सीएम कार्यक्रम में घुसपैठ से प्रेस क्लब तक की “कवर-अप” स्टोरी ! फर्जी हाजिरी, निंदा-नौटंकी और मैनेजमेंट गुरु की साजिश का बड़ा खुलासा !

सीएम योगी के कार्यक्रम में अपराधियों और अय्याशों की घुसपैठ कराने जैसे “शर्मनाक” वाक़िये के बाद जब “जॉर्नलिस्ट प्रेस क्लब” के पदाधिकारियों पर उंगलियाँ उठीं, तो उम्मीद थी कि एक जिम्मेदाराना और “मुस्तहकम” फैसला सामने आएगा। लेकिन जो हुआ, वह पत्रकारिता के नाम पर एक “सफेदपोश” तमाशा और मक्कारियों का “मुजाहिरा” बनकर रह गया। इस बेहद संगीन मसले पर जिम्मेदारी तय करने के लिए बुलाई गई “आम सभा” की बैठक, दरअसल जवाबदेही तय करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी कारस्तानियों को “मैनेज” करने की एक सोची-समझी साज़िश थी। हमेशा “खाने-चबाने” में “अव्वल” रहने वाले “पेटकारों” ने इस शर्मनाक मुद्दे को भी “जश्न” में तब्दील कर दिया और लजीज़ व्यंजनों की खुशबू में गैरत और जिम्मेदारी दोनों “दफन” कर दी गईं । भीड़ जुटाने के लिए एक तरफ “पकवान” परोसने की चर्चाएं रहीं, तो दूसरी तरफ “बड़े खुलासे” का झुनझुना पकड़ाकर “बदहवास गुप्ता” नाम के “दरगाही जमूरे” को तीन दिन तक “प्रेस क्लब” के व्हाट्सएप्प ग्रुप में खूब नचाया गया ।

लेकिन इस सारे “ड्रामे” के बाद भी जब साढ़े छह सौ सदस्यों वाले “जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” की बैठक में 200 का आंकड़ा भी पूरा नहीं हो पाया तो “मैनेजमेंट गुरु” के माथे पर “फिक्र” की लकीरें खिंच गईं । बताया जाता है कि इन्हीं लकीरों को मैनेज करने के लिए एक बेहद कपटी और जालिया अखबारी पेटकार खबीस पांडेय ने रजिस्टर में अपनी ही राइटिंग से 15-20 नाम बढ़ाकर 200 का आंकड़ा छूने की फरेबी कोशिश कर डाली । हालांकि जब उसके बाद भी कोरम पूरा नहीं हो पाया तब बैठक ही निरर्थक हो गई या कह सकते हैं कि पत्रकारों द्वारा नकार दी गई ! यानी यहाँ सिर्फ सच ही नहीं, बल्कि “हाजिरी” तक को फर्जी बना कर कोरम पूरा करने का “बेजा” प्रयास किया गया । बैठक शुरू हुई तो सीएम के मान-सम्मान और सुरक्षा में सेंध लगाने वालों पर कार्रवाई की बात आई, लेकिन यह मुद्दा पल भर में “दफन” कर दिया गया । गैर जिम्मेदार कार्यकारिणी ने औपचारिक “खेद” व्यक्त कर अपने कर्तव्यों की “इंतिहा” कर ली, क्योंकि इस बैठक का असल एजेंडा दोषियों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि सीएम से जुड़े बेहद संगीन मसले पर सवाल उठाने वालों को “खामोश” करना था । इसीलिए आवाज उठाने वाले विजय जायसवाल को डपटकर चुप करा दिया गया ! पूर्व अध्यक्ष रितेश मिश्रा सरीखे कुछ संजीदे पत्रकारों की आवाज सुनी नहीं गई और “गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन” के अध्यक्ष “रत्नाकर सिंह” समेत कुछ संस्थापक सदस्यों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाकर स्वयं अपने ही “ड्रामेबाज” चरित्र की तरह एक नया “ड्रामा” रच दिया गया । नतीजा यह हुआ कि यह मामला सुलगने लगा और रत्नाकर सिंह ने गोरखपुर “जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” के अध्यक्ष,महामंत्री को “लीगल नोटिस” थमाकर जवाब तलब कर लिया । देखें लीगल नोटिस

लीगल नोटिस PDF

जो लड़ाई अब तक पर्दे के पीछे थी, वह अब सरेआम मैदान में उतर चुकी है । आम सभा की इस निंदा-नौटंकी के बीच बीच में इशारों में जरिये वही “बदहवास गुप्ता” नाम का “दरगाही जमूरा” “मैनेजमेंट गुरु” के इशारे पर उछल कूद मचाता रहा और अपनी आदत के मुताबिक “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के नाम पर छाती पीट पीट कर “रांडरुदन” करता रहा । अब तक यही माना जा रहा था कि इस पूरे प्रकरण के लिए सिर्फ “जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” जिम्मेदार है लेकिन हालात बहुत हद तक इशारा कर रहे हैं कि सीएम के मान सम्मान और सुरक्षा में “घुसपैठ” जैसे बेहद “संगीन” मसले में मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति की भूमिका भी उतनी ही “संदिग्ध” और गहरी है । चर्चाएं बताती हैं कि यह समिति काफी समय से “प्रेस क्लब भवन” पर कब्जे की कोशिश में लगी हुई है । इसी मकसद से एक सोची-समझी रणनीति के तहत “जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” के पिछले चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी ओंकार द्विवेदी के समर्थन का प्लान बनाया गया । “मैनेजमेंट गुरु” ने मोर्चा संभाला और ओंकार द्विवेदी के लिए खुलकर समर्थन मांगा और दिया ! और जैसे ही ओंकार द्विवेदी अध्यक्ष बने, शतरंज की बिसात बिछ गई और दरगाह से जुड़े बदमाशों, अय्याशों और अपराधियों के लिए “प्रेस क्लब” के दरवाजे खोल दिए गए ।

मैनेजमेंट गुरु क्यों हैं चर्चा के दायरे में…

“मैनेजमेंट गुरु” पर लग रहे आरोप यूँ ही नहीं हैं बल्कि उन्हें दरगाह के करीबियों के साथ कई बार कई मौकों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर देखा गया है । अब यह किसी से छिपा नहीं कि “मनव्वर रिजवी” से लेकर “फैय्याज” जैसे नामों का “दरगाही” बदमाश “इक़रार” से क्या इतिहास और संबंध है । अगर यह सब गलत है तो बोल दीजिए “मैनेजमेंट गुरु”.. कि ये सब आपको बदनाम करने की एक साजिश है ! यदि आप वाकई सीएम योगी आदित्यनाथ के सम्मान और सुरक्षा में सेंध लगाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ हैं…तो आपको योगी जी की अनंत सेवा, अविराम सानिध्य और अथाह समर्पण में डूबे एक एक पल की क़सम है..कि सी एम साहब के मान सम्मान और सुरक्षा से जुड़े इस बेहद संगीन मसले पर हमारे कैमरे पर आकर कुछ सवालों के जवाब दीजिये !”मान्यता प्राप्त पत्रकार” समिति के सदस्य “मनव्वर रिजवी” स्वयं इस बात को कई बार कबूल कर चुके हैं कि मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति की नींव उन्होंने खुद ही रखी थी । मनव्वर रिजवी खुद इस समिति के सदस्य भी हैं और सीएम की सभा में घुसपैठ करने वाले “दरगाही बदमाश” और अय्याश इक़रार के मित्र भी ! यही वजह है कि सीएम के मान-सम्मान और सुरक्षा जैसे बेहद संगीन मसले को मैनेज करने के लिए “मैनेजमेंट गुरु” ने शुरू से कोई कसर नहीं छोड़ी । सीएम से जुड़े बेहद संगीन मसले में “मैनेजमेंट गुरु” के लिए मुश्किल यह थी कि उन्हें एक तरफ “दरगाही बदमाश” को भी बचाना था, तो दूसरी तरफ अपने समर्थित अध्यक्ष “ओंकार” को भी ! और यही वह बिंदु है जहाँ से यह पूरा मामला एक संगठित “साजिश” में “तब्दील” हो जाता है ।

पत्रकारिता दिवस के नाम पर ऊपर जो “मान्यता प्राप्त पत्रकार” समिति का “निमंत्रण पत्र” दिखाई दे रहा है उसे लेकर चर्चा यह भी है कि…. जब यह अंदेशा हुआ कि सीएम की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े बेहद संगीन घटना के बाद से सीएम साहब का “जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” से “मोहभंग” हो रहा है, तो इस “महापाप” को “मान्यता” की चादर से ढंकने की कोशिशें शुरू कर दी गई । लगातार पिछले तीस वर्षों से “पत्रकारिता दिवस” को याद न करने वाली संस्था “गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस” क्लब और “मान्यता प्राप्त पत्रकार” समिति को अचानक “पत्रकारिता दिवस” की याद आना दरअसल एक “रणनीतिक चाल” नजर आती है । जानकार बताते हैं कि सीएम साहब को “भावनात्मक जाल” में उलझाने की कोशिश के तहत ही “पत्रकारिता दिवस” के आयोजन को “प्रेस क्लब” भवन में “मान्यता समिति” के जरिए आयोजित करने की “फील्डिंग” तय की गई है । मतलब “विश्वास” और “भरोसे” का कत्ल करने वालों की उसी “छत” के नीचे फिर वहीं “चेहरे” मौजूद होंगे बस फर्क यह होगा कि उन “खल चरित्रों” का चेहरा “मान्यता प्राप्त समिति” के “बैनर” से ढँकने की पुरजोर कोशिश की जाएगी । “सीएम” साहब को भावनात्मक जाल में उलझाने की कोशिश करते हुए पुनः “मक्कारियत का जाल” फैलाने के पीछे मकसद सिर्फ इतना ही है कि सीएम साहब अपने साथ हुए “विश्वाघात” को भूल कर फिर से उसी “प्रेस क्लब” में उन्ही लोगों के बीच आ जाएं, जिन्होंने उनके “विश्वास” और “भरोसे” की पीठ मे चंद रोज पहले ही “खंजर” पैवस्त किया था । अब घटनाओं की यह पूरी कड़ी साफ इशारा कर रही है कि इस पूरे “महाखेल” के असली सारथी शुरू से “मैनेजमेंट गुरु” ही हैं….जो सबकी आँखों में धूल झोंकते हुए पर्दे के पीछे रहकर “डोर” खींचते रहे हैं । इस रहस्योद्घाटन के बाद अब तो पूरा का पूरा पत्रकारिता ‘कुटुंब’ “मैनेजमेंट गुरु” के सम्मान में 90 डिग्री पर नज़रें झुकाए हुए उनकी ओर ओर निहार रहा है ! “मैनेजमेन्ट गुरु” सबसे खास नाराज “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” से बताये जाते हैं क्योंकि यही है वो “नामाकूल” मीडिया है जिसने सीएम साहब के “सम्मान” के साथ किये गए खिलवाड़ को उठाया और मैनेजमेंट गुरु के लिए मुश्किलें पैदा कर दी । जवाब में “मैनेजमेंट गुरु” भी आजकल “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के खिलाफ़ जिस “कारखाने” मे जाल बुन रहे है उसकी खबर बस अभी अभी बाहर आई है । सनद रहे “गुरुवर” कि “सिस्टम” का जीवन ऐसे कई जालों से गुजरा है ! यकीन न हो तो अपने “शागिर्दों” से पूछिए और कामना कीजिये कि “सिस्टम” को आप तक न पहुँचना पड़े !

जाँच से खुलेगी असलियत…

अब जबकि “रत्नाकर सिंह” इस मामले को अदालत की “चौखट” तक पहुँचाने की शुरुआत कर ही चुके हैं तो यकीनन कई चेहरों से “नकाब” भी उतरेगाऔर कईयों के मुँह से “कवाब” भी छिनेगा । अब तक तो सिर्फ यही साफ हुआ है कि “गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” ने सीएम साहब के “विश्वास” और “भरोसे” की पीठ में “छुरा” भोंका है और अपने “प्रशासनिक रसूख” के चलते मामले को दबाने की पुरजोर कोशिश की है ! लेकिन अगर जाँच का दायरा बढ़ा और उस दायरे में “मान्यता समिति” को भी लिया गया… तो यह भी सामने आ जाएगा कि यहाँ तो जिस “थाली” में खाया जा रहा है, उसी में “छेद” करने की “रवायत” बरसों से चली आ रही है । अगर निष्पक्ष जाँच हुई, तो यह भी सामने आएगा कि “मान्यता की मलाई” चाटने वाले लोग अपने “इस्तीफे” की “अफवाह” फैलाकर किस तरह से एक साथ दो-दो जगह नौकरी कर तनख्वाह उठा रहे हैं …सरकारी जमीनों पर “कब्जा” कर “मकान” बना चुके हैं…”मृतप्राय” अखबारों के सहारे फर्जी तौर पर “मान्यता” लेकर सरकारी संसाधनों को “चूना” लगा रहे हैं और “आयोजन” के नाम पर सीएम साहब जैसी बेमिसाल शख्सियत के “प्रेस क्लब” आगमन को भी अपने “आर्थिक” लाभ के लिए भुनाते रहे हैं । “मुफ्तखोरी” एक ऐसी “वाहियात” आदत है कि अगर वर्षों तक किसी इंसान से चिपकी रह जाए तो वह “ब्लड प्रेशर” के डर से “नमक” खाना छोड़ देता है….”शुगर” के डर से “मीठा” खाना भी छोड़ देता है लेकिन “भगवान” के डर से भी “हराम” की खाना नही छोड़ता । ठीक इसी तरह बेईमानी के “गटरछाप परनाले” में “हलक” तक डूबे हुए कुछ लोग यदि अपना “कपार” छिलाकर खुद को “चाणक्य” समझ रहे हैं तो उन्हें यह जान लेना चाहिए कि आप “चाणक्य” नहीं बल्कि इस सड़े हुए “निज़ाम” के “चंडूल” हैं ।

By systemkasach

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