकारी कर्मचारी का जिक्र नहीं है । बताईये थानेदार साहब कि FIR में कौन है सरकारी कर्मचारी ? क्या है उसका नाम ? पीड़ित का आरोप है कि आपने आरोपी पक्ष से तीस हजार रुपये लिए ताकि आपकी जेब भी गर्म हो जाये और आपका बदला भी पूरा हो जाये । आपके बदलापुर की भावना इतना प्रबल अट्टहास कर रही है थानेदार साहब कि भाँग के नशे में बौराकर आपने आरोपी पक्ष की माँ को हो सरकारी कर्मचारी बता दिया और फर्जी तौर पर लिखे गए मुकदमे में 333 जैसी गंभीर धारा को जोड़ दिया । अंगूरी के आगोश से बाहर आकर पता करिये थानेदार साहब कि आरोपी की माँ सरकारी कर्मचारी नहीं बल्कि एक गृहणी है ? आपके कार्यप्रणाली, शुचिता, निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ ही खुद को सिंघम समझने का ढोल अब फट चुका है । एस पी सिटी साहब के आदेश के तीन घंटे बाद भी आप आदेश का अनुपालन नहीं करने का मन बनाये बैठे थे जिसका प्रमाण वो कॉल रिकॉर्डिंग है जिसमे पीड़ित महिला के अधिवक्ता से हुई आपकी बातचीत रिकॉर्ड है ।
रिकॉर्डिंग में आप द्वारा घटना का गलत एक्सप्लेनेशन देना यह बताता है थानेदार साहब कि आप आरोपी पक्ष की तरफ से पूरी तरह “बायस्ड” थे । प्रमाण है कि यदि यहाँ मसला सास का होता तो सास आपसे कंप्लेन करती लेकिन सास को कभी कोई शिकायत थी ही नहीं । पीड़ित के खिलाफ 333 bns (सरकारी कर्मचारी ) के विषय में लिखी गयी आपकी झूठी FIR ही आपके खिलाफ सबसे बड़ा प्रमाण है ।
खुद तो डूबे और आरोपियों को भी ले डूबे थानेदार साहब !
आरोपी पक्ष के नमक का हक अदा करने के चक्कर में और बदले की भावना में थानेदार साहब बहुत बड़ी “चूक” कर गए । न चाहते हुए भी आरोपी शैलेन्द्र और उसकी कथित पत्नी सीता के साथ ही आरोपी की माँ उषा के भाग्य में भी जेल की दीवारें लिख दीं । हुआ यूँ की आरोपी की माँ की तहरीर में जिस महिला सीता को शैलेन्द्र की पत्नी बताकर मुकदमा दर्ज कराया गया है उस औरत सीता की शादी ही अवैध है । सीता आरोपी शैलेन्द्र की पत्नी हो ही नहीं सकती क्योंकि पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी को कानूनन शून्य माना जाता है और ऐसी शादी करने और कराने वालों के लिए कानून में सात साल की सजा का प्रावधान है । ये आपने क्या कर दिया थानेदार साहब ? क्योंकि छानबीन के दौरान ये पाया गया है कि आरोपी शैलेन्द्र ने अपनी पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी की है । पहली पत्नी और आरोपी शैलेन्द्र तथा आरोपी की माँ उषा देवी के बीच मऊ जनपद न्यायालय में घरेलू हिंसा, मेंटेनेंस और तलाक का मुकदमा विचाराधीन है । अब तक आरोपी शैलेन्द्र और उसकी माँ उषा देवी सिर्फ इसलिए बचते रहे क्योंकि आरोपी शैलेन्द्र की दूसरी शादी का कोई प्रमाण अब तक मौजूद नहीं था । इस स्थिति में यह कहा जा सकता है थानेदार साहब कि आपने आरोपी की माँ से FIR नहीं बल्कि उसके अपराध का “कबूलनामा” लिखवा लिया । ये भी लिखवा लिया कि सिर्फ शादी ही नहीं बल्कि शैलेन्द्र की पत्नी गर्भवती भी है ! अब अगर ये FIR मऊ जनपद में विचाराधीन इन सभी मुकदमों में सबूत बनाकर लग जाएं तो सिर्फ आरोपियों और उसकी माँ की ही नहीं बल्कि आपकी भी परेड चालू हो जाएगी ! आप आरोपी की जिस माँ उषा देवी को 80 साल की वृद्ध महिला बताकर दयावान बनने का स्वांग रच रहे थे न थानेदार साहब…उस 80 साल की वृद्ध महिला को कमर से बिल्कुल सीधा खड़े होकर आज सरपट भागते हुए देखा गया है । आपके “बदलापुर” की कथा ने सिर्फ आपको अधिकारियों की नजरों में ही नहीं गिराया है थानेदार साहब…. बल्कि आपको हर एक पीड़ित की नजर में भी बहुत नीचे तक गिरा दिया है । आपकी बदलापुर स्क्रिप्ट ने आरोपी शैलेन्द्र और उसकी माँ के लिए ही सिर्फ जेल के दरवाजे नहीं खोल दिये बल्कि उस कथित पत्नी सीता और उसके कोख में पल रहे बच्चे के जीवन को भी सदा के लिए अनिश्चितता के “अंधकार” में धकेल दिया है । आप जैसे चंद वर्दीधारीयों के कारण ही डिपार्टमेंट हमेशा सवालों के घेरे में रहता है थानेदार साहब ! आप जैसे लोगों को तो इस्तीफा दे देना चाहिए लेकिन आप जैसे लोग नौकरी इसलिए नहीं छोड़ते क्योंकि ऐसी “रंगबाजी” किसी और नौकरी में कहाँ मिलेगी ? अरे भाई एक तो पुलिस की “वर्दी” उपर से धन की “जर्दी” तो फिर काहे नहीं होगी “गुण्डागर्दी” ?

