सीएम प्रोग्राम में घुसपैठ काण्ड का अगला भाग : किसने दी बद-किरदारों और बदमाशों को एंट्री ? कौन है जिम्मेदार ?

गोरखपुर : एक साजिश के तहत जब नकली नोट के मुल्ज़िम के साथ देवरिया के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी की तस्वीर सामने आई तो हंगामा-ए-आम बरपा ! लेकिन इस वाकये से निज़ाम-ए-इंतज़ामिया ने कोई सबक हासिल नहीं किया । ये तमाम वाक़िया दरअसल इंतज़ामिया की मिलीभगत और नाकामी का नतीजा था, जिसकी वजह से शलभ मणि जैसी शख्सियत का नाम बेवजह सियासी साज़िशों में घसीटा गया और मुख़ालिफ़ीन (विरोधियों) को दुष्प्रचार का खुला मौक़ा मिला । कुछ इसी क़िस्म की साज़िश गोरखपुर में भी रची गई, जब सूबे के सरबराह योगी आदित्यनाथ जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के हलफिया एहतिमाम (शपथ ग्रहण समारोह) में तशरीफ लाए । इस वक़्त प्रेस क्लब के व्हाट्सएप्प ग्रुप में जो बहस, ग़ुस्सा और एहतिजाज का माहौल बना हुआ है, उसे देखकर साफ़ मालूम होता है कि प्रेस क्लब के कुछ ओहदेदारों ने मुजरिमों की हिमायत में सीएम साहब की सुरक्षा इज़्ज़त, वक़ार और हैसियत को दाँव पर लगा दिया । सिर्फ़ पेशेवर मुजरिमों को ही नहीं, बल्कि दरगाह से……

जुड़े बदकिरदार शख्स इक़रार और उसके गुर्गों को भी इस अहम प्रोग्राम में दाखिल करा दिया गया । यह भी नहीं सोचा गया कि यही नफरती इक़रार…सीएम साहब के खिलाफ झूठी गवाही देने वालों में शामिल था । बहरहाल, पता यह चला है कि इस बेहद संगीन और नाज़ुक मसले पर जाँच बैठ चुकी है । दूसरी तरफ आज यही इक़रार गिरगिट जैसे रंग बदल रहा है । हरे रंग की तौहीन और लानत मलानत करने के बाद जब इसका मन नहीं भरा.. तो अब  गेरुआ ओढ़कर आँखों में धूल झोंकना चाह रहा है

इस शख्स का पूरा नापाक मंसूबा यही था कि सीएम के साथ तस्वीर लेकर उसे आम अवाम और हुक्काम पर रौब जमाने और अपने खिलाफ चल रही तहक़ीक़ात को मुतास्सिर (प्रभावित) करने के लिए इस्तेमाल किया जाए । प्रेस क्लब के व्हाट्सएप्प ग्रुप में एक साबिका (पूर्व) ओहदेदार (पदाधिकारी) विजय जायसवाल ने जब इस नाज़ुक और संगीन मसले पर सवाल उठा दिया ! विजय जायसवाल के स्क्रीन शॉट्स देखें !

विजय जायसवाल का स्क्रीन शॉट PDF

विजय जायसवाल के सवाल उठाते ही …दलाली के बिस्कुट को अपने मुँह से लेकर अपने अंग विशेष तक ठूँसकर बैठे राजेश पांडेय (महाकाल) ने बेहयाई की इंतिहा करते हुए लिखा कि “छोड़िए इस मामले को, और प्रेस क्लब के विकास की बात कीजिए ।”

कुछ तो शर्म कीजिए पांडेय जी ! शायद आप भूल गए हैं कि ये जो प्रेस क्लब की छत है, वो भी योगी जी की मेहरबानी से ही आपके सर पर कायम है…वो भी बिना किसी किराया और बिना खर्च के ! जो आप दर्जनों एसी लगाकर इस झुलसती गर्मी में शिमला जैसी ठंडक महसूस कर रहे हैं, उसका बिल भी सरकार ही अदा कर रही है। इसके बावजूद इतनी मक्कारी कि सीएम के प्रोग्राम में मुजरिमों की घुसपैठ जैसे संगीन मसले को नजरअंदाज करने की बात कर रहे हैं! वाकई नमकहरामी, बेहयाई और मक्कारी की भी कोई हद होती है ।

उसूल पसंद अध्यक्ष रहे थे मार्कण्डेय मणि….

मार्कण्डेय मणि को जर्नलिस्ट प्रेस क्लब का एक सख्त और उसूलपसंद अध्यक्ष माना जाता था । जब तक उनका दौर रहा, तब तक दलाली, वसूलीबाज़ी और तथाकथित पत्रकारिता के दुःशासन क्लब के दरवाज़े से दूर ही रहे । लेकिन आज हालात इस क़दर गिर चुके हैं कि क्लब से जुड़े कई अफ़राद पर वसूली, आपराधिक साज़िश और पैसों के एवज़ में खबरों की सेटिंग के इल्ज़ामात और पत्रकारों पर फर्जी मामलात दर्ज करवाने के ठोस सुबूत मौजूद हैं ।
मौजूदा कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव को लेकर भी चर्चाओं का बाज़ार गर्म है । बताया जा रहा है कि यादव जी के जरिये बड़े बड़े मालियत के मामलात को डील  किया जा रहा है ।  यादव जी हैं भी बड़े “मज़हबी” तबीयत के इंसान। हर रोज़ अपने काम की शुरुआत नवग्रहों के दरवाज़े पर जाकर साष्टांग दंडवत से करते हैं । मगर हक़ीक़त ये भी है कि महज़ दो साल पहले इन्ही दुर्गेश यादव पर सीएम योगी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने के जुर्म में थाना कैंट में मुकदमा दर्ज हुआ था । व्हाट्सएप्प चैट्स ये भी इशारा करती हैं कि गैस की किल्लत के दौर में दुर्गेश यादव एक “ग़ैर-ऐलानिया गैस एजेंसी” चला रहे थे और लोगों को गैस सिलेंडर मुहैया करवा रहे थे । सवाल ये है कि आखिर ये सिलेंडर कहाँ से आ रहे थे ? कैसे मिल रहे थे ? दुर्गेश यादव की मान्यता भी सवालों के घेरे में है, और इस पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना दिया अनुराग श्रीवास्तव ने, जिसने खुद कबूल किया कि उसे दुर्गेश यादव द्वारा ही प्रोग्राम में कुछ जिम्मेदारियां दी गयी थीं । देखे अनुराग श्रीवास्तव का चैट !

अनुराग श्रीवास्तव का चैट PDF

जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के मंत्री पंकज श्रीवास्तव पर सबसे ज्यादा संगीन इल्ज़ामात हैं कि उन्होंने एक सोची-समझी साज़िश के तहत गोरखपुर के कुख्यात बदमाश इक़रार अहमद और उसके गुर्गों को सी एम साहब के उस अहम प्रोग्राम में बुलाया । जबकि इक़रार अहमद पर क़त्ल, आपराधिक साज़िश, मारपीट, तोड़फोड़, असलहा तस्करी और हनी ट्रैप गैंग चलाने जैसे संगीन मुकदमे दर्ज हैं । ये वही इक़रार है जो मुल्क विरोधी नारे लगाकर नौजवानों को भड़काने के इल्ज़ाम में पकड़े जाने के बाद पुलिस के सामने लिखित माफ़ीनामा दे चुका है । इतना ही नहीं, यह बदकिरदार शख्स सीएम के खिलाफ दर्ज एक मुकदमे में फर्जी गवाह भी रह चुका है । इसके बावजूद इक़रार और उसके गुर्गों को सीएम के प्रोग्राम में दाख़िल करना सिर्फ़ लापरवाही नहीं, बल्कि एक खतरनाक साज़िश का हिस्सा मालूम होता है । अगर इक़रार अहमद के पासपोर्ट और असलहा लाइसेंस के नवीनीकरण की तह तक जाया जाए, तो इसमें भी कुछ पत्रकारों और पुलिस की मिलीभगत सामने आ सकती है । पिछले साल भी जब प्रेस क्लब का शपथ ग्रहण समारोह हुआ था, तब भी पंकज श्रीवास्तव ही मंत्री थे….और उस वक्त भी उनपर पर यही इल्ज़ाम लगा था कि उन्होंने ही इक़रार को सी एम के कार्यक्रम में बुलाया था । देखे पिछले साल के इक़रार द्वारा सीएम के कार्यक्रम में कराया गया फ़ोटो सेशन ।

आज हालात ये हैं कि इक़रार अहमद पर अवैध फंडिंग, हनी ट्रैप गैंग, मुल्क विरोधी गतिविधियों और गैर-कानूनी तरीके से पासपोर्ट व असलहा नवीनीकरण की जांच केंद्रीय और राज्य एजेंसियाँ कर रही हैं । तमाम सुबूत ये बताने के लिए काफी हैं कि इक़रार की यह जुर्रत यूँ ही नहीं है बल्कि इसके पीछे सिस्टम के कुछ अफ़सरों और बिके हुए पत्रकारों का हाथ है ।

अब ज़रा इस तस्वीर पर गौर कीजिए ।

तस्वीर में बाईं तरफ खड़े हैं मान्यता प्राप्त पत्रकार मनव्वर रिज़वी ! मनव्वर रिजवी के बगल में खड़ा है प्रेस क्लब का सदस्य फैय्याज अहमद ! फैय्याज अहमद के पास चश्मा पहने खड़ा तीसरा शख्स शेरू है, जिस पर गोरखपुर के तत्कालीन कप्तान सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने अपहरण के मामले में गैंगेस्टर तक लगा दिया था । अधिकारी के ठीक बगल में खड़ा हैं सैय्यद शहाब अहमद ! शहाब अहमद की इश्कबाजी के कुछ आपत्तिजनक चैटिंग सामने आ चुकी है और यही वजह रही कि इनकी बदचलनी का एक पुरजोर तमाशा एक पाक मुकाम पर इनके अपनों ने ही खूब जमकर बना दिया । ये तमाम चेहरे दरअसल इक़रार अहमद की महफिलों की रौनक हैं । यही लोग आजकल उर्स के दावत-नामे को लेकर अफसरों तक पहुंच रहे हैं । ये तस्वीर खुद इस बात का ज़िंदा सुबूत है कि इक़रार के दरबार में बदकिरदारों और मुजरिमों का जमघट लगता है, और कुछ बिके हुए पत्रकार वहां अपनी हसरतें पूरी करने के लिए एक टांग पर खड़े रहते हैं ।

यकीन हुआ घायल…मगर माफी अब तक नहीं….

आज प्रेस क्लब की हालत ये हो चुकी है कि पत्रकारिता के उसूल और अख़लाक को बेचकर, उसकी पीठ में खंजर घोंपने के बाद भी जब दिल नहीं भरा, तो अब मुजरिमों की ख़ातिर सीएम के वक़ार को ही दांव पर लगा दिया गया । सवाल ये है कि क्या गिरावट की भी कोई हद होती है ? क्या गैरत और खुद्दारी नाम की कोई चीज़ बाक़ी है ? अगर होती, तो अब तक इस घटना के जिम्मेदार अफ़राद (पदाधिकारी) अपने इस गुनाह-ए-कुबरा के लिए माफी माँग चुके होते । मगर अफ़सोस, कि यहाँ तो बेहयाई इस कदर हावी है कि तौबा करने के बजाय इस संगीन मामले को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं और अगले महीने फिर से सी एम साहब के प्रोग्राम में आने की अफवाह उड़ाई जा रही है ।

By systemkasach

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का खुद का चेहरा कितना विद्रूप और घिनौना है..ये आप इस पेज पर देख और समझ सकते हैं । एक ऐसा पेज, जो समाज को आईना दिखाने वाले "लोकतंत्र के चौथे स्तंभ" को ही आइना दिखाता है । दूसरों की फर्जी ख़बर छापने वाले यहाँ खुद ख़बर बन जाते हैं ।

Related Post