गोरखपुर : इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर…एक ऐसा नाम, जिनकी “अदालत” में अगर किसी ज़ुल्म और ज्यादती का मामला पहुँच जाए तो “नाइंसाफी” करने वाले की “पेशानी” पर “शिकन” आना तय माना जाता है । कहा जाता है कि अन्याय करने वाला तब तक “सुकून की साँस नहीं ले पाता है , जब तक उसकी फाइल सुरक्षित तौर पर”मुनीर” साहब की अदालत से गुजर न जाए । बेशक, मुनीर साहब जैसे न्यायधीशों की वजह से ही आज भी न्यायपालिका की साख “बुलंद” है और आम आदमी का भरोसा कायम है । “हनीट्रैप गैंग” और पेशेवर महिलाओं के जरिए ब्लैकमेलिंग का धंधा इन दिनों जिस तेजी से फैल रहा है, यह समाज के लिए एक “संगीन” खतरा बन चुका है । ऐसा ही एक गंभीर मामला “मेरठ” से मुनीर साहब की अदालत में महीने भर पहले ही पेश हुआ । हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव (गृह), उत्तर प्रदेश तथा डीजीपी को सख्त निर्देश देते हुए साफ कहा कि….“यह एक अत्यंत गंभीर मामला है । यदि “हनीट्रैप” गैंग जैसे अपराधों को जारी रहने दिया गया, तो एक “सभ्य” समाज में जीवनयापन करना कठिन हो जाएगा” । देखें आदेश !
हनीट्रैप गैंग की बढ़ती आहट, मेरठ से गोरखपुर तक..
अब सवाल यह है कि इस आदेश का जिक्र यहाँ क्यों ? इसलिए, क्योंकि यह मामला महज “मेरठ” तक सीमित नहीं है बल्कि आपके अपने शहर गोरखपुर में भी इसी तरह के “हनीट्रैप” नेटवर्क की आहट सुनाई दे रही है । हाईकोर्ट के इसी निर्णय को आधार बनाकर गोरखपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय में एक याचिका दायर की गई, जिसमें “हनीट्रैप” गैंग से जुड़े दो अज्ञात मोबाइल नंबरों समेत सात संभावित आरोपियों के नाम अदालत के समक्ष रखे गए । राजघाट थाने के “कुख्यात” बदमाश इक़रार अहमद और उसके “गिरोह” द्वारा तीन पत्रकारों समेत एक अधिवक्ता को “हनीट्रैप” गैंग के जरिये फंसाकर “ब्लैकमेल” करने के प्रमाण सामने आए थे । मामले की “नज़ाकत” और गंभीरता को देखते हुए CJM कोर्ट गोरखपुर ने 29 अप्रैल 2026 को क्षेत्राधिकारी “कैंट” को “प्रारंभिक जाँच” के आदेश जारी कर दिये । देखें आदेश !
कोर्ट के आदेश के बाद नामजद आरोपियों की खुली धमकी..
लेकिन इस आदेश के बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे मामले को और ज्यादा “सनसनीखेज” और “चिंताजनक” बना दिया । याचिका दायर होने और अदालत द्वारा आदेश जारी किए जाने के बाद, 7 नामजद आरोपियों में से तीन नामजद आरोपियों द्वारा शिकायतकर्ता को “सोशल मीडिया” प्लेटफॉर्म “फेसबुक” के जरिए खुलेआम गंभीर धमकियाँ दी गईं…जिसमे “पेट्रोल” डालकर जिंदा जलाने, गुंडों से घेरवाने और “मुखबिर” लगा कर रेकी कराने जैसी बातें शामिल हैं…और साथ ही गाली-गलौज और डराने-धमकाने का सिलसिला भी शामिल है । उपलब्ध तथ्यों और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के मुताबिक, इस “हनीट्रैप” नेटवर्क के सरगना के तौर पर “इक़रार अहमद” का नाम सामने आया है, जबकि उसके सहयोगियों में प्रमुख रूप से 7 लोग नामजद हुए हैं…जिनमे सुभाष गुप्ता, जफर खान और फैय्याज अहमद के नाम भी शामिल हैं । मामला तब बेहद “संगीन” हो गया जब “इलाहाबाद हाईकोर्ट” के आदेश को आधार बनाकर CJM कोर्ट में डाली गई “याचिका” पर अदालत के आदेश के बाद आरोपी जफर खान समेत फैय्याज और सुभाष गुप्ता द्वारा शिकायतकर्ता को सोशल मीडिया “फेसबुक” के जरिये “पेट्रोल” डालकर “जला” देने की धमकी दे दी गईं । देखें धमकी का स्क्रीन शॉट !
सुभाष गुप्ता धमकी स्क्रीनशॉट PDF
एसएसपी समेत सी.एस.(होम) से लेकर डीजीपी तक पहुँचा मामला…
इस पूरे घटनाक्रम के बाद CJM कोर्ट द्वारा भी इस धमकी के मुद्दे को बेहद गंभीरता से लेने की संभावनाएं काफी बढ़ गयी हैं । साथ ही, जिले के एसएसपी समेत प्रमुख सचिव (गृह) और डीजीपी को भी हाईकोर्ट के निर्णय के साथ ही पूरे प्रकरण से अवगत कराया जा चुका है । इन हालातों में अब इस बेहद “संगीन” मसले की तफ्तीश अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रही बल्कि इस प्रकरण में “हथियार” के तौर पर इस्तेमाल किए गए “सोशल मीडिया” प्लेटफॉर्म “फेसबुक” (मेटा) को भी “विधिक नोटिस” भेजते हुए 48 घंटे के भीतर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है और साथ ही इस मामले में “फेसबुक” को “पक्षकार” भी बनाया गया है । देखें नोटिस !
धमकियों ने शीर्षस्थ न्यायालय पहुँचने का बनाया रास्ता
जाहिर है कि अब तक इस संगीन मसले को कानूनी पेचीदगियों के चलते “शीर्षस्थ” न्यायालय तक पहुँचाने में जो “अड़चने” आ रही थीं…अब वह वर्तमान घटनाक्रम के चलते दूर हो चुकी हैं । मौजूदा घटनाक्रम ने और इक़रार अहमद के खिलाफ़ मुकदमा दर्ज करने से बचने के लिए सीओ कोतवाली द्वारा पूर्व में लगाई गई फर्जी रिपोर्ट की घटना ने भी अब इस “संगीन” मामले को उच्च न्यायालय और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचाने का रास्ता साफ कर दिया है । धक्का इतना “जबरदस्त” है कि इस हरकत के बाद सन्नाटा, सदमा और आशंका…ये तीनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर “टाउन हॉल” की “बापू” प्रतिमा पर “ध्यान” की मुद्रा में बैठ गए हैं । यदि “पत्रकारों” की इच्छा हो तो एक बार उधर से गुजरते समय “फोटो” जरूर खींचें…..क्योंकि नियति के काले आसमान में अब “आशंकाओं” का “इन्द्रधनुष” चमक रहा है ? नीचे देखें सुभाष गुप्ता द्वारा गाली गलौज की पोस्ट में हाईकोर्ट शब्द का इस्तेमाल !

शपथ ग्रहण समारोह से भी जुड़ रहे घटना के तार…
हैरत की बात यह है कि “फेसबुक” पर “पेट्रोल” डालकर जलाने की धमकी देने वाले और गाली गलौज करने वाले तीनो अपने आपको “पत्रकार” बताते हैं..और इनमे से “फैय्याज” और “सुभाष गुप्ता” “जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” के “सदस्य” बताये जाते हैं… इसलिए वर्तमान घटनाक्रम को “सीएम साहब” के “शपथ ग्रहण” समारोह से भी जोड़कर देखा जा रहा है । क्योंकि सीएम साहब के कार्यक्रम में अपराधियों और बदमाशों के “घुसपैठ” के मामले को “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” ने लगातर “प्रमुखता” से उठाया था… जिसे लेकर सीएम साहब के कार्यक्रम में “घुसपैठ” करने वाले बदमाश “इक़रार अहमद” और उसके सहयोगी सुभाष गुप्ता, फैय्याज अहमद और जफर खान खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं । इस पूरे मामले में पर्दे के पीछे बैठे कुछ “मठाधीशों” के भी बेहद अहम भूमिका में होने की संभावना को “खारिज” नहीं किया जा सकता…जिनके इशारे पर ही “अदालत” के आदेश में व्यवधान पहुँचाने की कोशिशों को “अंजाम” दिया गया है । देखें इक़रार, फैय्याज, जफर और सुभाष गुप्ता की तस्वीर !

बड़बोलेपन ने डुबो दी लुटिया….
जानकार बताते हैं कि अभी कुछ ही दिन पहले सुभाष गुप्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि कोर्ट कचहरी से उसका पुराना रिश्ता है । यदि वाकई में यह सच होता तो ऐसी “जाहिलियत” और मूर्खता की उम्मीद किसी “कानून” के जानकार से तो नहीं की जा सकती । गुप्ता जी का “कानूनी” अनुभव तो ऐसा गजब है कि “देवलोक” के यक्ष-गण-नाग-किन्नर सब के सब “आतंकित” हो चले हैं । सभी यह जानते हैं कि यदि अदालत से “हनीट्रैप गैंग” के खिलाफ आदेश नहीं हुआ होता तो “हनीट्रैप गैंग” के आरोपियों के इस “संगीन” अपराध पर भी पहले की तरह ही “पर्दा” डालने की कोशिशें की जाती । लेकिन अब यह असंभव है क्योंकि ये आरोपी अब अपने “बड़बोलेपन” और “मनबढ़ई” के जाल में खुद ही उलझ गए हैं । गुप्ता जी बेहतर जानते हैं कि “पासों” के खेल में “शकुनि” भले ही अपने “हरामीपन” से जीत गया था… लेकिन दुनिया तो आज भी उस पर “थूकती” ही है ।
कहानी का रियल एंगल..भौकाल बनाम हकीकत…
मेरी एक बेहद दिलचस्प कहानी के किरदार हैं “बदहवास गुप्ता” ! ये ऐसे किरदार हैं जो हमेशा “प्रेतात्मा” की तरह उल्टे पाँव ही चलते हैं । इसलिए इन्हें समझाने के लिए मैं अक्सर इनपर “तंज” कसता रहता हूँ । जाहिर है कि मेरी कहानी के इस दिलचस्प “किरदार” को भी सब कुछ समझ मे आ गया होगा..और खासकर “पर्दे” के पीछे बैठे “बदहवास गुप्ता” के “आकाओं” को भी ! एक कहावत है कि समझदार “शत्रु” से कहीं ज्यादा “खतरनाक” एक “मूर्ख” मित्र होता है ! मेरी कहानी के किरदार “बदहवास गुप्ता” ने तो अपनी मूर्खता से बैठे बिठाए खुद समेत अपने “आकाओं” के लिए भी सिर दर्द पैदा कर दिया है । सुना है कि “बदहवास गुप्ता” भौकाल टाइट करने के लिए हमेशा कहते रहते हैं कि उनका कोर्ट कचहरी से पुराना “खानदानी” रिश्ता है ! इस बात पर “बदहवास गुप्ता” के लिए एक बड़ी प्रसिद्ध कहावत है कि…”बाप” रहे “अंधेरे” में और “बेटा” पावर हाउस ! कुछ लोग लोग नाहक में सोशल मीडिया पर पेट्रोल से जिंदा जला देना , मुखबिरों को लगाना और गुंडों से घेरवाने जैसी बकवास बाते करके डर पैदा करते हुए आवाम के बीच अपने और अपने “दरगाही” बदमाश का “भौकाल” टाइट करते रहते हैं । वो नहीं जानते कि यह “डर” तभी चला गया था जबसे इनके “दरगाही” आका की कुण्डली में “सिस्टम” प्रवेश कर गया था । क्या “दरगाही” बदमाशों ने सभी को वैसा ही लाचार और एक “बेकस बेवा” का बेटा समझ रखा है जिसे “लफंटूसों” के साथ मिलकर “गोली” मार दी गयी थी ? लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि “बद्दुआओं” के सैलाबों का असर दिखाई देने का वक्त अब आ पहुँचा है । अब असर दिखाई देगा और भौकाल टाइट करने और डराने समेत “अफवाह” फैलाने वालों के साम्राज्य का “अंत” होगा…लेकिन इस “महासत्य” को “दरगाह” की दो “बोटी” बीफ और एक शीशी “लैला” पर बिक जाने वाले लोग नहीं समझेंगे ।

