गोरखपुर : पिछले दो दिनों तक शहर पर आसमान जैसे खुलकर बरसा ! हर गली, हर नुक्कड़ पानी-पानी हो गया । यह बारिश भले शहर को ज़्यादा नुकसान न पहुँचा पाई हो, मगर “कुदरत” के कानून ने एक बड़ा काम कर दिया ! उसने “बदहवास गुप्ता” के बुने हुए “फ़रेब” के बंधे में ऐसा “सुराख” कर दिया, जहाँ से उसकी पूरी “साज़िश” बह निकली । ज़ाहिर सी बात है कि अब “कच्छा बदलने से “दस्त” नहीं रुकने वाला है ! “जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” के व्हाट्सएप्प ग्रुप में “बदहवास गुप्ता” नाम का एक “जमूरा-ए-फ़साना” 2023 की एक पुरानी अखबारी कटिंग लहराकर “बाँस” करने वाले शर्मा जी को “हिस्ट्रीशीटर” बताकर “सनसनी” फैलाने की नाकाम जुगत में लगा था । लेकिन कुदरत का इंसाफ देखिए कि अब उसके हाथ से “हिस्ट्रीशीटर” वाला “झुनझुना” ही छिन चुका है, जिससे वो “अफवाहों” का शोर मचाता फिरता था ।
क्या था पूरा घटनाक्रम ?
2023 में भटहट स्थित “सत्यम अस्पताल” में एक झोलाछाप डॉक्टर द्वारा ऑपरेशन किए जाने के बाद एक महिला की मौत हो गई थी । इस संगीन मामले में गुलरिहा थाने में अस्पताल संचालक, डॉक्टर और स्टाफ समेत लगभग सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था । लेकिन “अखबारी” दलालों को इस पूरे मामले का रुख मोड़ना था और उन्होंने वही किया, जो उनके “मिज़ाज” में था । उस वक्त के एसपी सिटी, आईपीएस विश्नोई साहब को “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के खिलाफ बरगलाया गया । नतीजा यह हुआ कि “सत्यम अस्पताल” प्रकरण में एक और मुकदमा गढ़ा गया, जिसमें सीएमओ कार्यालय को “वादी” बनाकर अस्पताल संचालक, मैनेजर और डॉक्टर समेत तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया । इस मुकदमे की सबसे दिलचस्प बल्कि “संदिग्ध” बात यह थी कि इसमें चौथे “अभियुक्त” के तौर पर किसी का नाम “ज्ञात” और “अज्ञात” की तर्ज पर दर्ज नहीं किया गया था । मगर इस “मुकदमे” को दर्ज करने की असल “मंशा” तो यह थी कि इस मुकदमे को एक “औज़ार बनाकर “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को घेरा जाए । ऐसा इसलिए भी जरूरी था क्योंकि दो दिनों के भीतर ही आईपीएस “विश्नोई” और शाहपुर पुलिस के खिलाफ “कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट” की कार्यवाही तय मानी जा रही थी । इसी दबाव से बचने के लिए “गुलरिहा” पुलिस ने सबसे पहले “सत्यम अस्पताल” प्रकरण में 160 CrPC की नोटिस “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को 22 फरवरी 2023 को भेजा । नोटिस में “सत्यम अस्पताल” प्रकरण को लेकर “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को गवाह बताते हुए सहयोग करने की बात कही । देखें नोटिस !
160 CrPC : गवाह से अभियुक्त बनाने का खेल
160 CrPC की नोटिस का मतलब साफ था कि “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” को “अहम गवाह” बताकर उसे थाने बुलाया जाए और फिर उसे गायब कर दिया जाए । लेकिन जब गुलरिहा पुलिस को यह एहसास हुआ कि उनका यह दांव बेअसर रहेगा, तो उन्होंने ज़्यादा “ख़तरनाक” रास्ता अपनाया । 22 फरवरी 2023 को नोटिस तामील होने के दिन ही शाम को कचहरी के बाहर छात्रसंघ चौराहे पर जीप से टक्कर मारकर “अपहरण” की कोशिश की गई । जब यह “साज़िश” नाकाम हुई, तो अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान ही “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” का नाम उसी दिन “सत्यम अस्प्ताल” प्रकरण के मुकदमे में बढ़ा दिया गया । यानी जिसे 24 घंटे के अंदर “गवाह” बताया जा रहा था, उसे 24 घंटे के अंदर ही उसी दिन “अभियुक्त” बना दिया गया । यह महज़ कानूनी प्रक्रिया नहीं थी… यह एक सोची-समझी साज़िश, बल्कि एक “मंसूबाबंद” वारदात थी ।
हाईकोर्ट का फैसला : झूठ की बुनियाद हिली
ऊपर दिए गए तमाम तथ्यों के आधार पर 2024 में “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया । इसी दौरान “सत्यम अस्पताल” प्रकरण के अन्य नामजद अभियुक्तों ने भी देखा-देखी अपनी-अपनी याचिकाएँ दाखिल कर दीं, मानो राहत की “बारिश” सबके लिए एक साथ होने वाली हो । लेकिन यहाँ “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” ने जल्दबाज़ी नहीं दिखाई बल्कि एक सोची-समझी कानूनी “हिकमत-ए-अमली” के तहत अपनी याचिका की सुनवाई को जानबूझकर “डिले” किया, ताकि सच और साज़िश के बीच की लकीर और भी “वाज़ेह” हो सके ।
नतीजा यह हुआ कि “सत्यम अस्पताल” के बाकी अभियुक्तों को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली ! उनकी कोशिशें नाकाम और बेअसर साबित हुईं । इसके बाद 29 अप्रैल 2026 को “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” ने तमाम साक्ष्यों और ठोस तथ्यों के साथ अपनी याचिका पर सुनवाई कराई और “हाईकोर्ट” ने “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के खिलाफ “ट्रायल” कोर्ट में चल रही “सत्यम अस्पताल” के मुकदमे की सुनवाई पर रोक लगा दी । यह राहत सिर्फ “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के लिए है और यहीं वजह है कि अब “बदहवास गुप्ता” के “हिस्ट्रीशीटर” वाले झूठ की कमर में जबरदस्त “फ्रैक्चर” हो गया है । देखें आदेश !
हाईकोर्ट में क्यों अहम बन रहा है सत्यम अस्पताल प्रकरण
2022 से पहले “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” पर चार मुकदमे दर्ज थे ! जिनमें से दो में अदालत “फाइनल रिपोर्ट” स्वीकार कर चुकी थी । बाकी दो मुकदमे “पारिवारिक” पृष्ठभूमि से जुड़े थे । इसी “सत्यम अस्पताल” प्रकरण को जोड़कर “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के खिलाफ “हिस्ट्रीशीट” खोली गई और आगे चलकर “गैंगस्टर के मुकदमे के लिए भी इसी “सत्यम अस्पताल” के मुकदमे को आधार बनाया गया । लेकिन “सुप्रीम कोर्ट” पहले ही गैंगस्टर की कार्यवाही पर सख्त ऐतराज जताते हुए “गैंगेस्टर” बनाने पर रोक लगा चुका है । अब हाईकोर्ट ने “सत्यम अस्पताल” प्रकरण के “ट्रायल” पर रोक लगाकर इस पूरे गढ़े गए “नैरेटिव” को “ध्वस्त” करने की दिशा में एक और बड़ा, “निर्णायक” कदम बढ़ा दिया है । देखें सुप्रीम कोर्ट का आदेश !
2022-2025 तक की कार्यवाही अब हाईकोर्ट के कटघरे में
गोरखपुर पुलिस द्वारा 2022 से 2025 तक “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के खिलाफ की गई हर कार्यवाही को नए सिरे से जाँच के दायरे मे लाये जाने के मामले पर अब हाईकोर्ट सुनवाई करेगा । “शीर्षस्थ” न्यायालय से लेकर “हाईकोर्ट” तक यह गौर किया जाएगा कि दिसंबर 2022 में “ड्रग माफिया” और नकली दवा “गिरोह” के खिलाफ खुलासे और “ड्रग माफिया” का सहयोग करने के मामले में आईपीएस “विश्नोई” के खिलाफ CM यूपी को भेजे गए पत्र बाद “ड्रग माफिया” की तहरीर पर ही “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के खिलाफ मुकदमा क्यों लिखा गया ? इस मुकदमे पर हाईकोर्ट से “स्टे” मिलने के एक महीने बाद “सत्यम अस्पताल” केस में नाम बढ़ाकर जेल क्यों भेजा गया ? जेल के दो महीनों के अंदर ही “डिफॉल्ट बेल” मिलने के डेढ़ महीने बाद “गैंगस्टर” का मुकदमा किन परिस्थितियों में लगा ? यह सिलसिला महज़ इत्तेफाक नहीं था बल्कि एक सुनियोजित “इंतकामी” कार्रवाई की “दास्तान” थी । गोरखपुर “ड्रग डिपार्टमेंट” के सरगना “मोहन तिवारी” पर शासन द्वारा की गयी कार्यवाही से भी अब यह साबित हो चुका है कि 2022 में “ड्रग माफियाओं” के खिलाफ “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” द्वारा किया गया खुलासा बिल्कुल सही था….इसलिए सारी “फील्डिंग” के धागे अब “उधेड़े” जा रहे हैं । “कोढ़” में “खुजली” जैसा काम तो तब हो गया जब शासनादेश के विपरीत जाकर बिना किसी प्रारंभिक जाँच के ही 2024 से लेकर 2025 तक “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के खिलाफ ऐसे चार मुकदमों को दर्ज किया गया…जिसमे से दो मुकदमों के वादी “शपथपत्र” देकर “मुकर” चुके हैं… और बाकी दो में “कूटरचना” कर “मुकदमा” खड़ा करने की कोशिशों के पुख्ता सुबूत “हाईकोर्ट” के रिकॉर्ड में मौजूद हैं । 2024 से 2025 के बीच के घटित मामले में “कोतवाली” और “शाहपुर” थानेदार साहब की जिम्मेदारी तय किये जाने के भी पूरे “आसार” हैं ।
बदहवास गुप्ता और दरगाही गैंग के लिए “कानूनी तूफ़ान” 6 मई तक !
अब उम्मीद है कि इस फैसले का ज़ोरदार झटका “बदहवास गुप्ता” और उसके “दरगाही गैंग” को लगा होगा क्योंकि “हिस्ट्रीशीट” “गैंगेस्टर” के लिये इस्तेमाल किया गया “सत्यम अस्पताल” प्रकरण अब ICU में अपनी आखिरी “साँसे” गिन रहा है ! भले ही यह जोर का “झटका” बाहर से देखने पर “धीरे” महसूस हो रहा हो लेकिन असल कानूनी “भूचाल” अभी बाकी है । अब “कच्छा” बदलने से तो “दस्त” नहीं रुकेगा “बदहवास गुप्ता” ! 6 मई तक एक और बड़ा, और निर्णायक झटका तुम तमाम “दरगाही” मुखौटेबाज़ों को लगना तय है…क्योंकि “करम” और “कर्मकांड” मिटाने से नहीं मिटते ! और हाँ “गुप्ता जी” यह भविष्यवाणी तुम्हारी तरह कोई फर्जी “सनसनी” नहीं है बल्कि आने वाले वक्त की “दस्तक” है ! बस दिन गिनो क्योंकि आज 2 “मई” है और सिर्फ “चार” दिन बाकी हैं !

