गोरखपुर : गोरखपुर के चर्चित “दरगाह” को अपने कारनामों से बदनाम करने वालों से जुड़ा एक ऐसा “वीडियो” सामने आया है…जिसने “झूठ” और “मक्कारी” की “पतलून” को चीरते हुए “सच” को फिर से सबके सामने ला खड़ा किया है । एक तरफ वायरल वीडियो में फरियादी से बातचीत के दौरान पुलिस की मौजूदगी में ही बदमाश इक़रार अहमद का “गुर्गा जफर खान” फरियादी से हाथापाई करता दिखाई दे रहा है…तो दूसरी तरफ मारपीट का वीडियो बना रहे फरियादी के हाथ से “मोबाइल” छीनने का प्रयास करता हुआ बदमाश “इक़रार अहमद” कैमरे में कैद हुआ है । ये सब वही लोग हैं जिनके नाम 12 जून 2026 को थाना राजघाट में दर्ज FIR में शामिल मारपीट के घटनाक्रम से जुड़े बताए जा रहे हैं । “दरगाह” पर “फरियादियों” से मारपीट की “तस्वीरें” देखने के लिए लिखे “गुंडागर्दी की तस्वीरें” लाइन पर क्लिक करें ।
क्या है पूरा मामला ?
दरगाह परिसर में संचालित कथित अवैध “मदरसे” में पढ़ाई को लेकर शिकायत करने पहुँचे अभिभावकों और परिजनों के साथ बदमाश इक़रार अहमद तथा उसके गुर्गों द्वारा “पुलिस” की मौजूदगी में ही मारपीट की गई है । तस्वीरें बता रही हैं कि अपने आपको “पत्रकार” बताने और दिन भर “कोतवाली” थाने में “धूनी” रमाकर बैठने वाले “दरगाही गुर्गे” जफर खान ने मौके पर मौजूद “ऑन ड्यूटी” पुलिस वाले का हाथ पकड़ लिया…और “पुलिस” को धकेलते हुए “फरियादी” पर हमलावर हो गया । अब “दरगाही गुंडों” द्वारा “पुलिस” के साथ की गई “अभद्रता” पर सीओ साहब “खून” बिल्कुल भी नहीं खौलेगा…क्योंकि यहाँ मसला “पुलिस” के “इकबाल” का नहीं…बल्कि “दरगाही” गुंडों के “ख्याल” का है । इसी मामले में “एसएसपी” गोरखपुर के आदेश पर 12 जून 2026 को थाना राजघाट में इक़रार अहमद, जफर खान समेत अज्ञात गुर्गों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था । जाहिर सी बात है कि FIR में दर्ज बतौर अज्ञात बाकी “अभियुक्त”…वही “गुर्गे” हैं जो मौके पर “वीडियो” में विवाद करते दिखाई दे रहे हैं । FIR की प्रति देखने के लिए नीचे लाइन पर क्लिक करें ।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वायरल वीडियो में “पुलिस” की मौजूदगी के दौरान ही “फरियादियों” के साथ धक्का मुक्की और मारपीट करता हुआ “जफर खान”…तथा “फरियादी” का “मोबाइल” छीनता हुआ बदमाश “इक़रार अहमद” कैमरे में कैद हुआ है । वीडियो में “गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” से जुड़ा बताया जाने वाला “सुभाष गुप्ता” तथा दरगाह का मीडिया प्रभारी बताया जाने वाला “आशिक मिजाज” शख्स “सय्यद सहाब” अहमद भी “घटनास्थल” पर दिखाई दे रहा है । देखें वीडियो..
वीडियो ने भी उठाए सीओ कोतवाली की रिपोर्ट पर सवाल !
यह वीडियो उन “दावों” पर सवाल खड़े करता है…जिसके विषय में “सीओ कोतवाली” द्वारा यह रिपोर्ट लगाई गई थी कि “दरगाह” परिसर में कोई “मदरसा” संचालित नहीं होता । जबकि “दस्तावेज” बताते हैं कि “मदरसे” की “फीस” के नाम पर “दरगाह” के नाम की “रसीदें” जारी हुई है । अब क्या सीओ कोतवाली की उस फर्जी “जांच” रिपोर्ट पर “सवाल” नही उठना चाहिए… जिसमें कहा गया था कि “दरगाह” में कोई “मदरसा” संचालित नहीं होता है । यदि ऐसा है सीओ साहब तो फिर ये वीडियो, रसीदें FIR और अन्य “दस्तावेज़” क्या बता रहे हैं ?

अभियुक्त की तहरीर पर पीड़ित पर ही मुकदमा…कोतवाली सर्कल की न्याय व्यवस्था
मारपीट की इस घटना के संबंध में 12 जून 2026 को थाना राजघाट पर एसएसपी गोरखपुर के निर्देश पर दर्ज मुकदमे के बाद अपेक्षा थी…कि “निष्पक्ष” विवेचना होगी और पीड़ित फरियादी को सबूतों के आधार पर “न्याय” मिलेगा । लेकिन “कोतवाली सर्कल” पुलिस के “लहू” में “सरकार” से ज्यादा बदमाश “इक़रार” का “नमक” घुल चुका है ! बदमाश इक़रार के इशारे पर लोगों के खिलाफ तमाम फर्जी मुकदमे दर्ज कर अघा चुके थाना राजघाट ने “फरियादियों को “न्याय” देने की बजाय…फरियादियों पर ही दबाव बनाने का रास्ता ढूँढ़ लिया । इस दबाव की “रणनीति” के तहत घटना के 15 दिन बाद थाना “राजघाट” ने अभियुक्त “जफर खान” की तहरीर पर लूट छिनैती का मुकदमा…दिन्नाक 28 जून 2026 को “वादी मुकदमा” पर ही लिख दिया । चर्चा है कि इसमें “थानेदार” साहब की कोई गलती नहीं है…बल्कि उन्होंने तो सिर्फ अपने “सीओ साहब” के आदेश का पालन किया है…और “सीओ साहब” ने बदमाश “इक़रार अहमद” के “हुक्म” का ! सारी सच्चाई दरगाह की सीसीटीवी समेत कई वीडियो में कैद है…लेकिन फिर भी “बेहयाई” का आलम यह है…कि अभियुक्त “जफर खान” ने थाना राजघाट पर अपनी दी हुई “तहरीर” में खुद को दिखाया है कि…दरगाह पर वह “नमाज” पढ़ने जाया करता है । तो क्या “जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” का सदस्य “सुभाष गुप्ता” भी वहाँ “नमाज” पढ़ने ही जाता है ? यदि ऐसा है, तो यह गंभीर “जाँच” का विषय है…कहीं ऐसा तो नहीं कि…बदमाशों के प्रभाव में आकर कथित पत्रकार “सुभाष गुप्ता” ने अपना “धर्मपरिवर्तन” करा लिया है ? देखें जफर खान द्वारा दर्ज कराया गया “बदलापुर” स्टाइल मुकदमा !

वीडियो में दिखाई दे रहे सम्पूर्ण “घटनाक्रम” ने हमेशा की तरह “सिस्टम वेबसाइट मीडिया” के उस दावे पर भी अपना “ठप्पा” लगा दिया है…जिसमे बताया गया था कि “दरगाह” की आड़ में चल रहे अवैध कामों और “गुंडागर्दी” का वाहक कोई और नहीं बल्कि बदमाश “इक़रार अहमद” और उसके तथाकथित “दरगाही पत्रकार” ही हैं । इस वायरल वीडियो ने यह भी बता दिया है कि…दरगाह की “आड़” में बैठे हुए एक पेशेवर अपराधी इक़रार अहमद…और जफर खान, सुभाष गुप्ता…समेत दरगाह के मीडया प्रभारी “सय्यद सहाब” अहमद की सच्चाई क्या है ? इस मामले में “कोतवाली सर्कल” की पुलिस से कोई उम्मीद करना तो बेमानी है …क्योंकि यहाँ तो पूरे “कुँए” में ही “भांग” मिली हुई है । इत्तेफाक देखिए कि दो दिन पहले “सीओ साहब” ने एक “पत्रकार” का मोबाइल छीना था…और लगभग 25 दिन पहले इनके चहेते बदमाश “इक़रार” ने “वीडियो” बनाने वाले “फरियादी” का मोबाइल छीनने की कोशिश की ।

जाहिर सी बात है कि वायरल वीडियो अब “अदालत” के समक्ष “दरगाह” को लेकर विचाराधीन मामले में भी चीख चीख कर अपनी गवाही देगा । इस वीडियो के साथ मौजूद FIR, रसीदें तथा अन्य दस्तावेज़ यह बताते हैं कि यह मामला केवल एक “मारपीट” का नहीं…बल्कि “सीओ कोतवाली” सर्कल पुलिस की जाँच, प्रशासनिक रिपोर्ट और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता पर गंभीर “प्रश्नचिह्न” है ।
दरगाही गुर्गे VIP संग ली गई सेल्फी को बनाते हैं रौब ग़ालिब करने का हथियार !
“जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” गोरखपुर की नई “कार्यकारिणी” का हाल तो यह है कि…इस “संस्था” ने सब कुछ जानते हुए भी कुछ दिन पहले बदमाश इक़रार अहमद की घुसपैठ सीएम योगी के “कार्यक्रम” में करा दी थी । यदि “जमीर” का कुछ अंश बचा हो…और यदि सत्य से “आँखे” चुराने की आदत न हो…तो वायरल विडियो पत्रकारों और पुलिस प्रशासन को झकझोर कर नींद से जगाने के लिए काफी है । “पुलिस” की मौजूदगी में “गुंडई” करना…ऑन ड्यूटी पुलिसकर्मी का हाथ पकडकर “कानून” को “चुनौती” देना…और फिर इन्ही “घृणित” हाथों से “सीएम योगी” को प्रेस क्लब के कार्यक्रम में “फूल” देना…यह बताता है कि “जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” की आड़ में पत्रकारिता की “कोपलें” नहीं फूट रही बल्कि…देश विरोधी तत्वों को तथा अपराध की नर्सरी को “संरक्षित” किया जा रहा है ।


आज “गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” में ऐसे बहरूपियों और दलालों की भरमार हो चुकी है…जो एक तरफ कुर्ता औऱ जालीदार टोपी पहनकर पुलिस की मौजूदगी में “गुंडागर्दी” करते हैं…और फिर दूसरी तरफ “भेष” बदलकर पत्रकार बनते हुए अधिकारियों संग “सेल्फी” खिंचवाकर “भौकाल” टाइट करते हैं ! नीचे दी गयी तस्वीर को देखिए…और अंदाजा लगाइए कि “जर्नलिस्ट प्रेस क्लब” की आड़ में इन “गुर्गों” ने “आम वर्ग” से लेकर “अधिकारी वर्ग” तक सबको किस कदर “गुमराह” कर रखा है ।


