सीएम की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर चुप्पी का साया : खुलासे से बौखलाए “बदहवास गुप्ता” ने शुरू किया डैमेज कंट्रोल !

नीचे दी गई तस्वीर को गौर से देखिए, फिर नीचे लिखे घटनाक्रम को ध्यान से पढ़िए ताकि यह बात हमेशा याद रहे कि जब पत्रकारिता की आड़ में दलाली, मक्कारियत और झूठ का घिनौना कारोबार दिखे, तो उसके खिलाफ डटकर आवाज़ उठाई जा सके । शपथ ग्रहण समारोह में अय्याशों बदमाशों और अपराधियों को आमंत्रित कर सीएम योगी की सुरक्षा और मान सम्मान से खिलवाड़ करने वाले कथित मीडिया तंत्र ने इस बेहद संगीन मामले में माफी मांगने की बजाय अब अपराधियों और दरगाह के चाटुकार “बदहवास गुप्ता” को डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी सौंपी है । दो दिन हम अस्पताल में भर्ती क्या हो गए कि “बदहवास गुप्ता” ने झूठ का तम्बू फिर तानना शुरू कर दिया !

सीएम से जुड़े इस बेहद संगीन मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए “जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” के आमसभा की बैठक 26 अप्रैल को बुलाई गई है । आज की बैठक में इस बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे पर किसी की कोई जिम्मेदारी तय होने से बचाने के लिए “बदहवासी” कुछ इस कदर हावी थी कि… आनन फानन में “डैमेज कंट्रोल” के लिए दरगाही गुर्गे “बदहवास गुप्ता” को खड़ा कर दिया गया । “बदहवास गुप्ता” भी फटाफट खड़ा इसलिए हो गया क्योंकि सी एम के कार्यक्रम में घुसपैठ करने वाले अपने “दरगाही लफंटर” को बवाल से बचाना भी था और उसके नमक का हक भी अदा करना था । जब इस जद्दोजहद में कोई तरीका नहीं सूझा तो “बदहवास गुप्ता” ने से जुड़े बेहद संगीन मामले पर पर्दा डालने के लिए सवाल उठाने वाले शख्स पर उंगली उठाते हुए 2023 का पुराना पन्ना पलटना शुरू कर दिया । 2023 में घटे इस घटनाक्रम को लेकर “बदहवास गुप्ता” की जानकारी बड़ी सीमित है इसलिए नीचे दिए गए वीडियो के कुछ अंश को “बदहवास गुप्ता” तक पहुँचायाजाना अत्यंत आवश्यक है । देखें वीडियो !

सी एम से जुड़े बेहद संगीन मसले से ध्यान भटकाने के लिए इस बेहद संगीन मसले पर सवाल उठाने वाले शख्स की ऊपर दी गयी 2023 की तस्वीर को लेकर अब दरगाही रायता फैलाया जा रहा है । कुछ मीडियाई दलालों ने 2023 में यह नैरेटिव फैलाया था कि फोटो में दिख रहे शख्स को पुलिस पीट रही है । जबकि तस्वीर साफ़ बताती है कि चौराहे पर गिरे व्यक्ति को उठाने की कोशिश की जा रही है । सच्चाई यह थी कि इसी शख्स को पुलिस जीप से टक्कर मारकर अपहरण करने का प्रयास किया गया था । गंभीर चोटों के कारण इस शख्स को तीन दिन मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहना पड़ा । इतना ही नहीं, मानवाधिकार आयोग ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए घटना के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के आदेश भी दिए थे । देखें रिपोर्ट !

मानवाधिकार रिपोर्ट PDF

तस्वीर में दिख रहा यह व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि वही पत्रकार सत्येंद्र हैं, जिन्हें बेबाक और खोजी पत्रकारिता के लिए जाना जाता है । लेकिन उस दौर में कुछ अखबारी चेहरों ने तत्कालीन सीओ चौरीचौरा रहे आईपीएस मानुष पारीख का फर्जी बयान छापकर सत्येंद्र को “हार्डकोर अपराधी” साबित करने की कोशिश की । बाद में पुलिस की RTI ने स्वयं इस झूठ की चिता जला दी ।रिकॉर्ड में साफ लिखा गया कि पत्रकार सत्येंद्र के संबंध में पुलिस ने कभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया, न ही कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस की । देखें पुलिस रिपोर्ट !

पुलिस रिपोर्ट मीडिया सेल PDF

जिन लोगों ने आईपीएस मानुष पारीख का नाम लेकर फर्जी बयान गढ़ा, उन्हें यह जानकर झटका लगेगा कि इस पूरे मामले में वे कहीं से दोषी नहीं थे । असली झटका तो तब लगा, जब आईपीएस विश्नोई साहब को बरगलाकर सत्येंद्र के खिलाफ मुकदमे लिखवाए गए, लेकिन बाद में आईपीएस विश्नोई ने वास्तविकता जानकर पत्रकार सत्येंद्र के प्रति सहानुभूति जताई और मदद भी की । इस मदद के कुछ प्रमाण सार्वजनिक नहीं किए जा सकते, मगर रिकॉर्ड यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि इस पूरे प्रकरण में विश्नोई साहब के  खिलाफ भी जांच के रास्ते खुल चुके हैं । देखें रिपोर्ट !

शासन रिपोर्ट आईपीएस विश्नोई PDF

आईपीएस मानुष पारीख का फर्जी बयान छापकर अपराधी साबित करने की कोशिश का नतीजा यह हुआ कि दैनिक जागरण, अमर उजाला, तथा चेतना मंच समेत कई अखबारों से जुड़े पत्रकारों और संपादकों पर अदालत में मुकदमा दायर हुआ । अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों को देखकर मामले से उठती आपराधिक साजिश और षड्यंत्र की बू को स्वयं महसूस किया और शाहपुर पुलिस को जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया । देखें अदालती आदेश !

अदालती आदेश PDF

अदालत के आदेश के बावजूद महीनों तक रिपोर्ट नहीं आई । वजह साफ है कि जिस शाहपुर पुलिस पर खुद जीप से ठोकर मारकर अपहरण और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोपों की जांच चल रही हो, वह इस आग में हाथ डालने से बचना चाहेगी । क्योंकि यदि शाहपुर पुलिस अदालत में मौजूद साक्ष्यों के विपरीत रिपोर्ट देती है तो मामला स्वतः हाईकोर्ट पहुंचेगा और जवाबदेही तय होगी।पत्रकार सत्येंद्र ने तो सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र देकर यह तक कह दिया कि यदि उनके खिलाफ अपराध का एक भी प्रमाण हो, तो मुकदमा लड़ने के बजाय खुले अदालत में स्वीकारोक्ति करने को तैयार हैं । यही वजह है कि सुनियोजित साजिशों के तहत दर्ज 2022 से लेकर 2025 तक के सभी मुकदमों में मीडियाई दलालों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच की मांग उठी, और सुप्रीम कोर्ट से भी कार्यवाही के निर्देश मिले । अब CBI जाँच पर सुनवाई पुलिस एक्शन के बाद देखने को मिल सकती है । देखें आदेश !

सुप्रीम कोर्ट डायरेक्शन PDF

पत्रकार सत्येंद्र पर उस दौर में 2022 से 2025 तक बिना पर्याप्त जांच के ताबड़तोड़ मुकदमे लिखे गए, बिजली-पानी कटवाया गया, हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया, सुर्खियाँ बटोरी गईं और इन सबको कुछ अखबारी दलालों ने बड़े गर्व से छापा । मगर अब वही सारे कर्मकांड सबूतों सहित न्यायालयों के दरवाज़े पर खड़े हैं । अब हाईकोर्ट ने भी इस मामले को संगीन मानते हुए सुनवाई हेतु सूचीबद्ध कर लिया है ।

हाइकोर्ट आदेश PDF

सत्यम अस्पताल प्रकरण में, जब सत्येंद्र को संलिप्त बताकर गैंगस्टर जैसी कार्रवाई की गई, तब सुप्रीम कोर्ट में रिकॉर्ड पेश हुए कि सत्येंद्र ने ही “सत्यम अस्पताल” को तीन बार बंद कराया था और घटना से दस दिन पहले पुनः सत्यम अस्पताल के खुलने पर CMO कार्यालय के खिलाफ जांच गठित कराई थी । नतीजा यह हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने सत्येंद्र के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाते हुए जिम्मेदारों से 2023 में जवाब तलब कर लिया ।

सुप्रीम कोर्ट आदेश PDF

यही कारण है कि आज तक किसी मीडियाई दलाल में इतना साहस नहीं हुआ कि कैमरा ऑन कर सामने बैठकर सत्येंद्र से सवाल पूछ सके । लेकिन यह मसला प्रदेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा । कई मीडिया संस्थानों ने इसे उठाया, सत्येंद्र के साक्षात्कार प्रसारित हुए, और पूरे घटनाक्रम पर चर्चाएँ हुईं । हाल ही में सत्येंद्र के खिलाफ रची गई एक बड़े अंतर्राज्यीय षड्यंत्र की परतें भी अदालत में खुलीं । इसमें दरगाह से जुड़े शातिर अपराधी, दरगाह से जुड़े पत्रकार, कुछ पुलिसकर्मी और “बदहवास गुप्ता” आदि कुछ सजिशकारों के नाम सामने आए । अदालत ने इस मामले में भी सिलसिलेवार सुनवाई पूरी कर अपना पूरा फैसला सुरक्षित रख लिया है । इसके अलावा फर्जी नैरेटिव फैलाने को लेकर “बदहवास गुप्ता” समेत तमाम दरगाही पत्रकारों पर हाल ही में अदालत ने आपराधिक साजिश मुकदमा दर्ज कर सुनवाई शुरू कर दी है..साथ ही “बदहवास गुप्ता” समेत “दरगाही पत्रकार” ढाई करोड़ के डिफेमेशन का कानूनी मामला भी अपने सिर पर उठाए घूम रहे हैं जिसका खुलासा मैगजीन 2026 में हो चुका है । ढाई करोड़ के डिफेमेशन और आपराधिक साजिश की कार्यवाही का कटोरा हाथ में लिए पहले से घूम रहे “बदहवास गुप्ता” का कटोरे का वजन आज तब और बढ़ गया जब इसने अदालत में विचाराधीन मामले में फिर से अपनी नाक घुसेड़ दी । ज़ाहिर है कि “बदहवास गुप्ता” की इस बेकरारी का संज्ञान अदालत अब और अधिक  गंभीरता से लेगी ।

मैगजीन पीडीएफ फ़ाइल

इस पूरे कथानक का निष्कर्ष सिर्फ इतना है कि साजिश, षड्यंत्र और मक्कारियत की उम्र लंबी नहीं होती । सच की लड़ाई को देश की सर्वोच्च अदालत तक घसीट ले जाने का जज्बा और हर स्तर पर सच सामने लाने का साहस “दरगाह की दलाली” से पैदा नहीं होता “बदहवास गुप्ता” ! इसके लिए “ज़मीर” का जिंदा होना जरूरी होता है । मुझे विश्वास है “बदहवास गुप्ता” कि 2023 से जुड़े घटनाक्रम को लेकर अब तुम्हारी “टोकड़ी” सबूतों से भर गई होगी । इसलिए अब मुद्दे पर आओ “बदहवास गुप्ता” और सीएम के कार्यक्रम में तुम्हारा वो बदमाश और अय्याश आका कैसे पहुँचा इस पर चर्चा करो । यह समय 2023 के उस मसले पर सवाल उठाने का नहीं है जो पूरी तरह से एक खुली किताब है…यह समय पत्रकार सत्येंद्र पर सवाल उठाने का नहीं है बल्कि सीएम के मान सम्मान से किये गए खिलवाड़ पर उठाने का है…यह समय दरगाह के नमक का हक अदा करने का नहीं है बल्कि सरकार के नमक का हक अदा करने का है । ये सच है कि “जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” पर आज तक कभी उँगलियाँ नहीं उठी…लेकिन जब से प्रेस क्लब में तुम जैसे कुछ “दरगाही पत्रकारों” की एंट्री हुई है…तब से प्रेस क्लब का मान सम्मान दांव पर लगता चला गया है । यकीन मानो कि जिस दिन तुम जैसे “दरगाही केचुओं” के शरीर पर प्रेस क्लब ने नमक छिड़क दिया उस दिन से प्रेस क्लब का पुराना “गौरव” फिर से लौटना शुरू हो जाएगा ।

By systemkasach

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