दिनदहाड़े मोबाइल छीनना यदि अपराध है…तो सीओ कोतवाली और दरोगा दुर्गेश पर FIR क्यों नहीं ?

गोरखपुर : कानून की भाषा में देखें तो कल “कोतवाली” सर्किल में जो हुआ… उसने एक बड़ा “सवाल” खड़ा कर दिया है । आरोप है कि “कोतवाली” सीओ “ओंकार दत्त तिवारी” के निर्देश पर दरोगा “दुर्गेश वैश्य” ने एक ऐसे पत्रकार का “मोबाइल” छीन लिया…जो “समाजवादी पार्टी” के एक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था । यह भी बताया जाता है कि पत्रकार को रिकॉर्डिंग करने से सीओ “ओंकार दत्त तिवारी” और कोतवाली थानाध्यक्ष “छत्रपाल सिंह” ने मना किया था । छत्रपाल सिंह “योग दिवस” के नाम पर “जूता” पहनकर “योग” करने का “स्वांग” रच सकते हैं…और यदि कोई “पत्रकार” अपना काम करे…तो इनके पेट मे “मरोड़” पैदा हो जाती है । जूता पहनकर “योग” करने की इनकी अद्भुत “क्षमता” यही बताती हैं कि…ये “काजल” की “कोठरी” में बैठकर भी “सफेदी” पर अच्छा “प्रवचन” दे लेते हैं । देखें तस्वीर…!

सवाल सीधा है कि…यदि ऐसा ही “मोबाइल” छीनने का काम कोई आम नागरिक करता…तो क्या उसके विरुद्ध लूट, छिनैती या अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं होता ? तो फिर आप जैसे वर्दीधारियों के लिए कानून का पैमाना अलग क्यों होना चाहिए ?क्या ऐसी स्थिति में सीओ ओंकार दत्त तिवारी और दरोगा दुर्गेश वैश्य पर “छिनैती” का मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए ? हाँ, मामला बिगड़ता देख दो तीन घंटे बाद “पत्रकार” को उसका मोबाइल वापस कर दिया गया । लेकिन क्या किसी की संपत्ति पहले छीन लेना और बाद में लौटा देना…घटना की गंभीरता को समाप्त कर देता है ? आपको मोबाइल बिल्कुल भी वापस नहीं करना चाहिए था सीओ साहब ! आपको पहले “धिक्कार मियाँ” से इजाजत लेनी चाहिए थी । ये सब कोई “पत्रकार” थोड़े ही हैं । पत्रकार तो सिर्फ वो हैं जो “दरगाह” की फेंकी हुई “बोटियों” पर पल रहे हैं । बाकी तो सब चलती फिरती “लाशें” हैं । टाइम ट्रैवेल करती हुईं “लाशें” ! इनसे क्या “दिल” लगाना और इनसे क्या बात करना ? बहुत सतही…बहुत अधूरे और बहुत नादान लोग हैं ये ! इन्हें “मोबाइल” वापस मत दीजिये… इन्हें “रोने” दीजिए…इन्हें “जाने” दीजिए…इन्हें “जीने” दीजिए !

मोबाइल छीनने की आड़ में की जा रही तबादले की जमीन तैयार !

अब मोबाइल छीनने के इस पूरे घटनाक्रम को कुछ विद्वान लोग एक बड़े “संदर्भ” से जोड़कर देख रहे हैं । चर्चा यह है कि थाना राजघाट के “अय्याश” और पेशेवर बदमाश इकरार अहमद को संरक्षण देने के आरोपों से जुड़े गंभीर दस्तावेज़ और साक्ष्य सामने आने के बाद सीओ साहब कोतवाली सर्किल से हटने की “जमीन” तैयार कर रहे हैं…ताकि संभावित “न्यायिक” और “प्रशासनिक” जाँच का सामना न करना पड़े । लेकिन सवाल यह है कि क्या “तबादला” जवाबदेही से मुक्ति दिला देगा ? नहीं सीओ साहब…अब यह संभव नहीं है ! आप चले कहीं भी जाएं…लेकिन आपको बार बार ही नहीं कई बार…और कई बार ही नहीं बल्कि सैकड़ों बार…पलट कर यहीं आना पड़ेगा । क्योंकि थाना राजघाट स्थित दरगाह से जुड़े मामलों में सीओ साहब द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टें भी गंभीर सवालों के घेरे में हैं । अपनी एक रिपोर्ट में सीओ साहब ने लिखा है कि “दरगाह” का कोई बैंक खाता नहीं है…और वहाँ किसी “मदरसे” का संचालन नहीं होता है । देखें पत्र !

जबकि 12 जून 2026 को दर्ज एफआईआर में स्पष्ट उल्लेख है कि “दरगाह” स्थित “मदरसे” में पढ़ाई की शिकायत लेकर पहुँचे एक अभिभावक के साथ बदमाश इकरार अहमद और उसके गुंडों द्वारा मारपीट की गई । मौके पर पहुँचे 112 नम्बर की पुलिस से भी बदसलूकी की गई । यदि एफआईआर में “मदरसे” का उल्लेख है…तो फिर सीओ साहब की रिपोर्ट में “मदरसे” के अस्तित्व से इंकार किस आधार पर किया गया ? देखें FIR !

महिला FIR PDF

आप क्या छिपा रहे हैं सीओ साहब ? FIR बता रही है कि “दरगाह” के अंदर संचालित अवैध “मदरसे” में सैकड़ों बच्चे “तालीम” ले रहे हैं । आखिर वह कौन सी “तालीम” है जो चोरी छिपे बच्चों को दी जा रही है ? कहीं “जिहाद” और “फसाद” तो नहीं ? इस बात की संभावना इसलिए भी बढ़ जाती है सीओ साहब…क्योंकि इसी अय्याश और बदमाश इक़रार अहमद को गोरखपुर पुलिस ने “देशविरोधी” नारा लगाकर युवाओं को भड़काने के मामले में पकड़ा था…और इस बदमाश से लिखित “माफीनामा” भी लिया था । देखें रिपोर्ट PDF !

देशविरोधी नारे इक़रार रिपोर्ट PDF

आखिर सच क्या है सीओ साहब ?

यदि दरगाह में “मदरसा” नहीं चलता…तो एफआईआर में उसका उल्लेख क्यों है ? और यदि “मदरसा” चलता है…तो आपने कौन से राज छिपाने के लिए गलत रिपोर्ट लगाई है सीओ साहब ? आपकी रिपोर्ट कहती है सीओ साहब कि “दरगाह” का कोई खाता नहीं है…जबकि “वक्फ बोर्ड” की रिपोर्ट कहती है कि बगैर खाते के “दरगाह” का संचालन नहीं हो सकता । अब बताईये सीओ साहब…की यदि “दरगाह” का खाता ही नहीं है…तो हर वर्ष “दरगाह” पर करोड़ रुपये का आने वाला देशी विदेशी “चंदा” आखिर कहाँ जा रहा है और उसे किस काम मे लगाया जा रहा है ? इतना ही नहीं सीओ साहब…बल्कि दिल्ली के कथित “हनीट्रैप गैंग” से जुड़े प्रकरण में…जब उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इकरार अहमद के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का प्रार्थना पत्र आपको दिया गया…तब भी आपने यह रिपोर्ट लगा दी कि मामला दिल्ली के कालिंदीकुंज थाने में दर्ज है…इसलिए यहाँ से कोई कार्रवाई नहीं हो सकती । देखें पत्र !

लेकिन कालिन्दीकुंज थाना की रिपोर्ट कहती है सीओ साहब..कि ऐसा कोई भी मुकदमा उनके थाने पर दर्ज नहीं है । दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट यह कहती है कि उनके थाने की “मुहर” और “जीडी” की कूटरचना की गई है । यदि कालिंदीकुंज थाने में ऐसा कोई मुकदमा दर्ज ही नहीं था सीओ साहब…तो फिर आपने यह फर्जी रिपोर्ट किस आधार पर बनाई ? आपने इक़रार अहमद जैसे अय्याश और पेशेवर बदमाश को एफआईआर से बचाने के लिए गलत “तथ्य” प्रस्तुत क्यों किये ? देखें पुलिस रिपोर्ट PDF !

रिपोर्ट सीओ कैम्पियरगंज इक़रार PDF

आप सिर्फ एक बार बोल दीजिए सीओ साहब कि ये सारे आरोप “झूठे” हैं…और ये सब आपको “बदनाम” करने की साजिश है ! आप सीएम योगी आदित्यनाथ के राष्ट्रप्रेम, अनंत सेवा…अविराम सानिध्य और अथाह समर्पण के एक एक पल की क़सम खाकर ही बोल दीजिये…कि “खलीलाबाद” के एक चोर,अय्याश और अपराधी को संरक्षण देने के लिए आप आखिर मजबूर क्यों हैं ? बोल दीजिए कि ऊपर दिए गए पत्र फर्जी हैं और इन्हें पढ़ने वालों की आँखों में “रतौंधी” या “मोतियाबिंद” हो गया है । बोल दीजिए कि ऊपर दी गयी चिट्ठी में “हस्ताक्षर” आपके नहीं बल्कि फ़िल्म स्टार “अभिषेक बच्चन” के हैं । बोलिये सीओ साहब…कुछ तो बोलिए ! आज तो पूरा का पूरा “पुलिस कुटुंब” आपके सम्मान में 90 डिग्री पर नज़रें झुकाए हुए आपकी ओर निहार रहा है ।

ये सिर्फ एक आरोप नहीं हैं सीओ साहब…बल्कि ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर उपलब्ध “दस्तावेज़” आपसे माँग रहे हैं…और इस बार जवाब आपको देना ही पड़ेगा… क्योंकि बहुत से उजड़े हुए परिवारों की बद्दुआएं और “फना” हो चुकी रूहें अपना हिसाब माँग रही हैं । इक़रार अहमद जैसे “पेशेवर” और “अय्याश” अपराधी से आपके वफ़ादारियों के सबूतों की “फेरहिस्त” बहुत लंबी है सीओ साहब ! ये एक एपिसोड में ख़त्म होने वाली “दास्तां” नहीं है । आपके संरक्षण में पोषित हो रहे इस पेशेवर बदमाश और इसके “गुंडों” को शांति सुकून का जीवन पसंद नही आ रहा था । इन्हें अपने जीवन में “एडवेंचर” चाहिए था…अब जरा इनसे पूछिये कि कैसा लग रहा है “एडवेंचर” ?

मेरी समझ में नहीं आता कि एक “डीएसपी” रैंक का अधिकारी होने के बाद भी…भ्रष्टाचार पक्षपात उत्पीड़न और अनियमितता के गंभीर आरोपों की “मणिमाला” पहनकर…और चेहरे पर “अभयदान” के इमामी ब्रांड का पाउडर मलकर आप…उस दो टके के “अय्याश” और “बदमाश” को बचाने के लिए आखिर इतने “व्याकुल” क्यों हैं सीओ साहब ? चंद बेईमानों की “अक्षौहिणी” सेना बनाकर आप “दरगाह” की आड़ में चल रहे अवैध धंधों और इंसानियत के शरीर पर फैल रहे “कोढ़” को आखिर कब तक “संरक्षित” कर सकेंगे ?

By systemkasach

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