गोरखपुर : गोरखपुर मंडल के अपर निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (एडी हेल्थ) अगले महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं । लेकिन सेवानिवृत्ति से ठीक पहले उनके कार्यालय से निकलने वाले आदेशों से अधिक चर्चा उन फाइलों की है… जो महीनों से उनकी मेज पर धूल फांक रही हैं । सवाल यह उठ रहा है कि क्या रिटायरमेंट से पहले कुछ चर्चित भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने या संबंधित लोगों को राहत दिलाने की कोशिशें हो रही है ?
डॉ. बी.के. सुमन का मामला…
जिला अस्पताल में सैनिटाइज़र खरीद प्रकरण की जांच कई महीनों से एडी हेल्थ कार्यालय में लंबित है । उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार डॉ. बी.के. सुमन के विरुद्ध दस्तावेज़ी साक्ष्य और शिकायतें सब कुछ मौजूद हैं लेकिन आज तक अंतिम जांच रिपोर्ट AD साहब द्वारा शासन को नहीं भेजी गई ।

दूसरी ओर, उनकी कथित निजी प्रैक्टिस से जुड़े वीडियो भी सार्वजनिक हो चुके हैं…किंतु उस जांच का परिणाम भी अब तक AD साहब के कार्यालय से बाहर कदम नहीं रख सका है । आज तक डॉक्टर वीके सुमन के आवास को उनके प्राइवेट क्लिनिक के नाम पर जाना जाता है..जहां वे खूब प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं । यकीन न हो तो गूगल बाबा से पूछ लीजिए । आज तक गूगल भी वही कह रहा है…जो मैं कह रहा हूँ ।

जाँच में भ्रष्टाचारी सिद्ध शेष कुमार चौधरी का मामला..
दूसरी ओर, जिला अस्पताल के कैब टेक्नीशियन शेष कुमार चौधरी विभागीय जांच में भ्रष्टाचार का दोषी पाया जा चुका हैं । इसके लिए स्वास्थ्य भवन से बार-बार स्पष्टीकरण और कार्रवाई संबंधी पत्र आने के बाद भी एडी हेल्थ कार्यालय ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया है ।

यदि AD साहब की जांच रिपोर्ट अंतिम थी और आगे की कार्रवाई शासन के अधिकार क्षेत्र में है… तो यह बात AD साहब द्वारा स्वास्थ्य भवन को आधिकारिक रूप से आज तक लिखकर क्यों नहीं बताई जा रही है ?
चुप्पी आखिर किसलिए…?
AD साहब को कई शारीरिक “व्याधियों” ने घेर रखा है । “काया” स्वस्थ नहीं है….और जब “काया” की स्थिति सही न चल रही हो तब “रिटायरमेन्ट” तक सारा “बकाया” चुका देना चाहिए । “माया” के चक्कर मे “काया” और “बकाया” से कोई समझौता नही करना चाहिए । लेकिन सूत्रों के अनुसार AD साहब के कार्यालय में रिटायरमेंट से पहले कुछ विवादित मामलों को इस तरह “मैनेज” करने की कोशिश चल रही है…कि भ्रष्टाचार के पुख्ता आरोपों से घिरे अधिकारियों और कर्मचारियों को लाभ मिल सके । यदि ऐसा नहीं है…तो फिर महीनों से लंबित फाइलों पर निर्णय क्यों नहीं लिया जा रहा ? सरकारी कुर्सी पर बैठा अधिकारी फाइल रोकने के लिए नहीं…फैसला करने के लिए होता है । औऱ जो फ़ाइल रोककर बैठा रहे…तो समझिए कि उसे कागजी “गांधी जी” के दर्शन हो चुके हैं । अब निगाहें इस बात पर हैं कि “रिटायरमेंट” से पहले एडी हेल्थ साहब इन लंबित मामलों में कानून और नियमों के अनुसार निर्णय लेते हैं…या पिछले AD साहब की तरह एक भ्रष्टाचारी को बचाने की कोशिश में खुद ही उलझ जाते हैं ।
समाचार समाप्त हुए..अब एक कहानी..!
बहुत दिनों से कुछ लोग मेरे पास फेसबुक की कुछ लिंक भेज रहे हैं । लिंक खोलकर देखता हूँ तो..कभी लिखा रहता है…बाहर मिल तो बताता हूँ…कभी लिखा रहता है कि “पेट्रोल” से जलाकर मार दो…कभी लिखा रहता है कि…गोरखनाथ में सब मिलकर घेर लो…और कभी लिखा रहता है कि “कचहरी” में उड़ा दो ! एक सज्जन ये सब देखकर मुझसे पूछने लगे कि…ये सब क्या है ? कुछ समझ ने नहीं आ रहा । फिर मैंने उन्हें एक कहानी सुनाई ।
एक जंगल में “शेर” और “शेरनी” अपनी “गुफा” के पास बैठे हुए थे…और आपस में बात चीत कर रहे थे । उनकी बातचीत ऊपर पेड़ पर बैठे “बंदर” “बंदरिया” भी सुन रहे थे । तभी “शेर” ने “शेरनी” से कहा…कि देखो मेरा शरीर “गर्म” हो रहा है ! शेरनी ने छूकर कहा कि हां महाराज “गर्म” है ! शेर ने फिर कहा कि देखो मेरे “रोंगटे” खड़े हो रहे है…शेरनी ने देखकर कहा हां महाराज खड़े हो चुके है ! शेर ने फिर कहा कि देखो मेरी “आंखे” लाल हो चुकी है और “नथुने” फड़क रहे हैं…शेरनी ने “आंखे” और “नथुने” देखकर कहा…हाँ महाराज बिल्कुल ऐसा ही हो रहा है । शेर ने कहा अब मेरे “शिकार” का समय हो गया है…और “शेर” ने भारी “गर्जना” के साथ “शिकार” के लिए “छलांग” लगा दी…और 30 मिनट में ही “शिकार” मार लाया ।
सज्जन ने कहा कि इस कहानी का मतलब समझ मे नहीं आया । ऐसा तो अक्सर होता है । “शेर” आखिर “शेर” होता है । तो मैंने कहा.. आगे सुनिए तब समझ मे आएगा ।
हुआ ये कि, “शेर” और “शेरनी” की ये सब बाते और नजारा उपर पेड़ पर बैठे “बंदर” और “बंदरिया” भी देख और सुन रहे थे । यब सब देख अब “बंदर” के अंदर भी हौसला जागने लगा । अब बंदर ने चिल्लाकर बंदरिया से पूछा…कि देखो मेरा शरीर “गर्म” हो रहा है क्या ? बंदरिया ने कहा नहीं तो…”ठंडा” पड़ा है बिल्कुल पानी जैसा ! अब बंदर को गुस्सा आ गया ! उसने फिर चिल्लाकर कहा…देखो मेरे “रोंगटे” खड़े हुए है क्या ? बंदरिया ने फिर मना कर दिया…कि नहीं “बंदर” राजा ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा है ! बंदर ने फिर कहा कि देखो मेरी “आंख” लाल हो रही है क्या ? बंदरिया ने कहा कि…ऐसा कुछ नहीं है…सो जा “आराम” से…क्यों बहकी बहकी बात कर रहा है…कल “रात” की उतरी नही क्या ?

बंदर ने कहा…नहीं बंदरिया, अब मेरे “शिकार” का समय हो चुका है । ये कहते ही बंदर ने जोर से “चिर चिर” की आवाज लगाते हुए पेड़ से छलांग लगा दी…और नीचे बैठे “शेर” के ठीक सामने गिर पड़ा । अब “शेर” ने “बंदर” को अपने पंजों में ऐसा दबोच लिया…कि बंदर का “हैप्पी बर्थ डे” हो गया ।
कहानी का सार यह है कि कुछ नकलची “बंदर” रात में अक्सर चढ़ा लेने के बाद…जब अपनी “ठरक” को संभाल नहीं पाते…”हराम” की मिल जाती है तो अक्सर “औकात” से इतनी ज्यादा “हरक” लेते हैं..जैसे “दारू फिर न मिलेगी दोबारा” ! उसके बाद “फेसबुक” पर “शेर” बन जाते हैं । अब ऐसा न हो कि कहानी पढ़ते भी फिर से बंदर की “ठरक” जाग जाए । सज्जन महोदय, अब कहानी…और कहानी का सार समझ गए थे…इसलिए मुस्कुराते हुए चल दिये ।

