गोरखपुर : गोरखपुर में इस वक्त एक अद्भुत, अलौकिक और ऐतिहासिक स्थिति है । सोशल मीडिया खोलिए तो हर तरफ वीडियो ही वीडियो ! कहीं “पेट्रोल” पंपों पर लंबी लाइनें हैं…तो कहीं डीजल के लिए धक्का मुक्की…कहीं गैस एजेंसी पर मारपीट है…तो कहीं लोग रात भर नंबर लगाने के लिए कुर्सी, खटिया और “मच्छरदानी” लेकर सड़क किनारे “डेरा” डाले पड़े हैं ! दूसरी तरफ प्रशासन है जो पूरी वैज्ञानिक गंभीरता और “आध्यात्मिक स्थिरता” के साथ बता रहा है कि सब कुछ सामान्य है ! डीएम साहब तो “आंकड़ों” के साथ बता रहे हैं कि पेट्रोल डीजल की कोई कमी नहीं है…सप्लाई भरपूर है…स्थिति नियंत्रण में है..और दूसरी तरफ जनता है जो बेवजह “पगलाई” हुई है । मीडिया वाले पूछ रहे हैं कि अगर सब कुछ सामान्य है तो फिर ये लंबी लाइनें किस चीज़ की हैं ? क्या लोग 45 डिग्री “तापमान” में घर से बाहर “धूप” सेकने निकले हैं ? और ये आजतक वाले..ये क्या “नरक” मचाए हुए हैं ?

और ये NDTV ! इनको क्या हो गया है ? कभी “लाइन” दिखा रहे हैं…कभी डबल टंकी वाली बाइक…कभी परेशान “जनता” !

और ये इंडिया टुडे वाले ! इनके पास कोई और काम-धंधा नहीं है क्या ? ये कैसी कैसी बहकी बहकी वीडियो चला रहे हैं ?
अरे राष्ट्रीय चैनलों..तुम्हारे तो लाइसेंस रद्द कर देने चाहिए! देशहित में इस वक्त जनता को “लाइन” नही बल्कि अनुशासन और “उपवास” सिखाना चाहिए ! तुम पूछते हो कि ये लोग 45 डिग्री “तापमान” में क्यों खड़े हैं ? क्या तुम्हें नहीं पता कि कल चली भयंकर “शीतलहरी” से भयभीत हुए लोग यदि आज 45 डिग्री तापमान में घंटों लाइन में खड़े होकर “धूप” सेंक रहे हैं…तो इसमें बुराई क्या है ?
तुम दिखाते हो कि घरेलू महिलाएं डीजल पेट्रोल के लिए रात भर लाइन में लगी हुई हैं ! अरे तुम लोग तो महिलाओं की “स्वतंत्रता” के ऐसे “शत्रु” हो जो “स्वतंत्र” रूप से समाज में “विचरण” कर रहे हैं । क्या महिलाओं को “आउटिंग” नहीं चाहिए ? आप क्या चाहते हैं कि वे हमेशा चूल्हा-चौका ही फूंकती रहें ? अरे गैस सिलेंडर के बहाने ही सही…यदि किसी महिला को पहली बार रात भर खुले आसमान के नीचे मच्छरदानी लगाकर सोने का अवसर मिला है…तो इसमें समस्या क्या है ? सोचो कि घर की चारदीवारी से बाहर चूल्हा चौका से दूर उसे “नाइट आउट” का अनुभव कितने जमाने बाद मिल रहा है ! बाकी जो लोग खुले आसमान के नीचे सोए हैं जरा उनसे पूछो कि देश में लोग हजारों रुपये खर्च करके “नाईट कैंपिंग” करने जाते हैं…लेकिन वर्तमान परिवेश में जनता को मुफ्त में सुविधा मिल रही है ! ऊपर से ठंडी “पुरवइया” का “बोनस” अलग से ! लेकिन नहीं…इन “मीडिया” वालों को तो हर चीज़ में “संकट” ही दिखता है ।
लोग कहते हैं कि सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो क्या झूठ हैं ? अरे भाई सोशल मीडिया वालों को छोड़िए…इनके पास कोई काम-धंधा तो है नहीं…इसलिए दिन भर मोबाइल लेकर घूमते रहते हैं बेचारे ! अब ऐसी स्थिति में फिर “वीडियो” ही तो बनाएंगे ! इन्हें दोष मत दो और बताओ कि किसने कहा था हर हाथ में मोबाइल पकड़ाने का “आइडिया” ? “डिजिटल क्रांति” लाने चले थे..तो अब भुगतो ! सबसे पहले मोबाइल कंपनियों के लिए “एडवाइजरी” जारी करो कि “पचास” हजार मूल्य से नीचे के फोन में कैमरा देना तुरंत बंद करे । हो सके तो सभी कंपनियां ऐसा “सॉफ्टवेयर” अपडेट करने के लिए भेजें जिससे “कैमरा” काम करना ही बंद कर दे । और सबसे महत्वपूर्ण यह कि सबसे पहले तो उस “करमजले” को पकड़ो जिसने हर हाथ मोबाइल का “आईडिया” दिया था । जब मोबाइल नहीं था तब कितनी शांति थी ! आदमी लाइन में लगा “मर” भी जाए तो मोहल्ले से बाहर खबर नहीं निकलती थी !
कुछ लोग कह रहे हैं कि गैस डीजल पेट्रोल की किल्लत है । अरे
सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि आजकल झंडू बाम लोग “किल्लत” का मतलब ही नहीं जानते ! किल्लत का मतलब प्रशासनिक भाषा में तब माना जाता है जब टंकी पूरी तरह सूख जाए । जब तक नीचे तली में दो बूंद हिल रही हैं…तब तक “स्थिति सामान्य” है ! और रही बात ये कि जनता लाइन में क्यों खड़ी है ? तो अब जनता लाइन में खड़ी नहीं होगी तो क्या अधिकारी खड़े होंगे ? क्या आपने कभी किसी “अधिकारी” को डीजल के लिए धक्का खाते देखा है ? कभी किसी “नेता” को सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े देखा है ? कभी किसी “पत्रकार” को पांच लीटर पेट्रोल के लिए लड़ते देखा है ? इसलिए जनता की जिंदगी में “किल्लत” हो ही नहीं सकती ! इनके जीवन में तो “जिल्लत” इतनी ज्यादा होती है कि “किल्लत” कभी आ ही नहीं सकती !
अरे जनता तो इस वक्त विपरीत परिस्थितियों में जीने की ट्रेनिंग ले रही है । जिसे कुछ लोग “सिस्टम की त्रासदी” बता रहे हैं…असल में वो “राष्ट्रीय चरित्र निर्माण” अभियान है ! धैर्य सीखिए ! लाइन में लगना सीखिए ! कम संसाधनों में जीना सीखिए और पसीना बहाना सीखिए ! और सबसे जरूरी तो यह है कि…सरकारी बयान पर आंख बंद करके विश्वास करना सीखिए ! क्योंकि जमीन पर जो दिख रहा है वो आपकी आंखों का भ्रम है…और जो आंकड़ों में लिखा है वही अंतिम व “परम” सत्य है । अतः यह अत्यंत आवश्यक है कि हमें अविलंब किसी “नेत्र” चिकित्सक से अपनी “नजर” और “नजरिये”…दोनों का इलाज कराना चाहिए ।
मीडिया वाले दिखा रहे हैं कि “किल्लत” नहीं है तो लोग डबल टंकी बांध कर “पेट्रोल” पंप पर क्यों पहुँच रहे हैं ? अरे भाई ये लोग जो “डबल टंकी” बांधकर पेट्रोल पंप पहुंच रहे हैं…वो समाज के वही “चोर” हैं जो रात में मोटरसाइकिल की “टंकी” खोलकर ले जाते थे। क्या तुम्हें दिख नहीं रहा कि छिपे हुए “अपराधी” खुद ही “माल” समेत बाहर आ रहे हैं ? ये “व्यवस्था” का ही तो कमाल है । अब रही पेट्रोल टंकियों पर हो रही मारपीट की बात…तो यह जान लो कि ये सब “नौतपा” का असर है । जब गर्मी “दिमाग” में चढ़ती है तब “इंसान” लाइन में “दर्शनशास्त्र” नहीं पढ़ता बल्कि “धक्का” देता है ।
अब कुछ अफवाहबाज लोग पूछ रहे हैं कि अगर सप्लाई भरपूर है तो जनता का भरोसा क्यों टूट रहा है ? अरे भाई ! यहाँ पिता-पुत्र के बीच भरोसा टूट रहा है…पति-पत्नी के बीच भरोसा टूट रहा है…पड़ोसी सालों तक आपस में बात नहीं करते थे…लेकिन पहली बार ऐसा मौका आया है जब पूरा “समाज” एक ही “लक्ष्य” पर एकजुट है ! पेट्रोल, डीजल और गैस का जुगाड़ ! कभी देखी थी ऐसी “समरसता” ? कभी देखी थी ऐसी “एकता” ? जो “पड़ोसी” सालों से एक-दूसरे का मुंह नहीं देखते थे…आज एक ही लाइन में घंटों खड़े होकर देश-दुनिया पर चर्चा कर रहे हैं । सिलेंडर और डिब्बा लाइन में लगाकर साथ साथ “चाय” पी रहे हैं और अपने दुख सुख साझा कर रहे हैं । आखिर ये कौन लोग हैं जिनसे ये “भाईचारा” देखा नहीं जा रहा ?
कोई समस्या नहीं है…सब अफवाह है…शासन-प्रशासन को बदनाम करने की साजिश है….सब “नौतपा” का असर है और दिन-ब-दिन घटती जा रही “देशभक्ति” का प्रदर्शन है । मुझे भी यह बात तब समझ में आई…जब “इमरजेंसी” के लिए “डीजल” खोजते खोजते बनारस हाईवे पर 120 किलोमीटर दूर दूसरे “जिले” में गया और “टंकी” फुल कराई ! उसके बाद जाकर एहसास हुआ कि असली कमी “पेट्रोल डीजल” की नहीं बल्कि “समझ” की है ।

