वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोपों को अदालत ने माना गंभीर ! पार्क हॉस्पिटल प्रकरण में FIR दर्ज करने का आदेश !

गोरखपुर : गोरखपुर के बेतियाहाता स्थित पार्क हॉस्पिटल का विवाद अब केवल व्यावसायिक मतभेदों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कथित वित्तीय अनियमितताओं और जालसाजी के आरोपों के साथ अदालत की चौखट तक पहुँच गया है। गोरखपुर के बेतियाहाता स्थित पार्क हॉस्पिटल के साझेदारों के बीच चल रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब हॉस्पिटल के सह-स्वामी डॉ. ओंकार नाथ राय ने अपने सहयोगी पक्ष के विरुद्ध धोखाधड़ी, अभिलेखों में हेरफेर और आर्थिक गबन के आरोपों को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार यादव ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गोरखपुर के समक्ष विस्तृत तर्क प्रस्तुत करते हुए बताया कि पार्क हॉस्पिटल और M/s MedRev Healthcare Private Limited के मध्य एक विधिवत लिखित व्यावसायिक समझौता (Agreement) संपन्न हुआ था। इस समझौते के तहत अस्पताल परिसर में MedRev द्वारा OPD एवं IPD फार्मेसी का संचालन किया जा रहा था। समझौते के अनुसार फार्मेसी के समस्त वित्तीय अभिलेख, बिक्री का लेखा-जोखा तथा मासिक स्टेटमेंट तैयार करने की जिम्मेदारी MedRev की थी, जबकि लाभ के वितरण में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी प्रार्थीगण तथा 25 प्रतिशत हिस्सेदारी MedRev को प्राप्त होनी थी।

अदालत को बताया गया कि समझौते के क्लॉज 4.2 के अंतर्गत जब प्रार्थीगण द्वारा MedRev के वित्तीय रिकॉर्ड एवं डिजिटल डाटा का निरीक्षण किया गया, तब कथित रूप से गंभीर अनियमितताएँ प्रकाश में आईं। आरोप है कि मार्च 2019 से अक्टूबर 2024 के बीच बिक्री एवं लाभ संबंधी डाटा में सुनियोजित ढंग से छेड़छाड़ कर वास्तविक आय को कम दर्शाया गया। प्रार्थी पक्ष के अनुसार इस कथित हेरफेर के कारण लगभग ₹1,65,86,372 का लाभ कम दिखाया गया, जिसमें से समझौते के अनुसार प्रार्थीगण का हिस्सा लगभग ₹1,24,39,779 बनता है।

याचिका में यह भी कहा गया कि वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल डाटा तथा लेखा संबंधी सूचनाएँ प्रतिवादी पक्ष के नियंत्रण में होने के कारण मामले की सच्चाई तक पहुँचना पुलिस विवेचना के बिना संभव नहीं है। प्रार्थी पक्ष ने यह भी तर्क रखा कि अभिलेखों एवं इलेक्ट्रॉनिक डाटा की फॉरेंसिक जाँच, दस्तावेजों का संकलन तथा संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ जैसे कदम केवल पुलिस जांच के माध्यम से ही प्रभावी रूप से किए जा सकते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार यादव की दलीलों तथा अभिलेखों के अवलोकन के उपरांत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने यह माना कि प्रकरण प्रथम दृष्टया पुलिस विवेचना की मांग करता है।

न्यायालय ने प्रार्थना-पत्र स्वीकार करते हुए थाना प्रभारी कैंट, गोरखपुर को निर्देशित किया कि यदि पूर्व में कोई अभियोग पंजीकृत न किया गया हो तो मामले में विधिसम्मत एफआईआर दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की जाए तथा अनुपालन आख्या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए। अदालत के इस आदेश के बाद अब पार्क हॉस्पिटल से जुड़े इस बहुचर्चित साझेदारी विवाद की जांच पुलिस स्तर पर आगे बढ़ेगी। जांच के दौरान वित्तीय अभिलेखों, डिजिटल डाटा और कथित लेखा हेरफेर के आरोपों की सत्यता की पड़ताल की जाएगी, जिस पर मामले की आगामी दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी ।

By systemkasach

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