बैठक में महाखुलासे के नाम पर जुटी भीड़ के हाथ लगी निराशा… सीएम के सुरक्षा और सम्मान में सेंध लगाने वालों के खिलाफ क्या हुआ पता नहीं !

तीन दिन से व्हाट्सएप्प पर कोई सिस्टम वाले के बारे में महाखुलासे का भौकाल टाइट करने वाले “बदहवासी गुप्ता” की “बदहवासी” देखिए ! चारों तरफ नाचते, फुदकते, इतराते फिर रहे गुप्ता जी आज आम सभा की बैठक में एक “महाखुलासा” लेकर आने वाले थे । खुलासे का ऐसा नगाड़ा पीटा गया कि जनपद की तमाम एजेंसियाँ दिल थामे बैठ गईं । हर किसी को लगा कि आज कोई पहाड़ टूटेगा, कोई तहलका मचेगा, कोई पर्दाफाश होगा । मगर जब परदा उठा तो खुलासे की जगह गधे का ढेंचू-ढेंचू निकला । नतीजा यह हुआ कि जिसने सुना, उसने माथा पीट लिया और जिसने नहीं सुना, उसने खुद को खुशकिस्मत समझा । अपनी ईमानदारी का ग्राफ आसमान पर चढ़ाने की हसरत में गुप्ता जी ने अपने एक स्वयंभू सेवक दयानंद शर्मा से ही खुद को फोन करवा दिया, मानो खुद ही सवाल बनकर खुद ही जवाब देने चले हों । मगर अफसोस ! इस आत्मनिर्मित ईमानदारी भरे अभियान में गुप्ता जी फ़िर से एक बार फिर अपनी ही छीछालेदर करवा बैठे । जनाब ने सोचा था कि लोग वाह-वाह करेंगे, लेकिन शहर ने थू थू करना शुरू कर दिया । अब नीचे दिए गए ऑडियो को सुनें । जिस ऑडियो को कैकई विलाप बनाकर गुप्ता जी प्रस्तुत किये जा रहे थे वो ऑडियो आखिरकार रावण अट्टाहास निकला । सुनें ऑडियो

 

अब “गुप्ता जी” इस “ऑडियो” को लेकर बड़ी दुविधा में हैं । कोई पुख्ता सबूत नहीं है, इसलिए कुछ बोल नहीं पा रहे हैं । बस “रायता” फैला रहे हैं कि “ऑडियो” वाले कथित “दयालाल शर्मा” जी का रिश्ता “दरगाही लफंटूसों” को बाँस” करने वाले “शर्मा” जी के साथ है । तो लीजिए गुप्ता जी, मेरी यह बात “स्क्रीनशॉट” करके रख लीजिए । अगर इस कथित “दयालाल शर्मा” के साथ बाँस करने वाले शर्मा जी की मुलाक़ात, संबंध, बातचीत या किसी भी तरह का कोई ठोस प्रमाण सामने आ जाए, तो शर्मा जी अपने पैर का “जूता” निकालकर आपके हाथ में दे देंगे । फिर आप उसे उनकी “खोपड़ी” पर अंधाधुंध बरसाकर अपनी तमाम “हसरतें” पूरी कर लीजिएगा । लेकिन अगर उस कथित “दयालाल शर्मा” से शर्मा जी कोई वास्ता न निकला, तो फिर वही जूता अपने सिर पर रखकर “दरगाह” तक पैदल निकल जाइएगा, और अपने “आका” के यहाँ हाजिरी लगाकर वापस आईयेगा । जूता लौटाने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, शर्मा जी दूसरा ले लेंगे। वैसे भी कोर्ट, कचहरी, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट की दौड़ में पुराना जूता काफी घिस चुका है । बोलिए, मंज़ूर है ? हालाँकि शर्मा जी जानते हैं कि आपमें उतना दम नहीं कि आप इस चुनौती को कबूल कर सकें । आपकी फितरत बस इतनी भर है कि बेबुनियाद “प्रलाप” करते रहिए, हवा में तीर छोड़ते रहिए, और जब जवाब माँगा जाए तो खामोशी की चादर ओढ़ कर “मजार” पर लेट जाईये । हाँ, प्रमाण का मतलब यह मत समझ बैठिएगा कि आप ऑडियो वाले “दयालाल शर्मा” के मुँह से कुछ कहलवा देंगे और उसे “सबूत” मान लिया जाएगा । आख़िर आप भी तो उसी “दरगाही आका” के दरबार का पानी पीते हैं, जहाँ ऐसे न जाने कितने “दयानंद शर्मा” रोज़ मुँह मारने आते-जाते रहते हैं । वहाँ “किरदार” तो मिलते नहीं, बस आप जैसे “किराए” के “किरदार” मिलते हैं । एक शुभचिंतक ने बताया कि बीच बीच में गुप्ता जी इतने कुंठित हो जा रहे थे कि “दरगाही लफंटूसों” को बाँस” करने वाले “शर्मा” जी को सरेआम गालियाँ बकने लग रहे थे। अरे थोड़ा संभालिये गुप्ता जी ! एक तो वजन ज्यादा है ऊपर से उमर भी हो गयी है ! फल सब्जियों में तमाम मिलावट हो गयी है..अभी तो क़ानूनी प्रक्रियाओं की शुरुआत भर है ! अभी से इतना तनाव लेंगे तो शुगर गुड़ चीनी ब्लड प्रेशर सब मिलकर चाँप देंगे । ऐसा अनर्थ मत कीजिये यदि कोई बीमारी वीमारी आपको हो गई तो पत्रकारिता का आप जैसा कोहिनूर फिर हमे कहाँ मिलेगा ?

ईश्वरचंद प्रकरण में गुप्ता जी की गुलाटी…

ऊपर वाले “ऑडियो” में गुप्ता जी ऐसे बोल रहे हैं, जैसे जिंदगी में कभी किसी से कोई सेवा न ली हो, जैसे “फ़रिश्तों” की बिरादरी से ताल्लुक रखते हों । मगर शहर के सनसनीखेज “ईश्वरचंद जायसवाल” प्रकरण में पीड़िता ने खुद आरोप लगाया था कि गुप्ता जी ने रुपये लेकर प्रसारित खबर डिलीट कर दी । अब बताइए गुप्ता जी, कि पहले आपने पीड़िता के आरोपों के आधार पर खबर चलाई, फिर उसे डिलीट मार दिया । आखिर क्यों ? क्या पीड़िता ने आरोप वापस ले लिए थे ? अगर नहीं, तो बिना वजह बेवफा क्यों हो गए थे आप ? या फिर वजह इतनी “वज़नी” थी कि आपकी “बड़ी खबर” बहुत “बड़ी खबर” हल्की पड़ गई ? गुप्ता जी, कुछ बड़ा सोचिए । ये “बचकानी” हरकतें छोड़िए । इन हरकतों से आपके “खलचरित्र दरगाही आका” का नाम बदनाम हो रहा है । ज़रा उनसे कुछ सीखिए कि उन्होंने वेश्याओं को रुपये देकर दूर राज्य में पत्रकारों को फँसाने का “ठेका” किस तरह से दिया ? दूसरे राज्य की पुलिस के थाने की “मुहर” से लेकर “जीडी” तक की कूटरचना कर डाली, और पूरी मेहनत, लगन और मक्कारी के साथ “षड्यंत्र” को अंजाम दिया । और एक आप हैं कि कंकड़-पत्थर बटोरकर हवा में उछाले जा रहे हैं । इतने दिनों से सुबह-शाम “दरगाह” पर आप रेगुलर “प्रैक्टिस” कर रहे हैं, मगर जैसे ही “बैटिंग” का वक्त आता है, हर बार “बैट” ही हवा में फेंक देते हैं ।


अब ऊपर “प्रेस क्लब” के ग्रुप पर वायरल चैट को देखिए । “बदहवास गुप्ता” जी के “आगाज़” ने पहले से घायल और मूर्छित पड़े एक कथित अखबारी पत्रकार के जिस्म में जैसे जान फूँक दी हो । ऐसा लगा जैसे बरसों की “मुराद” आज पूरी हो जाएगी ! गुप्ता जी जरूर कोई “ब्रह्मास्त्र” छोड़ेंगे । लेकिन ब्रह्मास्त्र की आस संजोए त्रिपाठी जी की वर्षों पुरानी “अतृप्त आत्मा” फिर अधूरी रह गई । खैर, अब पानी पी-पीकर “गुप्ता जी” को गरियाने से भी क्या हासिल होगा त्रिपाठी जी ? मेरी आपसे कभी न बातचीत है न कभी मुलाकात ! फिर भी आपकी चैटिंग देखकर लगा कि आपका मन भी मेरे प्रति मैल से पटा पड़ा है । परंतु मेरे मन में आपके प्रति सम्मान है इसलिए उम्मीद करता हूँ कि आगे भविष्य में  आप कभी पड़ा हुआ तीर लेने का प्रयास नहीं करेंगे । याद रखिये कि इस बार जब पत्रकारिता के “सिलेबस” का पूरा “दर्शनशास्त्र” अदालती ज़बान में, बाकायदा “ट्रांसक्रिप्ट” होकर सामने आएगा तो चाणक्य बनकर बैठे बहुतों की कलम काँपेगी, बहुतों की जुबान सूखेगी, और बहुतों के “हलक” के नीचे निवाला भी नहीं उतरेगा ।

एक विशेष योजना….

सोचता हूँ अब “पत्रकारिता” के इन “खलचरित्रों” को प्रकाशित करने के लिए एक विशेष वेबसाइट बनाई जाए…“बेहयाई डॉट कॉम” ! ताकि भविष्य में “पत्रकारिता” का कोई छात्र यदि गिरावट, दलाली, अवसरवाद, सौदेबाज़ी, मुखौटेबाज़ी और चरित्रहीनता पर शोध करना चाहे, तो उसे एक क्लिक में पूरा ब्यौरा मिल जाए । कुछ यूँ मालूम होता है कि ये “खलचरित्र” सिर्फ खुद नहीं डूबने वाले हैं बल्कि आज नहीं तो कल अपने “आकाओं” को भी ले डूबेंगे…क्योंकि पाप के “परनाले” में तो सबने डुबकी लगा रखी है ! बस फर्क इतना है कि किसी के “सिर” तक पानी आ चुका है और किसी के “नथुनों” तक पहुँचने वाला है ।

By systemkasach

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