गोरखपुर में वायरल वीडियो ! जब कानून अचानक से सोशल मीडिया पर टूट पड़ा !

गोरखपुर : पिछले एक महीने के दौरान गोरखपुर में खबर प्रसारित करने वाले कई “सोशल मीडिया” अकाउंट्स पर मुकदमे दर्ज हुए । इन मुकदमों ने एक नई “बहस” को जन्म दिया है । सवाल यह है कि जिनके इशारे पर पुलिस थानों की “GD” का मुँह खुला…वे तो शहर के बड़े “रसूखदार” माने जाते हैं। फिर ऐसा क्या था जिसे दबाने छुपाने और दफ़न करने की इतनी बेचैनी थी ?

पहला मामला रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के उस “फ्लोटिंग रेस्टोरेंट” से जुड़ा है…जहाँ देर रात तक नाबालिग लड़के-लड़कियों को शराब, हुक्का और “डांस महफ़िल” परोसे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ । वीडियो ऐसा फैला मानो सूखी झाड़ियों में “चिंगारी” पड़ गई हो । लोग लानत-मलानत कर रहे थे, लेकिन गोरखपुर का “अखबारी कुनबा” और उनके “वसूलीबाज़” चेले ऐसे ख़ामोश बैठे रहे मानो शहर में कुछ हुआ ही न हो । इस वायरल वीडियो को लेकर “फ्लोटिंग रेस्टोरेंट” के खिलाफ कार्यवाही कराने के लिए कुछ युवाओं का कुनबा “पुलिस अधीक्षक” से मिलने उनके कार्यालय भी पहुँचा । देखें पत्र !

लेकिन हैरानी की बात यह है कि मामूली छींक को “छितरा” बनाकर “छप्पर फाड़” सनसनी बना देने वाले “अखबारनवीस” इस गंभीर मामले पर ऐसे “ख़ामोश” थे…जैसे किसी ने उनकी “ज़बान” गिरवी रख ली हो । वजह भी साफ़ है कि बेईमानी के कारोबार में ईमानदारी सबसे बड़ा “ख़तरा” होती है ।

इसी बीच कुछ लोग समूह में पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे और रेस्टोरेंट पर कार्रवाई की मांग करने लगे । जब यह वीडियो “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” तक पहुँचा…तो हमने पड़ताल के लिए एक ऐसे बेहद बुज़ुर्ग और वरिष्ठ पत्रकार से संपर्क किया…जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी देश के “नामी” अखबारों में खपा दी । उन्होंने एक बेहद “तल्ख़” लेकिन सटीक बात कही कि “वीडियो पुराना हो सकता है…लेकिन “धंधा” रोज़ का है । और इस धंधे के सबसे बड़े “सरपरस्त” यही अखबार हैं । अब वीडियो वायरल हुआ है तो इनके चेहरे से “नक़ाब” उतर रहा है । इसलिए अब होगा यही कि पर्दे के पीछे से वीडियो वायरल करने वालों पर मुकदमे लिखवाए जाएंगे…और “बंदूक” फ्लोटिंग रेस्टोरेंट मालिक के कंधे पर रखकर चलाई जाएगी । बुज़ुर्ग पत्रकार की बात कुछ ही दिनों बाद “सच” साबित हुई और “सोशल मीडिया” अकाउंट्स चलाने वालों पर मुकदमे दर्ज हो गए ।

मुकदमा लिखे जाने से पहले एक “ऑडियो” भी “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के हाथ लगा । ऑडियो के विषय में बताया जा रहा है कि “फ्लोटिंग रेस्टोरेंट” से जुड़ा एक जिम्मेदार व्यक्ति वीडियो वायरल होने से परेशान था और किसी मध्यस्थ के जरिए वीडियो हटवाने के लिए “50 हजार” रुपये देने की बात कर रहा था । ऑडियो में मध्यस्थ यह कहते हुए सुना जा सकता है कि कुछ लोग अधिकारी के पास गए थे…तो उनका “खर्चा” भी देना पड़ेगा ! इस बात पर “फ्लोटिंग रेस्टोरेंट” से जुड़ा जिम्मेदार व्यक्ति रुपये देने के लिए “हामी” भी भर रहा है । सुनें ऑडियो !

लेकिन कहानी में असली मोड़ तब आया जब कुछ और सोशल मीडिया अकाउंट्स ने भी उसी वीडियो को “वायरल” कर दिया । फिर क्या था…तमाम प्लेटफॉर्म पर वायरल वीडियो ने रेस्टोरेंट से जुड़े कुछ “नक़ाबपोशों” की इज़्ज़त को “धोबीघाट” बना डाला । वायरल वीडियो ने फ्लोटिंग रेस्टोरेंट से जुड़े “नकाबपोशों” को ऐसा फींच फींचकर “धोया” कि गोरखपुर के “किराना” बाजार में “वॉशिंग पाउडर” की जबरदस्त “किल्लत” महसूस होने लगी । मगर सबसे दिलचस्प हिस्सा अभी बाकी था । चार-पाँच “सोशल मीडिया” प्लेटफॉर्म पर वीडियो “वायरल” होने के बाद अचानक जब “फ्लोटिंग रेस्टोरेंट” का कथित संचालक पूरे “कॉन्फिडेंस” में आ जाता है और मध्यस्थ से कहता है कि “जितना वीडियो वायरल करना है कर लो…अब देखो कि क्या होता है” ? सुनें ऑडियो !

अब सवाल यह है कि जो शख्स कुछ घंटे पहले तक मामला “मैनेज” करने के लिए बेचैन था….उसे अचानक से ऐसा कौन-सा “सिंकारा का बूस्टर डोज़” मिल गया ? किस दरबार से उसे यकायक यह यक़ीन हासिल हो गया कि अब कानून उसकी जेब में तह करके रख दिया गया है ? भ्रष्टाचार और “सेटिंगबाज़ी” की “अक्षौहिणी” सेना खड़ी कर “कौरवकालीन हस्तिनापुर” पर राज करने वाले कुछ “अखबारनवीस” अचानक इस मामले में “मौन-व्रत” पर क्यों चले गए ? और “फ्लोटिंग रेस्टोरेंट” के जिम्मेदार की तहरीर पर मुकदमा लिखने वाले “इंस्पेक्टर” साहब को… फ्लोटिंग रेस्टोरेंट की वही “वायरल” वीडियो तब क्यों नहीं दिखाई दी..जब पूरी “आवाम” उसे देख रही थी ? शायद इसलिए…क्योंकि कानून तो अंधा होता है न…!

दूसरा मामला हमारे अज़ीज़ “नेता जी” से जुड़ा है । हालात ये है कि वो सड़क पर कुछ बोल दें तो “मीम” बन जाता है…मंच पर कुछ बोल दें तो “रील” बन जाती है…और अगर माइक थोड़ा ज़्यादा देर खुला रह जाए तो पूरी आवाम को नया “कॉमेडी कंटेंट” मिल जाता है । कभी लफ़्ज़ लड़खड़ा जाते हैं… कभी तर्क उल्टी दिशा में दौड़ पड़ते हैं…और कभी बयान ऐसा निकलता है कि सुनने वाला पहले “माथा” पकड़ता है… फिर “मोबाइल” निकालकर रिकॉर्डिंग चालू कर देता है ।

मैंने पहले ही कहा है कि “सोशल मीडिया” वालों के पास कोई काम धंधा नहीं है । इनके पास सिर्फ काम है “चीप” वीडियो बनाना औऱ उस “चीप” वीडियो को “बड़ी खबर”..”बहुत बड़ी खबर” बनाकर “रायता” फैलाना ! जैसे ही इन लोगों ने “नेताजी” के “बयानबाज़ी” का वीडियो चलाया….वैसे ही “दरबार-ए-सियासत” में “कोहराम” मच गया । नेता जी के “सचिव” महोदय तिलमिला उठे । उन्हें महसूस हुआ कि कुछ लोग “छवि धूमिल” करने की “साज़िश” कर रहे हैं । बस फिर क्या था… लोकतंत्र के आँगन में “मुकदमों” की फुलझड़ियाँ छोड़ दी गईं और तीन “सोशल मीडिया” कंटेंट क्रिएटर्स पर केस दर्ज हो गया । अब ये तो वही हाल हुआ जैसे कोई “शख़्स” खुद ही केले के “छिलके” पर पैर रख दे… और फिसलने पर FIR “फुटपाथ” पर लिखवा दे…कि तुमने मुझे गिरने क्यों दिया ? या फिर बारिश में “छाता” घर भूल आए और बादलों पर “इल्ज़ाम” ठोक दें कि आपकी वजह से “कपड़े” भीग गए ।

नेताजी के “दरबारी” लोग नेताजी के “विनोदप्रिय” स्वभाव को नेताजी की “जनप्रिय शैली” बताते हैं । उनका दावा है कि नेता जी “जनता” की भाषा बोलते हैं । बस चाहिए यह कि…इस बात को समझाने के लिए “नेताजी” के हर “भाषण” से पहले “स्क्रीन” पर एक “डिस्क्लेमर” चलाना चाहिए । और “डिस्क्लेमर” यह होना चाहिए कि “इस बयान का वास्तविक तथ्य, तर्क, इतिहास, विज्ञान और सामान्य बुद्धि से कोई संबंध नहीं है । कृपया हँसते समय अत्यंत “सावधानी” बरतें । अत्यधिक “ठहाके” लगाने पर “कानूनी कार्रवाई” संभव है !

By systemkasach

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का खुद का चेहरा कितना विद्रूप और घिनौना है..ये आप इस पेज पर देख और समझ सकते हैं । एक ऐसा पेज, जो समाज को आईना दिखाने वाले "लोकतंत्र के चौथे स्तंभ" को ही आइना दिखाता है । दूसरों की फर्जी ख़बर छापने वाले यहाँ खुद ख़बर बन जाते हैं ।

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