जब ‘पूछता है गोरखपुर” खुद कटघरे में खड़ा हो गया !

दो दिन पहले सोशल मीडिया पर मैंने एक पोस्ट देखी। उस पोस्ट में एक तरफ़ बेचैनी का समंदर मचल रहा था तो दूसरी तरफ़ बेहयाई और थेथरई का ऐसा शानदार मुज़ाहिरा था कि देखने वाला दंग रह जाए। फेसबुक पर डफर चच्चा ने अपनी शैक्षणिक योग्यता और बौद्धिक औक़ात के अनुरूप एक सवाल दागा था ! “ब्राह्मण लड़की की हत्या किसने की ? सारे जेवर किसने रख लिए ? लड़की की लाश कहाँ है ? पूछता है गोरखपुर” !

“डफर चच्चा” के इस परम “सुतियापे” पर सुतिया इंटर कॉलेज के प्रबंधक “बदहवास कक्का” ने भी अपने “वाहियात” मुख कटोरे का उद्घाटन किया…और “डफर चच्चा” की हाँ में हाँ मिलाने लगे । यदि कहीं “मूर्खता” की पराकाष्ठा में “अव्वल” आने की कोई प्रतियोगिता चल रही हो…तो भला ऐसी “महफ़िल” में “फैज़ाबाद दद्दा” ख़ामोश कैसे रह सकते थे ? सो उन्होंने भी “हामी” भरनी शुरू कर दी ।

इन तीनों का “रांड रुदन” देखकर एक तरफ़ हँसी आ रही थी…तो दूसरी तरफ़ रहम भी..कि ये सब “एलईडी” लाइट के दौर में “मिट्टी के तेल” वाली “ढिबरी” से “सूरज” तलाश रहे थे । इनकी अक्ल का आलम यह था कि 2010 के एक उपन्यास आधारित मुक़दमे से ये सब अपने जीवन का सबसे बड़ा “राहु” कटान होने की उम्मीद बाँधे बैठे थे । इसी वहम, इसी ख़ुशफ़हमी और इसी ख़याली पुलाव की बदौलत फेसबुक पर बार बार “अनर्गल” प्रलाप भी किए जा रहे थे कि… “फलनवा अब गया… तब गया… जल्दी ही अंदर जाने वाला है’ ! आज उनकी उम्मीदों की “केरोसिन” वाली “ढिबरी” बुझाने में मुझे तकलीफ़ तो बहुत हो रही है… मगर अफ़सोस कि ऐसा करना भी अब “लाज़िमी” हो चला है ।

ये तीनों “महामूर्ख” एक दिन अपने सवालों का जवाब ढूँढते ढूँढते एक ऐसे “विधि विशेषज्ञ” से टकरा गए…जो इस मुक़दमे की नस नस, रग रग और तह-दर-तह हक़ीक़त से वाक़िफ़ थे । मुलाक़ात होते ही तीनों ने फ़ौरन अपना “माइक तमंचा” उनके मुँह में लगभग ठूँसते हुए सवाल दाग मारा… ! बताइए कि हत्या किसने की ? लाश कहाँ है ? जेवर कहाँ गए ? पूछता है गोरखपुर !

विधि-विशेषज्ञ महोदय ने “इत्मीनान” से अपना चश्मा ठीक किया.. पानी का घूँट लिया और बोले.. जनाब, सबसे पहले यह समझ लीजिए कि जिस घटना की चर्चा आप कर रहे हैं, वह 27 जनवरी 2010 की है । और जिसे आप आज भी ‘लड़की’ कहकर संबोधित कर रहे हैं..वह उस समय विधिवत “विवाह” कर चुकी एक विवाहित महिला थी ! इसलिए “होश” की दवा कीजिये और अब ज़रा संभलकर बोला कीजिए । और मुकदमा हत्या का नहीं बल्कि आत्म हत्या के लिए उकसाने का है । याद रखिये कि जब दस्तावेज़ बोलना शुरू करते हैं तो कल्पनाएँ अक्सर “बेहोश” होकर गिर पड़ती हैं । विशेषज्ञ महोदय ने आगे कहा यह रहा विवाह प्रमाण पत्र का दस्तावेज !

मैरेज सर्टिफिकेट PDF

दस्तावेज देखते ही “डफर चच्चा” और उनकी गैंग के चेहरे का रंग कुछ वैसा हो गया जैसा “गणित” की परीक्षा में बैठा छात्र ठीक वैसा ही महसूस करता है…जिसने पूरी रात “गणित” पढ़ा हो लेकिन सामने प्रश्न पत्र “इतिहास” का धर दिया गया हो । “डफर मंडली” फिर भी शांत नहीं हुई और “बहवास दद्दा” बोल पड़े कि तीन लाख रुपये नहीं मिलने पर हत्या कर दी गई थी और लाश छिपा दी गई ! विशेषज्ञ मुस्कुराए और पूछा…जनाब पढ़े-लिखे कितना हैं ? सवाल सुनते ही माहौल में वैसी ही बेचैनी फैल गई जो किसी कोचिंग सेंटर के बाहर अचानक बोर्ड परीक्षा का रिज़ल्ट लग जाने पर फैलती है । लेकिन “डफर” जैसा फिर वही सवाल ! लाश कहाँ है ? पूछता है गोरखपुर !

विशेषज्ञ ने गहरी साँस ली और बोले…अरे “डफर चच्चा”.. यदि मृत्यु प्रमाण पत्र में मृत्यु की तिथि…मृत्यु का स्थान और मृत्यु का कारण दर्ज है…तो सबसे पहले यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए जिन्होंने उस लड़की का “मृत्यु प्रमाण पत्र” बनवाया था ! इसके बाद विधि विशेषज्ञ साहब ने घटनाक्रम समझाना शुरू किया ! 27 जनवरी 2010 को विवाह की जानकारी लड़की के घरवालों को हुई । वे विवाह कार्यालय पहुँचे और सामाजिक रीति-रिवाजों से शादी कराने का आश्वासन देकर लड़की को अपने साथ ले गए । इसके बाद वह सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दी। उधर पति ने खोजबीन शुरू की। इसी दौरान 28 फरवरी 2010 को उस पर हमला हुआ । वह गंभीर रूप से घायल हुआ लेकिन जीवित बच गया । उसने उसी दिन लड़की के घरवालों के विरुद्ध मुक़दमा दर्ज कराया । कुछ दिनों बाद जुगाड़ तंत्र से दूसरी तरफ़ से भी मुक़दमा दर्ज कराया गया…औऱ आरोप यह लगाया गया कि लड़की को गायब करने के लिए लड़का ज़िम्मेदार है

देखिए, अब उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार मृत्यु प्रमाण पत्र भी मौजूद है । वो मृत्यु प्रमाण पत्र जिसे लड़किनके माँ बाप ने बनवाने और LIC का 7 लाख निकालने में बाद निरस्त करा दिया था… ताकि किसी को कुछ न पता चले । डेथ सर्टिफिकेट में मृत्यु की तिथि, मृत्यु का कारण और मृत्यु का स्थान दर्ज है । यदि मृत्यु का स्थान “मायका” दर्शाया गया है..तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि फिर दूसरे व्यक्ति पर लाश छिपाने का आरोप किस आधार पर लगाया जा रहा है ? और यह “डेथ सर्टिफिकेट” भी तो लड़की के “बाप” ने ही बनवाया है । इसमें तो लिखा है कि लड़की की मृत्यु 27 जनवरी 2010 को..यानी शादी के दिन ही हो गयी थी । और मृत्यु का कारण “बीमारी” दिखाया गया है । फिर ये “हत्या” और लाश छिपाने की बेतुकी कहानी का क्या मतलब है ? देख लो डेथ सर्टिफिकेट !

मृत्यु प्रमाण पत्र PDF

अब पहली बार सवाल पूछने वालों के चेहरे पर बेचैनी दिखाई देने लगी । “डफर मंडली” का आत्मविश्वास उसी गति से “पिघल” रहा था…जिस गति से मई जून की दोपहरी में सड़क पर पड़ा “डामर” पिघलता है । विशेषज्ञ महोदय ने आगे कहा कि…अब ज़रा सामान्य बुद्धि से सोचिए कि यदि किसी दस्तावेज़ में यह कहा जा रहा है कि… “मृत्यु” मायके में हुई.. तारीख भी दर्ज है…कारण भी दर्ज है…तो फिर वही लोग बाद में यह कैसे कह सकते हैं कि किसी दूसरे व्यक्ति ने “हत्या” कर दी और लाश छिपा दी ? और अगर “लाश” छिपा दी तो महीनों तक चुप क्यों बैठे थे ? कहीं एक “दरखास्त” तक नही दी ।

सोशल मीडिया विश्वविद्यालय से स्नातक कुछ लोग इतने आसानी से हार मानने वालों में नहीं होते..इसलिए “बदहवास दद्दा” ने तुरंत एक नया सवाल उछाला ! नहीं… नहीं…लड़की तो जून 2009 से ही गायब थी । उसे बहुत खोजा जा रहा था लेकिन किसी को नही मिली । इस सवाल पर विधि-विशेषज्ञ मुस्कुराए और एक और फाइल निकाली और बोले । जनाब ढूंढा उसे जाता है जो कहीं गायब हो…लेकिन यहाँ उपलब्ध अभिलेख कुछ और कहानी सुना रहे हैं । उन्होंने कागज़ आगे बढ़ाया और कहा कि देखिए । उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार लड़की “एनसीसी” की गतिविधियों और प्रशिक्षण में भाग ले रही थी । और इस प्रशिक्षण के लिए अनुमति उसके माँ बाप ने ही दीं थी जिसके आवश्यक कागज़ात मौजूद हैं ।

NCC PDF

महाशय एक-दूसरे का मुँह देखने लगे । विशेषज्ञ महोदय ने दूसरा दस्तावेज़ निकाला कहा कि यह भी देखिए । उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार लड़की कहीं गायब नहीं थी…बल्कि शहर के “दिग्विजय नाथ डिग्री कालेज” की रेगुलर छात्रा थी । माँ बाप कहते हैं कि कहीं ढूंढने पर भी नहीं मिली…और दूसरी तरफ उसी दरम्यान कालेज की “फीस” भी भरते थे… और लड़की परीक्षा भी देती थी.. और उसकी रेगुलर “अटेंडेंस” भी लगती थी ।

कॉलेज प्रपत्र PDF

इतना सुनते ही डफर गैंग के चेहरे पर वैसी ही बेचैनी फैलने लगी.. जैसी बोर्ड परीक्षा में नकल की पूरी तैयारी करके पहुँचे विद्यार्थी को तब होती है…जब निरीक्षक उसकी सीट के बगल में कुर्सी डालकर बैठ जाए । विशेषज्ञ महोदय ने कहा कि अभी हैरान होने की जरूरत नही है…क्योंकि ऐसे तमाम दस्तावेज हैं जो बहुत कुछ बोलते हैं । और जब ये दस्तावेज हाईकोर्ट में बोले…तब हाईकोर्ट ने लड़की के घरवालों तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ “ऑनर किलिंग” का मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी । अब इस आदेश के बाद रोना धोना तो मचना स्वाभाविक था..आखिर मक्कारी का परिणाम तो भुगतना ही पड़ता है ।

अब “फैजाबाद कक्का” ने बड़ी उत्सुकता से पूछा…तो ये 3 लाख मांगने का क्या माजरा है ? विशेषज्ञ साहब मुस्कुराते हुए बोले ! मुकदमे में बताया गया है कि लड़के ने 3 लाख रुपये बतौर फिरौती लड़की को लौटाने के नाम पर 28 फरवरी 2010 को मांगा ! और न लौटने पर हत्या कर दी । लेकिन डेथ सर्टिफिकेट में लिखा है कि मौत बीमारी से 27 जनवरी 2010 को ही हो गयी थी । तो जनाब मृत्यु के एक महीने बाद मरी हुई लड़की को लौटाने के नाम पर 3 लाख मांगना तो अपने आप मे गजब है । जबकि डेथ सर्टिफिकेट भी लड़की के बाप ने खुद ही बनवाया है ।

इसी बीच अचानक “डफर चच्चा” ने राहत की अंतिम रस्सी पकड़ने की कोशिश की और उछल कर बोले ! यह सारे कागज़ नकली हैं ! यह सुनकर विधि-विशेषज्ञ महोदय ने बड़ी नफ़ासत से अपना चश्मा उतारा। और बोले कि जनाब, हमारे मुल्क की एक बड़ी समस्या यह है कि जब तक दस्तावेज़ हमारे पक्ष में हों…तब तक वे सत्य का अंतिम प्रमाण होते हैं…और जैसे ही वे हमारे विरुद्ध खड़े हो जाएँ..वे नकली घोषित कर दिए जाते हैं ! लेकिन आपको बता दूँ कि ये दस्तावेज़ आरटीआई के माध्यम से प्राप्त अभिलेख बताए जाते हैं । जिन्हें साक्ष्य अधिनियम में महत्वपूर्ण दस्तावेज माना गया है । अदालतें दस्तावेज़ों, अभिलेखों और साक्ष्यों को देखती हैं ड्रामेबाजी को नहीं ! और मजे की बात यह है कि इन दस्तावेजों के साथ और भी सारे दस्तावेजों पर अदालत ने अपनी मुहर लगा दी है । चाहो तो अदालत का आदेश देख लो ।

कोर्ट आदेश PDF

अब “डफर गैंग” की हालत ऐसी हो गयी थी जैसे किसी “पहलवान” को अखाड़े में ललकारते हुए उतर तो गए…लेकिन पाँच मिनट बाद ही पता चला कि सामने वाला “राष्ट्रीय चैंपियन” है । बदहवास दद्दा तपाक से बोल पड़े कि इतना धन कहाँ से आया लड़के के पास ! मकान उतना बड़ा कैसे ?

विशेषज्ञ साहब बोले..कि ये जाकर उस प्रशासन से पूछिए..वो ज्यादा बेहतर बता पाएंगे । अभी 2023 में ही तो गैंगेस्टर मुकदमे के दौरान जाँच हुई तो पता चला कि लड़के के पिता चार भाई हैं लेकिन चारों भाइयों में सिर्फ यही एक वारिस है । अभी बिहार में इनके पास इतनी जमीन है कि बटाईदारों से सिर्फ महीने का तीन चार लाख आ जाता है । और रही मकान की बात..तो मकान ससुराल से “गिफ्ट डीड” है…और बना था 2012 में..जब लड़का “सिप्ला” जैसी बड़ी फार्मा कंपनी में प्रोडक्ट मैनेजर था । इतना तो सबको पता चल चुका है । अब इस वक्त अपने घर पर बैठकर जटिल से जटिल लीगल मसले को हल करने का “कानूनी” रास्ता बताता है । लोग दूर दूर से खोजकर आते हैं । सलाह देने और उसे कानूनी अमलीजामा पहनाने का एक लाख रुपये से कम नही लेता । उदाहरण के लिए सिकरीगंज वाले आंख अस्पताल का प्रकरण देख लीजिए । अस्प्ताल संचालक की गुहार पर सारा मामला अपने हाथ मे लिया और हाइकोर्ट से लेकर लखनऊ तक सारे मैटर कानूनी रूप से हल करवा दिये । और हाँ एक बात और कि लडक़ी का “डेथ सर्टिफिकेट” कंप्यूटर से “डिलीट” मरवा दिया गया था । उसे खोज पाना नामुमकिन था..लेकिन मुंबई आई टी हब की मदद लेकर उस जुनूनी लड़के ने इसे सात महीनों के बाद भी खोज निकाला । अभी हाल ही  में नहीं देखा कि “धिक्कार मियाँ” की हरकत पर शक होते ही दिल्ली से हरियाणा और बिहार तक से सबको समेटवा लाया । आज कल तो वो यह खोजने में लगा है कि नकली “दूध” बनाने का व्यवसाय करते हुए पकड़े जाने पर किस गुप्ता पत्रकार की “परेड” हुई थी…और कौन मुस्लिम पत्रकार है..जो पत्रकारिता से पहले मंदिर से “घंटा” चुराकर बेचा करता था

इतना सुनकर “डफर गैंग” अब हैरतज़दा थे..और खौफजदा भी !
यही सोच रहे थे कि यह सब जिस दिन “अदालत” से सच साबित होकर निकला…उस दिन सोशल मीडिया पर फैलाये गए उनके रायतों का क्या परिणाम होगा ? सोच का दबाव बढ़ते ही “डफर चच्चा” और “बदहवास कक्का” पर अचानक से चुड़ैलिया अटैक हुआ और जबरदस्त “मिर्गी” का दौरा पड़ा । “डफर चच्चा” तो सड़क पर ही गश खाकर गिर पड़े…शरीर फड़फड़ा रहा था… जबान हलाल किए गए “बकरे” की मानिंद ऐंठ गई थी…मुंह से “झाग” निकल रहा था ! ऐसी विकट स्थिति देखकर “बदहवास” दद्दा और “फैजाबाद” कक्का मौके से सरपट भाग खड़े हुए ! विधि विशेषज्ञ साहब फटाफट कोई पुराना “जूता चप्पल” सड़क पर खोजने लगे ताकि “डफर चच्चा” को सुंघाया जाए । उसी दरम्यान कहीं से एक “कुत्ता” दौड़कर छटपटा रहे “डफर चच्चा” के पास पहुंचा…और पहले “डफर चच्चा” का मुँह चाटकर उन्हें होश में लाने की कोशिश की ! और जब “कुत्ता” सफल नहीं हुआ..तो उसने “डफर चच्चा” के चेहरे की तरफ अपनी एक टांग उठा कर अपने “कुत्तई” का प्रदर्शन कर दिया ! चेहरे पर जबरदस्त “धार” का “वार” महसूस करते ही “डफर चच्चा” हड़बड़ा कर उठ बैठे..और विधि विशेषज्ञ महोदय के मुंह में अपना “फेसबुकिया माइक दंड” ठूंसते हुए फिर से सवाल दाग बैठे कि…मेरे मुंह पर जो पानी तुमने मारा…उसमें कौन सा “अम्लीय” पदार्थ मिला हुआ था ? पूछता है गोरखपुर !

By systemkasach

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